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अब पटना दूर नहीं! बिहार के किसी भी कोने से 3.5 घंटे में पहुंचेंगे राजधानी, ये 5 एक्सप्रेस-वे बचाएंगे आपका समय

एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट

बिहार में लंबे और बेझिल सफर की कहानियां केवल किताबों तक सीमित रह जाएगी. ऐसा दावा बिहार सरकार के रोड ट्रांसपोर्ट विभाग और केन्द्र सरकार के नेशनल हाईवे अथॉरिटी का है. कुछ साल पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दावा किया था कि बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पहुंचने में महज 6 घंटे के वक्त लगेगा, लेकिन अब जो नया दावा किया गया है, उसके मुतबिक यह समय घटकर महज आधा से थोड़ा ज्यादा रह जाएगा.

यानी अब 6 घंटे की जगह महज 3.50 घंटे में बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना पहुंचा जा सकेगा. बिहार सरकार और केंद्र सरकार के साझा कोशिशों में बिहार में बड़े रोड प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है. जिस तरह से काम किया जा रहा है, उसमें इस बात का दावा किया जा रहा है कि साल 2027 तक बिहार में सड़कों का जाल काफी बड़ा हो जाएगा. जिसका सीधा फायदा केवल बिहार नहीं बल्कि आस पास के राज्यों को भी मिलेगा.

ग्रीन हाईवे कॉरिडोर

बिहार सरकार का दावा है कि राज्य और केंद्र सरकार के प्रयास से 1,18,849.40 करोड़ रुपए सड़कों के विकास के लिए आवंटित किया गया है. वैसे इस दावे में केवल बिहार ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड के कुछ हिस्से भी इससे लाभान्वित होंगे. दावा यह किया जा रहा है कि इससे बिहार में आवागमन में काफी तेजी आएगी. पटना से पूर्णिया के बीच ग्रीन हाईवे कॉरिडोर बन रहा है. इसके लिए 28415 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है.

हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेस-वे

पूरे 245 किलोमीटर के इस कॉरिडोर के बन जाने से पटना से पूर्णिया के बीच महज 3 घंटे में पहुंचा जा सकेगा. मौजूदा समय में कम से कम 6 घंटे का समय लगता है. हल्दिया-रक्सौल एक्सप्रेस-वे 407 किलोमीटर आगामी एक्सेस नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है. यह बिहार के रक्सौल जिले को पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जोड़ेगा. यह एक्सप्रेस-वे भारत के बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा.

यह परियोजना भारतमाला परियोजना का एक हिस्सा है। इसमें 26704 करोड़ खर्च अनुमानित है. वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस-वे कुल चार राज्यों, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरता है. यह पूरा एक्सप्रेस-वे एक ग्रीनफील्ड परियोजना है. इस परियोजना की लंबाई लगभग 610 किलोमीटर होगी, जिसमें वाराणसी कोलकाता के बीच बिहार की हिस्सेदारी 177.3 किलोमीटर की है. इसमें 11206.4 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है.

तीन राज्यों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर

यह एक्सप्रेस-वे छह लेन का होगा, जिसका और विस्तार किया जा सकता है. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे भारतमाला परियोजना के तहत एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है, जो उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी को जोड़ेगा. यह तीन राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, और पश्चिम बंगाल) के बीच कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा. बिहार में गोरखपुर सिलीगुड़ी के 417 किलोमीटर पर 29724 करोड़ खर्च का अनुमान है।

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे सिक्स लेन का होगा. 380 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट पर 22800 करोड़ रुपए खर्च होंगे. इस प्रोजेक्ट का भी साल 2027 तक बनने का दावा किया जा रहा है.

अब पटना दूर नहीं! बिहार के किसी भी कोने से 3.5 घंटे में पहुंचेंगे राजधानी, ये 5 एक्सप्रेस-वे बचाएंगे आपका समय

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