Nation- फरीदाबाद पुलिस ने ‘डॉक्टर टेरर ग्रुप’ पर रेड्स और खुलासे पर टाइमलाइन की जारी, 30 अक्टूबर से हुई थी शुरुआत- #NA

फरीदाबाद पुलिस ने 'डॉक्टर टेरर ग्रुप' पर रेड्स और खुलासे पर टाइमलाइन की जारी, 30 अक्टूबर से हुई थी शुरुआत

दिल्ली ब्लास्ट के आरोपी.

दिल्ली ब्लास्ट में ‘डॉक्टर टेरर ग्रुप’ केस को लेकर फरीदाबाद पुलिस ने इनकी पूरी कुंडली खंगाल दी है. पुलिस ने इस टेरर ग्रुप पर रेड्स और खुलासे की टाइमलाइन के बारे में बताया है. वैसे इस पूरे मामले की जांच एनआईए और अन्य जांच एजेंसियां भी कर रही हैं, लेकिन फरीदाबाद पुलिस के इनपुट ही सभी काम कर रहे हैं.

फरीदाबाद पुलिस को इस पूरे मामले की जांच 30 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिलती है. वहां की पुलिस सर्च वारंट लेकर फरीदाबाद पहुंचती है. इसके बाद स्थानीय पुलिस कमिश्नर इस मामले में फरीदाबाद पुलिस क्राइम ब्रांच को भी लगाती है. इसके बाद 30 अक्टूबर को ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मुजम्मिल को गिरफ्तार किया जाता है और ट्रांजिट रिमांड पर जम्मू कश्मीर ले जाया जाता है.

फरीदाबाद पहुंचती है जम्मू-कश्मीर पुलिस

8 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस पुलिस फिर से फरीदाबाद पहुंचती है. पुलिस अधिकारी बताते हैं कि मुजम्मिल से पूछताछ करने पर जानकारी मिली है कि कुछ हथियार और विस्फोटक का पता चला है. इसके बाद फरीदाबाद पुलिस की सहायता से यूनिवर्सिटी और दूसरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जाता है. वहां से सिल्वर कलर की एक कार से असॉल्ट राइफल, पिस्टल, तीन मैगजीन असॉल्ट राइफल की, 83 कारतूस और पिस्टल की दो एडिशनल मैगजीन और 7 जिंदा कारतूस बरामद किए जाते हैं. इसके बाद यूनिवर्सिटी में ही गाड़ी को सीज कर दिया जाता है.

358 किलो विस्फोटक बरामद

बताया जाता है कि इसके बाद 9 नवंबर को दौज इलाके में एक मद्रासी की बिल्डिंग से रूम नंबर 15 से 12 छोटे बड़े सूटकेस मिला, जिसमें 358 किलो विस्फोटक तैयार मात्रा में था. इसमें विस्फोटक के अलावा टाइमर, बैटरी, कटर, डेटोनेटर, फेस मास्क, विग, वायर आईडी को तैयार करने का समान था. बॉम स्कॉयड टीम ने रिकवर करके इसे जम्मू पुलिस को सौंप दिया.

10 नवंबर की शाम दिल्ली में ब्लास्ट

10 नवंबर को इनपुट के बाद फतेहपुर तगा इमाम इश्तियाक के मकान में 2553 किलो कट्टो में अमोनियम नाइट्रेट, मद्रासी के घर मे तैयार अवस्था से एक स्टेप रॉ मैट्रीरियल बरामद किया गया. इसी दिन शाम को 6 बजकर 52 मिनट पर लालकिले के पास रेड लाइट पर ब्लास्ट होता है. जिससे पूरा देश सकते में आ जाता है. बताया जाता है कि इस पूरे ब्लास्ट के उमर था जिसने खुद को ब्लास्ट कर इस घटना को अंजाम दिया था.

खण्डावली गांव में मिली इको स्पोर्ट

बताया जाता है कि 30 अक्टूबर को मुजम्मिल को जब हिरासत में ले लिया था तब से ही उमर फरार था और उसकी लोकेशन नूह मेवात में पता चली. फिर इनपुट मिला I 20 कार को डीलर सोनू ने बेचा था. इसको दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को हैंडओवर कर दिया. ब्लास्ट की रात को ही सोनू को हैंडओवर कर दिया गया था. 12 नवंबर को इनपुट मिला कि रेड कलर की इको स्पोर्ट संदिग्ध गाड़ी खण्डावली गांव में है. इसके बाद फरीदाबाद पुलिस ने राउंड अप करके सेंट्रल एजेंसी को इस बारे में बताया. जांच करने पर गाड़ी में कोई विस्फोटक नही मिला, जिसको सीज किया. लेकिन अब फ़ॉरेंसिक जांच में पता लगेगा कोई ट्रेसस था या नहीं.

वासिब और मुस्तकिल को पकड़ा

इसके बाद 13 नवंबर को दौज के रहने वाले वासिब जिसने ये गाड़ी इको स्पोर्ट पार्क की थी और उमर के सम्पर्क में था. आरोपी कम्प्यूटर ऑपरेटर था. यूनिवर्सिटी ने उसे भी जांच एजेंसी के हवाले कर दिया. 13 नवंबर को ही शाइन की एक सिल्वर कलर की ब्रीजा कार यूनिवर्सिटी में मिली, फिर एनएसजी की टीम यूनिवर्सिटी पहुंची और जांच के बाद कार को सीज कर दिया. वहीं, 14 नवंबर को मुस्तकिल को सुनहरा गांव मेवात से हिरासत में लिया और जांच के बाद एजेंसी के हवाले कर दिया. दावा है कि ये उमर के सम्पर्क में था और चाइना से MBBS किया था. इसके बाद अलफलाह यूनिवर्सिटी में इंटर्नशिप कर रहा था.

फरीदाबाद पुलिस ने ‘डॉक्टर टेरर ग्रुप’ पर रेड्स और खुलासे पर टाइमलाइन की जारी, 30 अक्टूबर से हुई थी शुरुआत

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