Nation- Codeine Syrup Case: जौनपुर में मेडिकल एजेंसी पर बनाए जा रहे थे खिड़की-दरवाजे, 4 पर केस दर्ज; कोडीन कफ सिरप केस में फंसे सभी- #NA

Codeine Syrup Case: जौनपुर में मेडिकल एजेंसी पर बनाए जा रहे थे खिड़की-दरवाजे, 4 पर केस दर्ज; कोडीन कफ सिरप केस में फंसे सभी

कोडीन मिक्स कफ सिरप केस में बड़ी कार्रवाई.

कोडीन मिक्स कप सिरप की अवैध तरीके से खरीद बिक्री मामले में जौनपुर के चार और मेडिकल फर्मों पर केस दर्ज हुआ है. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि निरीक्षक रजत पांडेय की तहरीर पर नगर कोतवाली में चारों मेडिकल फर्म के संचालकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया गया है. जांच में पता चला कि नशे की इस खेप की सप्लाई दिल्ली की वान्या इंटरप्राइजेज द्वारा जौनपुर में की गई थी. हैरत की बात यह है कि जिन मेडिकल स्टोर्स के नाम पर कोडीन मिक्स सिरप बेची गई, वहां एल्यूमीनियम के खिड़की दरवाजे बनाए जाते मिले. हालांकि, इस अनियमितता को देखते हुए ASP ने ड्रग विभाग के अधिकारियों द्वारा ऐसे मेडिकल स्टोर्स को लाइसेंस देने पर सवाल उठाए हैं.

दरअसल, कोडीन मिक्स कप सिरप की अवैध रूप से क्रय-विक्रय किए जाने के मामले में शैली इंटरप्राइजेज के बाद दिल्ली की वान्या इंटरप्राइजेज का नाम समाने आया था. वान्या इंटरप्राइजेज द्वारा यूपी के कई जिलों में कोडीन मिक्स कप सिरप सप्लाई की गई थी. इसकी लेजर सीट से क्रय करने वाली फर्मों की जांच के लिए लखनऊ से सभी जिलों में निर्देश दिए गए थे.

जौनपुर में दो मेडिकल फर्मों द्वारा कोडीन मिक्स कफ सिरप की खरीद करने की पुष्टि वान्या इंटरप्राइजेज के लेजर सीट से हुई. नगर कोतवाली चित्तरसरी, शकरमंडी स्थित आकाश मेडिकल स्टोर्स द्वारा पांच बिल पर 100ml के कुल 90 हजार कफ सिरप खरीदे गए. इसी तरह सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र के रामपुर पदुमपुर स्थित शिवम मेडिकल स्टोर्स द्वारा वान्या इंटरप्राइजेज से 100ml के 96 हजार 475 कफ सिरप खरीदे गए.

OMG! मेडिकल एजेंसी पर बनाए जा रहे थे खिड़की-दरवाजे

जौनपुर के औषधि निरीक्षक रजत पाण्डेय ने जब दोनों मेडिकल फर्मों की जांच की तो हैरान करने वाला मामला समाने आया. 90 हजार कोडीन मिक्स कप सिरप की खरीद करने वाले आकाश मेडिकल की फर्म में एल्युमिनियम की खिड़की आदि का काम होता पाया गया. अधिकारियों द्वारा जब खरीदी गई कफ सिरप के बारे में पूछताछ की गई तो संचालक द्वारा अनभिज्ञता जताई गई.

इसी तरह शिवम मेडिकल एजेंसी पर जांच टीम जब पहुंची तो बंद पाया गया. लोगों ने बताया कि ये अक्सर बंद रहता है. हालांकि जब संचालक द्वारा वान्या इंटरप्राइजेज से खरीदी गई कफ सिरप के बारे में पूछा गया तो वह भी इसके बारे में खुद को अनजान बताते हुए किसी तरह की खरीद न करके की बात कही.

फिलहाल, जांच में पाया गया कि इन दोनों मेडिकल संचालकों ने दिल्ली की वान्या इंटरप्राइजेज से खरीदी गई कोडीन युक्त कफ सिरप जौनपुर के विशेषरपुर स्थिति मनीष मेडिकल एजेंसी को बेच दी थी. मनीष मेडिकल एंजेसी भी बंद मिली. फोन से जब संचालक से संपर्क करने की कोशिश की तो फोन बंद मिला. स्थानीय लोगों ने भी बताया कि यहां किसी तरह की दवा की खरीद बिक्री नहीं होती है.

4 फर्मों पर केस दर्ज

जांच में वान्या इंटरप्राइजेज द्वारा बेची गई कफ सिरप को अवैध तरीके से गैरचिकित्सकीय व नशे के उपयोग के लिए लाभ लेते हुए बेचा गया. आकाश मेडिकल एजेंसी और शिवम मेडिकल एजेंसी द्वारा 100ml की कुल 1,86,475 शीशी कफ सिरप मनीष मेडिकल एजेंसी को बेचा गया. करीब 2 करोड़ 61 लाख की कोडीन मिक्स कफ सिरप के क्रय-विक्रय के मामले में दोषी पाते हुए चारों फर्मों के संचालकों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है.

जौनपुर के औषधि निरीक्षक रजत कुमार पाण्डेय की तहरीर पर नगर कोतवाली में दिल्ली की वान्या इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सहारनपुर निवासी विशाल उपाध्याय, जौनपुर के आकाश मेडिकल एजेंसी के संचालक आकाश मौर्य, शिवम मेडिकल एजेंसी के संचालक शिवम मौर्य और जौनपुर के ही मनीष मेडिकल एजेंसी के संचालक अरुण सोनकर के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है. हालांकि, इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में भी जांच टीमें जुटी हुई हैं.

अब तक 17 पर केस दर्ज

बता दें कि इसके पहले ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर नगर कोतवाली में शुभम जायसवाल, उसके पिता भोला जायसवाल समेत 13 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई थी. कोडीन मिक्स कफ सिरप कांड में अब तक जौनपुर में कुल 17 मेडिकल फर्म संचालकों पर केस दर्ज हुआ है.

ASP ने ड्रग लाइसेंस देने पर उठाए सवाल

इस मामले में जौनपुर के अपर पुलिस अधीक्षक शहर आयुष श्रीवास्तव ने बताया कि नगर कोतवाली में ड्रग इंस्पेक्टर की तहरीर पर एक दूसरी एफआईआर दर्ज कराई गई है. जांच में पाया गया कि दिल्ली की वान्या इंटरप्राइजेज द्वारा जौनपुर के आकाश और शिवम मेडिकल स्टोर्स पर 100ml के कुल 1 लाख 83 हजार कफ सिरप की सप्लाई की गई. स्थलीय निरीक्षण में मेडिकल स्टोर्स नहीं मिले. कहीं एल्युमिनियन के दरवाजे-खिड़की बनने का काम होता था तो कहीं कुछ और. इन मेडिकल स्टोर्स को ड्रग विभाग द्वारा बिना जांच किए लाइसेंस कैसे दे दिया गया, ये बड़ा सवाल है. उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है. किसी भी दोषी को बक्सा नहीं जाएगा.

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