Nation- Himachal Pradesh flood: बाढ़-भूस्खलन से 3,560 करोड़ ‘स्वाहा’, अब पूरा हिमाचल आपदाग्रस्त घोषित, इससे राज्य को कितनी मदद मिलेगी?- #NA

हिमाचल में बाढ़-भूस्खलन से तबाही
हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. राज्य में 1,281 सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें चार राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं. इस तबाही से प्रदेश में 3,560 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. वहीं, राज्य सरकार ने अब पूरे हिमाचल को आपदाग्रस्त घोषित कर दिया है. शिमला मौसम विज्ञान केंद्र ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 76 वर्षों में सबसे ज़्यादा बारिश वाला अगस्त महीना रहा. इस महीने 431.3 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो 1949 के बाद से सबसे ज़्यादा है.
हिमाचल को आपदाग्रस्त घोषित करने के बाद राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के मुख्य सचिव और सीईओ प्रबोध सक्सेना ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. आपदा ग्रस्त राज्य घोषित होने के बाद सरकार अब राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटा सकेगी. विधायक निधि और कई सरकारी योजनाओं के बजट में कटौती कर प्रभावित क्षेत्रों की मदद की जाएगी. इसके साथ ही, राज्य सरकार नया सेस भी लगा सकती है, जैसा कि कोरोना काल में कोविड सेस लगाया गया था.
केंद्र से मिलेगी अतिरिक्त सहायता
इस घोषणा के बाद हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से भी अतिरिक्त मदद मिल सकेगी. डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने के बाद जिला स्तर के अधिकारी—जैसे डीसी, एडीएम और एसडीएम—सीधे राहत एवं पुनर्वास से जुड़े फैसले ले पाएंगे. इससे उन्हें हर बार सरकार या उच्च अधिकारियों से अनुमति लेने की बाध्यता नहीं होगी.
राज्य सरकार के अधिकार
- विधायक निधि और योजनाओं के बजट से धनराशि को राहत कार्यों में लगाया जा सकेगा.
- अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए नया सेस लगाया जा सकेगा.
- केंद्र से विशेष मदद और फंड प्राप्त होंगे.
- जिला स्तर के अधिकारियों को तुरंत निर्णय लेने की शक्ति मिलेगी.
- इस फैसले से प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों को गति देने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है.
भूस्खलन और बारिश के चलते राज्य में 1,281 सड़कें बंद हो गई हैं, जिनमें चार राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं. अकेले शिमला जिले में 267 सड़कें बंद हैं, जबकि मंडी में 257, चंबा में 239, कुल्लू में 168 और सिरमौर में 126 सड़कें प्रभावित हुई हैं. शिमला-कालका रेलवे मार्ग पर भी मलबा आने से छह ट्रेनों को रद्द करना पड़ा.
पिछले 24 घंटे में राज्य के अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की मौत हुई है. शिमला जिले के जुंगा क्षेत्र में एक मकान पर मलबा गिरने से 35 वर्षीय व्यक्ति और उसकी 10 वर्षीय बेटी की मौत हो गई. कोटखाई के चोल गांव में एक महिला मकान ढहने से मलबे में दब गई. वहीं, जुब्बल के बधाल गांव में भूस्खलन से 23 वर्षीय युवती की जान गई. सिरमौर जिले के चौरास इलाके में एक मकान ढहने से 37 वर्षीय महिला और उसके आठ मवेशी दबकर मर गए.
मणिमहेश यात्रा प्रभावित
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में जानकारी दी कि भारी बारिश और भूस्खलन के चलते मणिमहेश यात्रा के दौरान मरने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर 16 हो गई है. हडसर और मणिमहेश झील के बीच कुगती क्षेत्र से चार शव और बरामद हुए हैं. यात्रा मार्ग पर फंसे करीब 15,000 तीर्थयात्रियों में से 10,000 को सुरक्षित निकाल लिया गया है. बाकी के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है.
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि अब तक बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से करीब 3,560 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सबसे ज्यादा क्षति सड़कों, पुलों और बिजली व पानी की आपूर्ति प्रणालियों को पहुंची है. प्रदेश में 3,207 ट्रांसफॉर्मर और 790 जलापूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं.
राज्य सरकार ने हिमाचल को आपदाग्रस्त घोषित कर दिया है. भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से लाहौल-स्पीति के कई इलाकों में राशन और दवाइयां पहुंचाई गई हैं. अब तक पांच मरीजों को एयरलिफ्ट किया जा चुका है. प्रभावित लोगों को भोजन, कंबल और स्लीपिंग बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं. मौसम विभाग ने अलग-अलग जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है और अगले 24 घंटे तक अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों और भूस्खलन संभावित इलाकों से दूर रहें.
Himachal Pradesh flood: बाढ़-भूस्खलन से 3,560 करोड़ ‘स्वाहा’, अब पूरा हिमाचल आपदाग्रस्त घोषित, इससे राज्य को कितनी मदद मिलेगी?
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