Nation- दिल्ली को गैस चैंबर बनने दिया गया, EV ग्रोथ तीन साल से ठप- पिछली सरकारों पर भड़के मंत्री आशीष सूद- #NA

दिल्ली के मंत्री आशीष सूद (फाइल फोटो)
दिल्ली सरकार में ऊर्जा, परिवहन एवं शहरी विकास से जुड़े मामलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि आज कुछ लोग यह कहने का प्रयास कर रहे हैं कि नई सरकार के आते ही प्रदूषण बढ़ गया, जबकि सच्चाई यह है कि दिल्ली आज जिस प्रदूषण संकट से जूझ रही है, उसमे पिछली सरकार की नाकाम EV नीति का भी बहुत बड़ा योगदान है.
सूद ने कहा, की दिल्ली की पूर्व की सरकारों ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन ज़मीन पर नीति को लागू नहीं किया गया, न समय पर भुगतान हुआ, न सिस्टम चला. जिसका नतीजा यह हुआ कि EV नीति ज़मीन पर घुट गई और धीरे-धीरे ढह गई, और वाहन प्रदूषण लगातार बढ़ता रहा.
EV इंसेंटिव पोर्टल आंकड़ों का दिया हवाला
दिल्ली EV इंसेंटिव पोर्टल के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री आशीष सूद ने बताया कि ₹42,58,86,343 (लगभग ₹42.5 करोड़) की EV खरीद सब्सिडी आज भी लंबित है. यह राशि 22,730 पात्र नागरिकों की है. उन्होंने कहा कि ये सभी लाभार्थी सभी जांच और पात्रता मानदंड पूरे कर चुके हैं. इसके बावजूद सालों से उनका पैसा रोका गया.
EV इंसेंटिव पोर्टल जून 2023 से बंद
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग देश और दिल्ली के भविष्य को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन अपनाते हैं, उन्हें प्रोत्साहन देने के बजाय उनका हक रोक लिया गया. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनता के भरोसे के साथ अन्याय है. सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि EV इंसेंटिव पोर्टल जून 2023 से बंद पड़ा है, जिसके कारण वास्तविक लंबित सब्सिडी राशि ₹42.5 करोड़ से कहीं अधिक होने की पूरी संभावना है.
मंत्री ने कहा कि EV Policy 2020 में यह लक्ष्य तय किया गया था कि 2024 तक दिल्ली में 25% नए वाहन पंजीकरण इलेक्ट्रिक होंगे. लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है.
2022: EV रजिस्ट्रेशन 7.7%
2023: EV रजिस्ट्रेशन 8.3%
2024: EV रजिस्ट्रेशन मात्र 7% penetration
नीति कागजों और प्रचार तक सीमित
आशीष सूद ने कहा कि 25 प्रतिशत का सपना दिखाया गया, लेकिन तीन साल में EV पेनेट्रेशन मात्र 7 से 8.5 % के बीच अटका हुआ है. उन्होंने कहा यह साफ बताता है कि नीति कागजों और प्रचार तक सीमित रह गई.सूद ने कहा कि पिछले तीन सालों में EV ग्रोथ के ठप होने के पीछे मुख्य कारण साफ हैं.
– जनता का ₹42.5 करोड़ से अधिक पैसा फंसा
– सरकार पर से भरोसा टूटा
– नई EV खरीद स्वाभाविक रूप से रुक गई
‘वाहन प्रदूषण बढ़ने के लिए पिछली सरकार जिम्मेदार’
उन्होंने कहा कि जब सरकार समय पर भुगतान नहीं करती, तो आम नागरिक EV क्यों खरीदेगा? उन्होंने कहा कि नीति इसलिए नहीं रुकी कि लोग EV नहीं चाहते थे, बल्कि इसलिए कि सरकार डिलीवरी करने में असफल रही. सूद ने दो टूक कहा कि वाहन प्रदूषण बढ़ने के लिए मौजूदा सरकार नहीं, बल्कि पिछली सरकार की नीतिगत विफलता जिम्मेदार है.
मंत्री ने कहा कि न भुगतान हुआ, न भरोसा बना, न ग्रोथ आई और EV नीति ज़मीन पर ढह गई. उन्होंने कहा कि आज वही लोग प्रदूषण पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान दिल्ली सरकार लंबित EV सब्सिडी मामलों की तत्काल समीक्षा करेगी, नीति में विश्वसनीयता और पारदर्शिता वापस लाएगी, इसके साथ ही EV को फिर से जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएगी.
‘दिल्ली को भाषण नहीं, जमीन पर निभाए गए वादे चाहिए’
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली को भाषण नहीं, जमीन पर निभाए गए वादे चाहिए. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ़ पर्यावरण की ज़रूरत नहीं हैं, यह जनता के भरोसे की कसौटी है. उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में और मुख्यमंत्री रेखा के नेतृत्व में वर्तमान दिल्ली सरकार इस विरासत में मिले मुद्दे को पूरी जिम्मेदारी के साथ सुलझाएगी. उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों ने सरकार पर भरोसा करके EV अपनाया, उनके साथ न्याय किया जाएगा. उन्होंने कहा कि टूटा हुआ भरोसा लौटाना हमारी प्राथमिकता है.
दिल्ली को गैस चैंबर बनने दिया गया, EV ग्रोथ तीन साल से ठप- पिछली सरकारों पर भड़के मंत्री आशीष सूद
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