Nation- पाकिस्तान की नहर ने खेतों को कैसे बना दिया दलदल? सड़ रहीं फसलें; श्रीगंगानगर के किसानों का दर्द- #NA

राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा है. यहां भूजल स्तर में खतरनाक बढ़ोतरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिले के श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र के सीमावर्ती गांवों में वाटर लेवल (जमीन के नीचे पानी) अब मात्र 1 से 2 फीट रह गया है. इससे खेत दलदल में बदल गए हैं और किसानों की प्रमुख फसलें बर्बाद हो रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का सबसे बड़ा कारण पाकिस्तान की ओर से आने वाला पानी है. पाकिस्तान के सादकी नहर से लगातार रिसाव हो रहा है, और उसका क्षारीय और फ्लोराइड युक्त पानी भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहा है.

नहर से पानी का रिसाव करीब 12,000 बीघा उपजाऊ जमीन को दलदल में बदल चुका है. नरमा, कपास, मूंग और ग्वार जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं. श्रीगंगानगर जिले के भूजल सर्वेक्षण विभाग के अनुसार, पाकिस्तान की लगभग 150 किलोमीटर लंबी कच्ची सादकी नहर ऊंचाई वाले इलाके में बहती है. इसका पानी धीरे-धीरे रिसकर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जिससे खेत दलदल में बदल रहे हैं और फसलों में जड़ गलन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं.

फसलें जड़ से सड़ गई हैं

श्रीकरणपुर के सीमावर्ती गांवों जैसे 14 एस माझीवाला, नग्गी, 2 एक्स और 14 एफ में स्थिति बेहद गंभीर है. यहां खेतों में सिर्फ 2 फीट खोदने पर ही पानी निकल आता है. 14 एस माझीवाला के किसान जसविंदर सिंह ने बताया कि डेढ़ फीट नीचे ही पानी निकल आता है, जिसके कारण नरमा और मूंग की फसलें जड़ से सड़ गई हैं. उन्होंने कहा कि बैंक का कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है और नई फसल की बुवाई करना असंभव हो गया है.

किसान गुरदीप सिंह, जिनकी 65 बीघा जमीन बॉर्डर पर है, कहते हैं कि सेम ने हमारी पूरी मेहनत बर्बाद कर दी. अब ट्रैक्टर खेत में फंस जाता है और सरसों की बिजाई भी नहीं कर पा रहे. रणजीत सिंह का कहना है कि 20 बीघा में नरमा की पैदावार जहां 5 क्विंटल होती थी, अब मुश्किल से 1 क्विंटल बची है, जबकि मूंग और ग्वार की स्थिति और भी खराब है.

इंद्रदीप सिंह ने बताया कि खेतों की मिट्टी अब क्षारीय और लवणीय हो चुकी है. सादकी नहर का पानी साल्ट और फ्लोराइड से भरा हुआ है, जो मिट्टी की उर्वरक क्षमता खत्म कर रहा है और खेतों के उपकरणों में जंग लगा रहा है. उनका कहना है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो सीमावर्ती गांवों से पलायन शुरू हो जाएगा.

मकानों में पड़ीं दरारें

14 एफ गांव में हालात और भी गंभीर हैं. वहां मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं. ग्रामीण बलजीत कौर बताती हैं कि पाकिस्तान से आया पानी घरों में घुस गया, रास्ते बंद हो गए. मिट्टी डालकर रास्ता बनाया, लेकिन पानी अब भी खड़ा है. मच्छर और बदबू के कारण रहना दूभर हो गया है.

जिला भूजल स्तर के अनुसार, अनूपगढ़ में जलस्तर 13.02 मीटर, श्रीगंगानगर में 5.61, घड़साना में 18.27, श्रीकरणपुर में 5.13, पदमपुर में 11.28, रायसिंहनगर में 8.24, सादुलशहर में 16.34, सूरतगढ़ में 22.15 और श्रीविजयनगर में 6.66 मीटर है. औसत जलस्तर मात्र 11.85 मीटर रह गया है. यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सीमावर्ती गांवों में पानी का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है.

किसानों का कहना है कि सरकार को इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए. सादकी नहर के रिसाव को रोकने के लिए भारत-पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद जरूरी है. इसके अलावा सीमावर्ती इलाके में ड्रेनेज सिस्टम मजबूत करने और खेतों के लिए सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता है.

रिपोर्ट- शंकर बंसारी, श्रीगंगानगर, राजस्थान

पाकिस्तान की नहर ने खेतों को कैसे बना दिया दलदल? सड़ रहीं फसलें; श्रीगंगानगर के किसानों का दर्द

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