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Goa Arpora Night Club Fire: लूथरा ब्रदर्स को मिलेगी राहत या लगेगा झटका? अग्रिम जमानत याचिका पर 5 बजे फैसला

5 बजे आएगा लूथरा ब्रदर्स की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला.

गोवा नाइट क्लब अग्निकांड में आरोपी सौरव और गौरव लूथरा की अग्रिम जमानत याचिका पर रोहिणी कोर्ट में सुनवाई हुई. गोवा सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपियों की ओर से कहा गया कि वो बिजनेस सिलसिले में बैंकॉक गए थे. ये भी दावा किया गया कि वो सिर्फ लाइसेंसी थे. बिजनेस लोकल मैनेजमेंट संभालता था. ये गलत जानकारी दी गई है, सौरव लूथरा सिग्नेटरी हैं. वहीं, लूथरा ब्रदर्स के वकील तनवीर मीर ने कहा कि घटना दुखद है लेकिन घटना के बाद हर तरफ से मेरे मुवक्किल और उसके परिवार को मारने और जला देने की धमकियां आ रहीं थीं. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा. 5 बजे फैसला आएगा. आइए जानते हैं कि दोनों पक्षों की ओर से क्या-क्या दलीलें दी गईं.

  1. गोवा सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा, ट्रेड लाइसेंस 2023 में ही एक्सपायर हो चुके थे. उनको रिन्यू नहीं कराया गया. लीज दोनों ने अप्लाई की थी. आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं किया. 6 दिसंबर को थाईलैंड जाने की खबर गलत है. आग की घटना के बाद 7 दिसंबर को सुबह सवा 1 बजे मेक माई ट्रिप से लाखों की टिकट कराकर सुबह इंडिगो फ्लाइट से थाइलैंड गए. थाईलैंड में कोई बिजनेस का काम नहीं था.
  2. वकील ने कहा, इसके अगले दिन पुलिस उनके घर गई तो उनकी मां ने बताया कि दोनों कहां है नहीं पता. यही बात वकील ने ही कही. घटना के तुरंत बाद गायब हो जाना आचरण क्या बताता है? इसलिए कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किए. 7 दिसंबर को लुक आउट नोटिस जारी हुआ. इंटरपोल ने 9 दिसंबर को ब्लू कार्नर नोटिस जारी किया.
  3. गोवा सरकार के वकील ने बताया कि इंडिगो ने सौरव और गौरव लूथरा की डिटेल्स हमें दी है. आग से क्लब जल रहा था. लोग मर रहे थे और ये थाईलैंड भाग गए. इंडिगो ने सौरव और गौरव लूथरा की डिटेल्स हमें दी है. उनके घर पर जाने पर मां और बहन ने जानकारी होने से मना किया. नंबर भी स्वीच ऑफ था, जिसके बाद कोर्ट ने वारंट जारी किया।.
  4. फायर डिपार्टमेंट ने बताया कि बार के लिए NOC नहीं ली गई थी. बार में आने और जाने का एक ही रास्ता था. कोर्ट के सामने गलत जानकारी रखी गई. ये जांच से भाग रहे हैं. 25 लोगों की जान गई है. आरोपियों की मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी सही जानकारी नहीं दी गई. आप अचानक विदेश यात्रा पर तो जा सकते हैं लेकिन जांच में सहयोग के लिए नहीं आ सकते. कोसमोटोलोजिक क्लिनिक से पर्चा बनवाया गया.
  5. वकील ने कहा, अगर ये 6 दिसंबर को थाईलैंड गए होते और बाद में घटना घटती तो ये निर्दोष हो सकते थे. मेडिकल हिस्ट्री बोगस है. आपको जांच के लिए सामने आना चाहिए था. पीड़ित लोगों की मदद करनी चाहिए थी लेकिन आप बचकर भागते रहे. कानून केवल कानून को मानने वालों की मदद करता है. जब एक बार कोर्ट से नोटिस जारी हो गया तो जांच के लिए सामने आना चाहिए था. ना कि रुकावट पैदा करनी चाहिए थी और फिर आपको ट्रांजिट एंट्रिम बेल चाहिए?
  6. उन्होंने कहा, वहां मासूम लोगों को फंसाया गया. फायर विभाग की NOC नहीं थी. वहां फायर शो किया गया. याचिकाकर्ता याचिका दायर करते वक्त विदेश में था. जानबूझकर यहां से कानून बचने के लिए भागकर विदेश गया तो इस कोर्ट को अग्रिम जमानत नहीं देनी चाहिए. कोर्ट से झूठ बोला गया.
  7. इसके बाद लूथरा ब्रदर्स के वकील तनवीर मीर ने आरोपियों के पक्ष में कुछ पुराने फैसलों का जिक्र कर दलीलें दीं. वकील तनवीर मीर ने कहा कि घटना दुखद है लेकिन घटना के बाद हर तरफ से मेरे मुवक्किल और उसके परिवार को मारने और जला देने की धमकियां आ रहीं थीं. घटना के बाद पूरी गोवा स्टेट मशीनरी रिवेंज लेने में लग गई. मेरे (लूथरा) दो रेस्टोरेंट/क्लब पर बुलडोजर चला दिया. मैं भी इंसान हूं. प्रॉपर्टी सील कर दी गई. ऐसी स्थिति में इंसान का दिमाग कैसे काम करेगा? अपनी जान की रक्षा के लिए कहां जाएगा.
  8. कोर्ट ने कभी नहीं कहा कि वो फरार हैं. अगर फरार होते तो यहां कोर्ट में ना आते. अगर रात में ही प्रोटेक्शन दे दी जाती तो सुबह की पहली किरण के साथ भारत में होते. इन्होंने (सरकार) कहा कि घर गए, घरवालों ने सहयोग नहीं किया. एक दिन में ही नोटिस इशू हो गया. पहली बार में ही गैर जमानती वारंट जारी हो गया. ऐसा कहां होता है?
  9. उन्होंने कहा, घर, ईमेल या मोबाइल कहीं भी नोटिस नहीं दिया गया. रिवेंज या सजा देने के लिए गिरफ्तारी नहीं की जा सकती. घटना के वक्त दोनों याचिकाकर्ता वहां मौजूद नहीं थे. मैं लाइसेंसी हूं तो साइन मैं ही करूंगा. अपने मैनेजर से नहीं कह सकते. डेली ऑपरेशन लोकल मैनेजमेंट देखता था. पूरे देश में मेरे 14 से ज्यादा रेस्टोरेंट हैं. वहां क्या पकेगा इसका फैसला दिल्ली से नहीं लिया जाता. ऑपरेशन मैनेजर तय करते हैं. मैं गोवा सिर्फ 2 बार गया.
  10. उन्होंने कहा, गोवा पुलिस ने कहा कि फुकेट में मेरा कोई बिजनेस नहीं है. ये गलत है, वहां बिजनेस है. 6 दिसंबर को ट्रेवल एजेंट को फोन किया था कि ज़रूरी बिजनेस मीटिंग हैं, टिकट बुक करिए और दुर्भाग्यवश उसी रात घटना घट गई. मैं भाग नहीं रहा हूं यहां आकर जांच का सामना करना चाहता हूं लेकिन आप थाईलैंड में मेरी लिंचिंग करना चहाते हैं. बुलडोजर चला दिया. राज्य सरकार बदले की भावना से काम कर रही है. मुझे राहत केवल वापस आने तक के लिए चाहिए. आगे गोवा की कोर्ट में जा सकते हैं.
  11. वकील तनवीर ने कोर्ट को बताया कि आज चाहे कोर्ट का जो भी फैसला हो, मेरे क्लाइंट भारत वापस आ जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी कहता है कि ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल जा सकती है. बॉम्बे हाईकोर्ट भी जा सकते हैं. आज मुझे पुलिस से अपने लिए प्रोटेक्शन चाहिए. पहले से कोई क्रिमिनल रिकोर्ड नहीं है. हम टैक्स पेयर हैं. अगर पुलिस गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन लेकर जाएं और वहां पर सैकड़ों की भीड़ आकर जला दें या मार ले तो किससे सवाल करेंगे?
  12. उन्होंने कहा कि ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल की मियाद खत्म होते ही वो पुलिस के सामने सरेंडर कर देंगे. अगर आज कस्टडी में ले लिया जाए और कुछ हो जाए तो? वर्चुअली 90% जांच पूरी हो चुकी है. अभी तक गोवा पुलिस ने ये नहीं बताया है कि मेरी कस्टडी क्यों चाहिए? मुझसे क्या बरामद करना है? बस घटना घटी और गिरफ्तार करना है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रोहिणी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा. अब 5 बजे फैसला आएगा.

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