Nation- ‘धमाका हुआ, 2 मिनट में 4 फीट तक सैलाब आया, दो पत्थरों के बीच…’, किश्तवाड़ त्रासदी में कैसे बचे श्रद्धालु, बताई तबाही की आंखोदेखी- #NA

'धमाका हुआ, 2 मिनट में 4 फीट तक सैलाब आया, दो पत्थरों के बीच...', किश्तवाड़ त्रासदी में कैसे बचे श्रद्धालु, बताई तबाही की आंखोदेखी

किश्तवाड़ आपदा.

Kishtwar Cloudburst News: तारीख थी 14 अगस्त 2025… जगह जम्मू संभाग का किश्तवाड़ इलाका. दोपहर के 12:30 बजे ही थे कि तभी यहां चशोटी इलाके में अचानक से तेज आवाज के साथ बादल फटा. ऊपर से भरभरा कर मलके का सैलाब सा आया और कई लोग इसकी चपेट में आ गए. हर तरफ चीख-पुकार मच गई. स्थानीय लोग मदद के लिए वहां पहुंचे. रेस्क्यू टीमें भी बिना देर किए वहां पहुंचीं. घायलों को अस्पताल पहुंचाया जाने लगा. यह सैलाब 45 लोगों के लिए काल बनकर आया. उनकी मलबे में दबकर मौत हो गई. जबकि, 70 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं और 100 घायल हैं.

पड्डार के उप-जिला अस्पताल और किश्तवाड़ जिला अस्पताल में सभी घायलों का इलाज चल रहा है. मृतकों में दो CISF के जवान भी शामिल हैं. हादसे की तस्वीरें आपको भी विचलित कर सकती हैं. जो लोग इस हादसे में बचे उन्होंने हादसे का दर्द बयां किया. किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना पर एक पीड़ित ने कहा- हम वहीं थे… अचानक एक धमाके जैसी आवाज आई. बादल फटने के बाद, हम वहां से निकलने लगे. लेकिन 2 मिनट के अंदर ही, वहां 4 फीट तक का मलबा आ गया. हम कुछ लोगों को बचा पाए, लेकिन कुछ लोग फंस गए. हम 11 लोग थे. हम सुरक्षित हैं. लेकिन मेरी बेटी और मेरी पत्नी मलबे में फंस गए थे, और अब उनकी हालत स्थिर है.

भारत भूषण नामक शख्सअपनी 23 वर्षीय बेटी को ढूंढ रहे हैं, जिसका इस त्रासदी के बाद से कोई पता नहीं चल पा रहा है. जब यह त्रासदी हुई, उस समय भारत भूषण और उनकी बेटी सुदूर पद्दार उप-मंडल में स्थित प्रतिष्ठित मचैल माता मंदिर में प्रार्थना करने गए थे. भूषण ने रुंधे हुए स्वर में कहा- मैं केवल अपनी बेटी गहना रैना के बारे में जानना चाहता हूं, जो लापता है.

दो पत्थरों के बीच फंस गए थे

एक श्रद्धालु गणेश ने कहा- हम एक नाले के किनारे ‘लंगर’ स्थल पर नाश्ते का इंतजार कर रहे थे, तभी कुछ लोग घबराहट में चिल्लाने लगे और सभी को सुरक्षित स्थानों पर भागने के लिए कहने लगे. अचानक पानी का एक तेज बहाव आया. साथ में पत्थर और पेड़ भी आ गिरे, जिससे सब कुछ दब गया. उन्होंने कहा कि वह भाग्यशाली थे कि बच गए क्योंकि वह दो बड़े पत्थरों के बीच फंस गए थे. गणेश ने बताया- लंगर स्थल लोगों से खचाखच भरा था. कुछ तीर्थयात्रा पर जा रहे थे और कुछ मंदिर से लौट रहे थे. यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि मलबे में कितने लोग फंसे होंगे.

तीर्थ यात्रा स्थगित कर दी गई

चशोटी किश्तवाड़ शहर से लगभग 90 किलोमीटर और मचैल माता मंदिर के रास्ते पर पहला गांव है. यह जगह पड्डर घाटी में है, जो 14-15 किलोमीटर अंदर की ओर है. इस इलाके के पहाड़ 1,818 मीटर से लेकर 3,888 मीटर तक ऊंचे हैं. इतनी ऊंचाई पर ग्लेशियर (बर्फ की चादर) और ढलानें हैं, जो पानी के बहाव को तेज करती हैं. मचैल माता तीर्थयात्रा हर साल अगस्त में होती है. इसमें हजारों श्रद्धालु आते हैं. यह 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलेगी. फिलहाल इस यात्रा को रोक दिया गया है. यह रूट जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी लंबा है और इसमें पद्दर से चशोटी तक 19.5 किमी की सड़क पर गाड़ियां जा सकती हैं. उसके बाद 8.5 किमी की पैदल यात्रा होती है.

‘धमाका हुआ, 2 मिनट में 4 फीट तक सैलाब आया, दो पत्थरों के बीच…’, किश्तवाड़ त्रासदी में कैसे बचे श्रद्धालु, बताई तबाही की आंखोदेखी

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