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I-PAC छापेमारी मामला: ED जांच में दखल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता सरकार से जवाब-तलब

ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कथित हस्तक्षेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य के खिलाफ दाखिल दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इसे गंभीर संवैधानिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया.

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि ईडी साल 2020 से करीब 2742.32 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच कर रही है. जांच के दौरान यह जानकारी मिली कि लगभग 20 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए रकम कोलकाता से गोवा तक पहुंचाई गई और बाद में उसे I-PAC के ऑपरेशनल ढांचे में खपाया गया.

प्रतीक जैन के आवास पर सर्च ऑपरेशन

ईडी के मुताबिक, 8 जनवरी 2026 को I-PAC से जुड़े प्रतीक जैन के आवास पर सर्च ऑपरेशन चल रहा था, तभी कोलकाता के पुलिस कमिश्नर और डीसीपी मौके पर पहुंचे. आरोप है कि इसके बाद खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी वहां पहुंच गईं, जबकि ईडी अधिकारियों ने जांच में हस्तक्षेप न करने का अनुरोध किया था.

कोर्ट में क्या बोले सॉलिसिटर जनरल?

ईडी अधिकारियों से जांच से जुड़े दस्तावेज और सामग्री जबरन ले ली गई और बाद में पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अफसरों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज कर दी. उनका कहना था कि यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी सीबीआई जांच के दौरान ऐसा ही हस्तक्षेप हुआ था, जिससे एक पैटर्न साफ दिखाई देता है.

कलकत्ता हाईकोर्ट में भारी हंगामा

कोर्ट के सामने यह भी रखा गया कि जब ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया, तो सुनवाई के दिन कोर्ट में भारी हंगामा हुआ. हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज है कि कोर्ट रूम का माहौल इतना खराब हो गया कि सुनवाई संभव नहीं हो सकी और मामला स्थगित करना पड़ा. ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोपों को सिरे से खारिज किया.

चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हस्तक्षेप

उन्होंने कहा कि ईडी चुनाव से ठीक पहले जांच के बहाने राजनीतिक हस्तक्षेप कर रही है. उनका तर्क था कि मुख्यमंत्री वहां टीएमसी की अध्यक्ष के तौर पर गई थीं, क्योंकि सूचना मिली थी कि कुछ लोग बिना अनुमति पार्टी से जुड़े व्यक्ति के परिसर में घुसे हैं. साथ ही यह भी कहा गया कि तलाशी में कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई.

सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी

सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला बेहद गंभीर है और इसमें केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य सरकार के हस्तक्षेप का बड़ा सवाल जुड़ा है. कोर्ट ने कहा कि कानून के राज को बनाए रखने और संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए इस मुद्दे की गहराई से जांच जरूरी है. कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही आदेश दिया गया है कि 8 जनवरी को जिन परिसरों की तलाशी ली गई थी, वहां के CCTV फुटेज और स्टोरेज डिवाइस सुरक्षित रखे जाएं.

3 फरवरी को अगली सुनवाई

इसके अलावा, ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी गई है. मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी. सुप्रीम कोर्ट की इस सख्ती के बाद केंद्र और राज्य के बीच टकराव का यह मामला और ज्यादा अहम हो गया है.

I-PAC छापेमारी मामला: ED जांच में दखल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता सरकार से जवाब-तलब

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