Nation- यूपी में ABVP के आंदोलन में नहीं मिल रहा पुराने कार्यकर्ताओं का साथ, सरकार में मंत्री बन कर छात्र संगठन को भूल गए!- #NA

Abvp ने सरकार से पूछे सवाल
यूपी के बाराबंकी में आंदोलन कर रहे ABVP कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज मामले में सियासत गर्म हो चली है और डैमेज कंट्रोल एक्शन चालू है. सरकार में ही कई मंत्री खुद ABVP में रहते हुए छात्र राजनीति के रास्ते मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में आए, लेकिन पूरे मामले में वही मंत्री छात्रों से मिलने नहीं पहुंचे और न ही उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया ही सामने आई. हालांकि सवाल पर अब जवाब देते हुए जरूर देखे जा रहे हैं.
विवाद और प्रदर्शनों का सिलसिला थमा नहीं था कि सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने ABVP के छात्रों के लिए गुंडे शब्द का प्रयोग कर दिया जिसके बाद छात्र और भड़क उठे. आनन-फानन में उनके बेटों ने मोर्चा संभाला और सफाई देनी शुरू की. ओपी राजभर की डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या से मुलाकात की तस्वीर भी सामने आई लेकिन खुद राजभर ने इस पर आगे कुछ नहीं कहा. फिलहाल स्थिति ये है कि ABVP अब तक के सरकारी ऐक्शन से संतुष्ट नहीं है.
सरकार और अधिकारियों पर दबाव बनाने की अपील
तमाम नेता मंत्री घायल छात्रों से मिलने केजीएमयू अस्पताल पहुंच रहे हैं लेकिन इस पर अब एबीवीपी की ओर से एक बयान सामने आया है जिसमें वो कह रहे हैं कि बजाय देखने आने के और सोशल मीडिया पोस्ट से अपनी संवेदनशीलता दिखाने की बजाय सरकार में बैठ कर उनके अधिकारियों पर दबाव बनाएं कि वो इस पूरे प्रकरण पर त्वरित कार्रवाई करें.
एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्रृष्टि सिंह ने कहा कि जो लोग इसी एबीवीपी से निकलकर सरकार में मंत्री भी बने हैं- कुछ मिलने आए और जो नहीं भी आए हैं उनसे यही कहेंगे कि अपनी संवेदनशीलता अस्पताल में मिलने आने और उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर के ना दिखाएं, बल्कि सरकार में हमारी आवाज़ उठाएं, अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बनाएँ। किनके इशारे पर इस तरह की बर्बरता हुई?
विपक्ष सरकार पर हमलावर
अब विपक्ष भी इस प्रकरण पर सरकार को घेर रही है. अखिलेश यादव ने तो ABVP का नया फुल फॉर्म अखिल भारतीय वीडियो ऑफ पिटाई बताते हुए कहा कि उन्हें बहुत दुख हो रहा है. अखिलेश ने इसे परिषद और वाहिनी की लड़ाई करार देते हुए सरकार पर तंज किया है.
सवाल तो ये भी उठ रहे हैं कि सरकार में कई मंत्री हैं जो खुद ABVP के सदस्य रहे, छात्र राजनीति से मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में आए लेकिन पूरे प्रकरण पर उनकी चुप्पी सवालों के घेरे में है. हालांकि सवाल पूछे जाने पर अब अपनी बात जरूर रख रहे हैं.
ABVP ने चार मांगें रखी हैं और सरकार को 48 घंटे का समय दिया है जिसकी मियाद कर खत्म हो रही है. मांगें पूरी न होने पर पूरे प्रदेश में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है.
अभाविप की मुख्य मांगें
- लाठीचार्ज घटना में संलिप्त पुलिसकर्मियों व बाहरी गुंडों पर मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई हो.
- विधि पाठ्यक्रम के अवैध संचालन की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित किया जाए तथा विश्वविद्यालय को बंद किया जाए.
- उच्च शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर विश्वविद्यालय पर कठोर कार्रवाई की जाए.
- लगभग 6 बीघे सरकारी भूमि पर विश्वविद्यालय के अवैध कब्जे और तहसीलदार कोर्ट द्वारा लगाए गए 27.96 लाख रुपए जुर्माने व कब्जा हटाने के आदेश को तत्काल लागू किया जाए और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया जाए.
सरकार पूरी तरह डिफेंसिव मोड
आक्रोश बढ़ता देख सरकार पूरी तरह डिफेंसिव मोड पर आ गई है और आज भी सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय घायल छात्रों से मिलने KGMU पहुंचे. इसके बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा ओपी राजभर के बेटे अरविंद राजभर के साथ केजीएमयू पहुंचे. कांग्रेस ने भी ओपी राजभर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अपने ही बयान से घिरे राजभर बहुत जल्दी पलटी मार गए.
यूपी में ABVP के आंदोलन में नहीं मिल रहा पुराने कार्यकर्ताओं का साथ, सरकार में मंत्री बन कर छात्र संगठन को भूल गए!
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