Nation: मेरी नजर से 'प्रधान सेवक' का शानदार सफर #INA

करीब 17 साल पहले नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान साल 2008 में पहली बार लोक सभा टीवी की ओर से गुजरात विधान सभा को कवर किया था. तबके विधान सभा स्पीकर अशोक भट्ट से सालों मेरा संपर्क रहा, उस दरमियान वो नरेंद्र मोदी के विज़न और संवेदनशीलता पर अक्सर चर्चा करते थे. अशोक भट्ट बीजेपी के वही दिग्गज नेता थे, जिनकी सादगी का जिक्र मोदी ने अपने पॉडकास्ट में निखिल कामथ के साथ किया था. इसके बाद 2014 में नरेंद्र मोदी के पहले लोक सभा चुनाव कवरेज के दौरान भुज से लेकर सोमनाथ तक और गाँधी नगर से सूरत तक गुजरात में कई सौ किलोमीटर क्षेत्र को कवर करके मोदी के प्रति गुजरातियों की नब्ज़ टटोलने की कोशिश की. 2015 में गाँधी नगर में प्रधानमंत्री मोदी के बेहद करीब माने जाने वाले ‘प्रवासी भारतीय सम्मलेन’ कवरेज के दौरान मोदी के प्रति प्रवासियों की दीवानगी को देखा.  

 

Anurag Dixit
Anurag Dixit Photograph: (. Nation)

 

न्यूज़ नेशन के इंटरव्यू में मोदी ने समझाया अपना विज़न

बीते साल 2024 के लोक सभा चुनाव में मैंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया. इस दौरान उनके विज़न को करीब से समझने का फिर से मौका मिला. 2024 का लोक सभा चुनाव कई मायनों में दिलचस्प था. करीब 45 साल बाद समूचा विपक्ष सत्ता पर काबिज़ होने के लिए एकजुट था. लेकिन केंद्र की सियासत में मोदी का करिश्मा तीसरी बार भी कायम रहा. शायद इसके पीछे की बड़ी वजह नरेंद्र मोदी का लम्बा राजनीतिक अनुभव है. भारतीय राजनीतिक इतिहास में नरेंद्र मोदी एकमात्र राजनेता हैं, जिन्हें केंद्र और राज्य की जिम्मेदारी सँभालने का इतना लम्बा अनुभव हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूज़ नेशन के उस इंटरव्यू में उनसे ढेरों सवाल किये.  सवाल ‘अबकी बार 400 पार’ के नारे से लेकर उनके एजेंडे पर और जन मन को समझने की उनकी काबिलियत पर भी था. तब मोदी ने तत्कालीन भारत-पाक संबंध ही नहीं दोनों मुल्कों के अतीत पर भी खुलकर अपना पक्ष रखा था. ये भी कि कैसे उनके शासनकाल में रोड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रचर ने देश की दिशा बदली है. और आखिर क्यों एडिबल आयल इम्पोर्ट, सोलर पावर, एथनॉल जैसे मुद्दे उनकी प्राथमिकता में हैं. उन्होंने बताया था कि वो कैसे नेवी शिप पर फॅमिली ट्रिप या संकट के वक़्त 3 हफ्ते तक फॉरेन ट्रिप वाले प्रधानमंत्रियों से अलग हैं. गुजरात स्टेट फ़र्टिलाइज़र कारपोरेशन की मिसाल के साथ मोदी ने बताया कि उनकी लीडरशिप में कैसे गुजरात ही नहीं HAL जैसे देश के PSUs की तस्वीर बदल चुकी है. ये भी कि वो आखिर क्यों वित्तीय अनुशासन, कॉर्पोरेट संस्कृति और राजनीतिक दखल की बजाय मध्यस्थता पर जोर देते हैं. मोदी ने समझाया कि कैसे वो विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला करते हैं.

पिछली सरकारों से कैसे अलग मोदी ?

बीते 20 सालों से पार्लियामेंट, पॉलिटिक्स और पॉलिसीस को कवर करते हुए मोदी के बारे में मुझे एक बात जो समझ में आई वो ये कि वो फैसला लेने से हिचकते नहीं हैं. अपने अजेंडे को लेकर उनका विज़न स्पष्ट है. यही वजह है कि बीते 11 सालों में मुल्क में ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ और ‘ट्रस्ट डेफिसिट’  जैसे शब्द सुनाई नहीं देते. वो जुमले जो UPA -2 में मनमोहन सरकार की साख पर लगातार सवाल खड़ा करते रहे थे.

आज़ादी के 65 सालों में जो जीडीपी 2 ट्रिलियन तक पहुंची थी वो बीते 11 साल में दोगुनी हो गयी. बीते 11 सालों में देश की अर्थव्यवस्था 11वें नंबर से चौथे नंबर पर पहुँच चुकी है. नतीजा, प्रति व्यक्ति आय 2014 के 1560 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2878 अमेरिकी डॉलर हो चुका है. मोदी राज में गरीबों को 4 करोड़ पक्के घर, 11 करोड़ गैस कनेक्शन, 80 करोड़ को मुफ्त राशन उनकी प्राथमिकता को झलकाते हैं. बीते 10-11 सालों में कैपिटल एक्सपेंडिचर में पांच गुना इज़ाफ़ा हो चुका है. मोदी राज से पहले देश में 90 हजार किलोमीटर हाईवे थे वो आंकड़ा आज बढ़कर 1,50,000 किलोमीटर है. करीब 4 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बन चुकी हैं. किसी दौर में विदेशों से अनाज से लेकर हथियार तक के लिए विदेशों पर निर्भर रहने वाला भारत आज रिकॉर्ड अनाज उत्पादक ही नहीं, डिफेन्स एक्सपोर्टर बन चुका है. आज हम  दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल उत्पादक हैं.

बेशक किसी भी मुल्क की विकास यात्रा एक सतत प्रक्रिया है. बीते करीब 11 वर्षों से नरेंद्र मोदी भी राष्ट्र निर्माण की उसी मुहिम में जुटे हुए हैं. भरोसा है विकसित भारत का हम सबका सपना जल्द पूरा होगा. ऐसा भारत जिसकी प्राथमिकता में अंत्योदय होगा.
प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभ कामनाएं.

मेरी नजर से 'प्रधान सेवक' का शानदार सफर




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