Nation- टेढ़े पैरों को किया सीधा, 500 मासूमों को दी नई जिंदगी… गाजीपुर का ये क्लीनिक कर रहा कमाल- #NA

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के मेडिकल कॉलेज में क्लब फुट क्लीनिक चलाई जा रही है. इस क्लीनिक में उन बच्चों की इलाज किया जाता है जिनका जन्म के दौरान पैर मुड़ा हुआ होता है. ऐसे बच्चे जिनका जन्म से पैर टेढ़े होते है उनके लिए ये क्लीनिक वरदान से कम नहीं है. छोटे बच्चों के टेढ़े पैरों को ट्रीटमेंट कर सीधा किया जाता है और आंकड़े की बात करें तो पिछले 5 साल में करीब 500 बच्चों के टेढ़े पैरों को सीधा कर सामान्य जीवन देने का काम किया गया है.
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मिरेकल फीट इंडिया के सहयोग से चल रहा कार्यक्रम वरदान साबित हो रहा है. इस कार्यक्रम से नई पौध को नया जीवन मिल रहा है. वहीं उनके अभिभावकों की जेब पर भी कोई अतिरिक्त असर नहीं पड़ रहा है. गाजीपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज में पिछले कई सालों से जन्म से 5 दिन के बाद के बच्चों के पैर में टेड़ापन आने पर उनका निशुल्क ऑपरेशन किया जा रहा है. इस ऑपरेशन का कार्य नोडल अधिकारी डॉ. रजत कुमार सिंह ऑर्थो विभाग के द्वारा किया जा रहा है.
बच्चों के टेढ़े पैरों का किया जाता है इलाज
डॉ. रजत ने बताया कि उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज में पिछले साल जून के महीने में इस कार्य को संभाला था. उन्होंने अब तक सफलतापूर्वक 75 से अधिक बच्चों का टेनोटॉमी विधि से ऑपरेशन कर उनके टेढ़े पैरों को सीधा किया है. जबकि इस तरह के ऑपरेशन के कार्य व पीजी कोर्स करने के दौरान बाराबंकी में साल 2017 से ही शुरू किया है. अब तक करीब 500 से अधिक बच्चों का सिक्स कास्टिंग टेक्निक और फिर लास्ट में टेनोटॉमी तकनीक से ऑपरेशन कर टेढ़े पैर को सीधा करने का काम कर चुके हैं.
डॉ. रजत कुमार सिंह ने बताया कि जिन बच्चों के पैर का पंजा अंदर की ओर मुड़ा होता है. उन बच्चों का ईलाज पोंसेटी मेथड के द्वारा सही किया जा सकता है. उन बच्चों को पहले प्लास्टर लगाया जाता है तथा फिर उन बच्चों के टेंडन को रिलीज करने के लिए उनका टेनोटॉमी किया जाता है. इसके बाद उन बच्चों को विशेष प्रकार के जूते प्रदान किए जाते हैं जो कि मिरेकल फीट इंडिया के द्वारा नि:शुल्क दिया जाता है.
इन विधियों से किया जाता है ठीक
उन्होंने बताया कि जन्म के समय से ही बच्चों के पैर का पंजा मुड़ा हुआ होता है. उन बच्चों के पैरों के उपचार के लिए पोंसेटी तकनीकी के सहयोग से क्लब-फुट का उपचार संभव है. इसमें धीरे-धीरे बच्चों के पैर को बेहतर स्थिति में लाया जाता है और फिर इस पर एक प्लास्टर चढ़ा दिया जाता है, जिसे कास्ट कहा जाता है. यह हर सप्ताह 5 से 8 सप्ताह तक के लिए दोहराया जाता है. आखिरी कास्ट पूरा होने के बाद, अधिकांश बच्चों के टेंडन को ढीला करने के लिए एक मामूली ऑपरेशन की आवश्यकता होती है. यह बच्चे के पैर को और अधिक प्राकृतिक स्थिति में लाने में मदद करता है, जिससे पैर अपनी मूल स्थिति पर वापस न आ जाये.
समय पर नहीं होने से बढ़ जाती है समस्या
उन्होंने बताया की इस जन्मजात विकृति का इलाज ठीक समय पर नहीं किया गया तो यह आगे चलकर विकलांगता से ग्राषित हो जायेंगे. ईलाज की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है की बच्चो के माता पिता यह सुनिश्चित करें की बच्चे को ब्रेस (विशेष प्रकार का जूता) अवश्य पहनाएं. कभी-कभी ब्रेस ना पहनाना, इस प्रक्रिया के काम नहीं करने का मुख्य कारण होता है. यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बच्चा लंबे समय तक विशेष जूते और ब्रेसिज आमतौर पर तीन महीने के लिए पूरे समय और फिर रात में भी पहनाने होते हैं.
टेढ़े पैरों को किया सीधा, 500 मासूमों को दी नई जिंदगी… गाजीपुर का ये क्लीनिक कर रहा कमाल
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