Nation- फर्जी क्यूआर कोड, नकली फर्म… तमिलनाडु से आती थी ‘मौत की दवा’, नेपाल से बांग्लादेश तक खरीदार- #NA

फर्जी क्यूआर कोड, नकली फर्म... तमिलनाडु से आती थी 'मौत की दवा', नेपाल से बांग्लादेश तक खरीदार

नकली दवाओं का कारोबार करने वाले गिरोह का पर्दाफाश.

उत्तर प्रदेश के आगरा में नकली दवाओं का कारोबार करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और औषधि विभाग की एक संयुक्त टीम ने छापेमारी कर लगभग 2.43 करोड़ रुपये कीमत की नकली दवाएं जब्त की हैं और एक दवा व्यापारी को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई फव्वारा क्षेत्र में स्थित बंसल मेडिकल एजेंसी, हेमा मेडिकल स्टोर और चार गोदामों पर की गई. जांच के दौरान, हेमा मेडिको और उसके गोदाम से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं मिलीं.

इस रैकेट के सरगना, दवा व्यापारी हिमांशु अग्रवाल को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया है. उसने अधिकारियों को एक करोड़ की रिश्वत देने का प्रयास भी किया था लेकिन उसे गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उसने बताया कि यह रैकेट सिर्फ आगरा तक सीमित नहीं था, बल्कि इन नकली दवाओं को नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में भी भेजा जाता था. इन अवैध लेन-देन के लिए हवाला का इस्तेमाल किया जाता था, जो इसे एक संगठित अपराध का मामला बनाता है.

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फर्जी क्यूआर कोड और फर्मों का इस्तेमाल

नकली दवाओं को असली दिखाने के लिए गिरोह नकली क्यूआर कोड का इस्तेमाल करता था. इससे ग्राहकों के लिए असली और नकली दवाओं में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो जाता था. इसके अलावा दवाओं की बिक्री के लिए फर्जी फर्मों का भी इस्तेमाल किया जाता था. एक टेंपो से जब्त किए गए माल की कीमत 87 लाख रुपये बताई गई, जबकि उसका बिल केवल 10 लाख रुपये का था. यह बिल भी लखनऊ की एक फर्जी फर्म के नाम पर बनाया गया था.

तमिलनाडु से मंगाई जाती थीं नकली दवाएं

जांच में पता चला है कि हिमांशु अग्रवाल ये नकली दवाएं तमिलनाडु के चेन्नई से मंगवाता था. वह 10 नामी कंपनियों के नाम पर 14 तरह की दवाएं मंगवाता था. यह माल मात्र 10% बिलिंग पर आता था और इसे ग्रे मार्केट में खपा दिया जाता था. इस मामले की आगे की जांच के लिए एसटीएफ और ड्रग विभाग ने तमिलनाडु सरकार को भी रिपोर्ट भेजी है.

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अधिकारियों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

ड्रग कमिश्नर नरेश मोहन दीपक और असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर अतुल उपाध्याय ने बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर नकली दवाओं के कारोबार की सूचना मिल रही थी, जिसका मुख्य केंद्र आगरा था. करीब 15-20 दिनों की गहन जांच के बाद बंसल फार्मास्युटिकल्स और हेमा मेडिकल के दो दवा व्यापारियों को चिह्नित किया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई.

सन फार्मा, सनोफी और ग्लेनमार्क जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी पकड़ी गई दवाओं को स्कैन करके उनके लाइव डेटा से नकली होने की पुष्टि की है. छापेमारी अभी भी जारी है और कई स्थानों को सील कर दिया गया है. अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच के बाद और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों का खुलासा हो सकता है.

फर्जी क्यूआर कोड, नकली फर्म… तमिलनाडु से आती थी ‘मौत की दवा’, नेपाल से बांग्लादेश तक खरीदार

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