Nation- टूट गई ‘दोस्ती’, बिखर गए दोनों गठबंधन, साथ आए ठाकरे बंधु… जानिए BMC चुनाव का पूरा लेखा-जोखा- #NA

BMC में सभी प्रमुख दल अपने-अपने स्तर पर लड़ रहे चुनाव
देश की सियासत अब जब राजनीतिक गठबंधनों के सहारे चल रही है तो नगर निगम चुनाव में महाराष्ट्र में लंबे समय से चली आ रही दोस्ती टूट गई. राजनीतिक गठबंधन में मिलकर चुनाव लड़ने की जगह अकेले ही चुनाव लड़ रहे हैं. चर्चित मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में राज्य में सत्तारुढ़ महायुति में शामिल घटक दल भी साथ चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. वहीं विपक्षी महाविकास अघाड़ी भी कई जगहों पर अपने- अपने प्रत्याशियों के साथ मैदान में हैं. हालांकि ठाकरे परिवार इस चुनाव के जरिए और करीब आ गया है.
BMC चुनाव के बीच उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का परिवार और करीब आ गया है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने कल मंगलवार शाम शिवसेना (उद्धव) के अध्यक्ष और चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मुलाकात की. दोनों भाइयों की यह मुलाकात अगले महीने राज्य में होने वाले महानगरपालिका चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की समयसीमा खत्म होने के बाद हुई. राज ने उद्धव के आवास ‘मातोश्री’ में मुलाकात की. दोनों बीएमसी में मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन सीट शेयरिंग को लेकर मामला थोड़ा उलझा हुआ है.
नगर निगम चुनाव के लिए 15 जनवरी को पड़ेंगे वोट
राजधानी मुंबई और कई अन्य शहरों में एमएनएस और शिवसेना (उद्धव) गठबंधन में महानगरपालिका चुनाव लड़ रही है. मुंबई में, दोनों दलों का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के साथ गठबंधन है. हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि बीएमसी चुनाव में दोनों दल कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि 227 सीटों वाले बीएमसी में शिवसेना (उद्धव) 150 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो शरद पवार की एनसीपी को 11 सीट दी जा सकती हैं जबकि शेष सीट राज ठाकरे की पार्टी के खाते में गई है.
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित राज्य के 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को कराए जाएंगे और मतों की गिनती अगले दिन होगी. नगर निगम चुनाव के लिए कल मंगलवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की मियाद खत्म हो गई. बीएमसी देश का सबसे बड़ा और सबसे धनी नगर निकाय है, जिसका सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है.
महायुति में बीजेपी- शिवसेना का कहा-कहां साथ
राज्य की सत्ता चला रहे महायुति गठबंधन भी कई जगहों पर नगर निगम चुनाव में साथ नहीं है. हालांकि इस चुनाव में सबसे अहम चुनाव मुंबई नगर निगम चुनाव है और हर किसी की नजर इसी पर टिकी है. बीजेपी 137 सीटों पर तो शिवसेना (एकनाथ शिंदे) 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. साथ ही दोनों दल अपने-अपने सहयोगी दलों को भी अपने कोटे से सीटें देंगे.
बीजेपी और शिवसेना ने मुंबई के अलावा ठाणे, जलगांव और नागपुर सहित अहम नगर निगम के चुनावों के लिए समझौता किया है।. हालांकि छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, नासिक, नांदेड़, अमरावती, मालेगांव, अकोला, मीरा-भयंदर, धुले, उल्हासनगर, सांगली, जलना, पिंपरी चिंचवाड़, परभणी, सोलापुर, लातूर, अहिल्यागर और नवी मुंबई सहित प्रमुख महानगरों के चुनावों में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं.
महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना जहां मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, उसमें मुंबई के अलावा ठाणे, जलगांव, पनवेल, नागपुर, भिवंडी, कोल्हापुर, चंदरपुर, वसई विरार, कल्याण, डोम्बिवली और इचलकरंजी नगर निगम शामिल हैं.
कांग्रेस के सहयोगी VBA को नहीं मिले उम्मीदवार
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, राज ठाकरे की एमएनएस और शरद पवार की एनसीपी मिलकर मुंबई नगर निगम में चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि राज्य की सियासत में महा विकास आघाड़ी का हिस्सा रही कांग्रेस अकेले ही बीएमसी चुनाव लड़ रही है और उसने वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन किया है.
हालांकि बीएमसी चुनाव में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ रही और प्रकाश आंबेडकर की अगुवाई वाली वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के पास लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले. वीबीए को कांग्रेस की ओर से आवंटित 62 सीट में से 20 पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले और उसे यह सीट सहयोगी पार्टी को लौटानी पड़ गई. डॉक्टर बी आर आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर की अगुवाई वाली इस पार्टी का मुख्य आधार ‘नवबौद्ध’ वोटर्स हैं.
227 सीटों वाले बीएमसी चुनाव के लिए रविवार को कांग्रेस और वीबीए के बीच 143 और 62 सीटों के अनुपात में समझौता हुआ था. जबकि कुछ सीटें राष्ट्रीय समाज पक्ष और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (गवई गुट) को देने पर सहमति बनी. लेकिन वीबीए ने कांग्रेस को बताया कि उसके पास 20 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं हैं और वह यह सीट ‘वापस’ कर रही है.
दूसरी ओर, बीजेपी ने मौजूदा विधायकों और सांसदों के रिश्तेदारों को टिकट नहीं देने के अपने ही रुख के उलट जाते हुए बीएमसी चुनाव में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के परिवार के तीन लोगों को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की. राहुल नार्वेकर के भाई और पूर्व पार्षद मकरंद नार्वेकर, भाभी हर्षिता नार्वेकर और चचेरी बहन गौरवी शिवलकर-नार्वेकर को मैदान में उतारा गया है.
नागपुर में भी अलग-अलग लड़ेंगी कांग्रेस और एनसीपी
कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) नागपुर नगर निगम में भी अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे. एनसीपी ने अपने सहयोगी दल पर 15 सीट आवंटित नहीं करने का आरोप लगाया. एनसीपी का कहना है कि पार्टी ने शुरू में 25 सीटों की मांग की थी लेकिन बाद में वह 15 सीटों पर राजी हो गई. फिर भी कांग्रेस ने उसकी मांग को नजरअंदाज कर दिया.
इससे पहले, 2017 के चुनाव में 151 सदस्यीय नागपुर निकाय में बीजेपी ने 108 सीटों पर जीत हासिल की तो कांग्रेस ने 28 सीट, बहुजन समाज पार्टी ने 10 सीट, शिवसेना (अविभाजित) ने दो सीट और एनसीपी (अविभाजित) ने एक सीट जीती थी.
कुल 528 सीटों पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस
नगर निगम चुनाव के लिए एमवीए का साथ छोड़ने के बाद कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस मुंबई, ठाणे, पुणे, छत्रपति संभाजी नगर और पिंपरी-चिंचवड़ समेत कई नगर निगमों में कुल 528 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है. साल 1999 के बाद यह पहली बार है जब कांग्रेस इतनी ज्यादा नगर निगम सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ने जा रही है. इसके अलावा, कांग्रेस नागपुर, अकोला, अमरावती और चंद्रपुर में भी अकेले चुनाव लड़ रही है, और लातूर की 70 में से 65 सीटों और नांदेड़ की 81 में से 60 सीटों पर भी चुनाव लड़ेगी, जबकि शेष सीटें प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी को जाएंगी.
ठाणे में कांग्रेस 101 सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो पुणे और छत्रपति संभाजी नगर में 100 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है. इसी तरह पिंपरी-चिंचवड़ में कांग्रेस ने 60 उम्मीदवार उतारे हैं. दूसरी ओर, पवार परिवार भी नगर निगम चुनाव को लेकर साथ आ गया है. राज्य के पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में, कांग्रेस और NCP के बीच ‘दोस्ताना’ मुकाबला हो सकता है. वहीं अजित पवार जिन्होंने 2 साल पहले जुलाई 2023 में अपने चाचा शरद का साथ छोड़ दिया था और NCP के 18 विधायकों को लेकर बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया था, और इसके बदले उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया, हालांकि अब वह इस चुनाव में महायुति गठबंधन में नहीं हैं.
टूट गई ‘दोस्ती’, बिखर गए दोनों गठबंधन, साथ आए ठाकरे बंधु… जानिए BMC चुनाव का पूरा लेखा-जोखा
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