Nation- Kanpur Dussehra: कानपुर के इस गांव में रावण की पूजा, दिवाली के 10 दिन बाद होता दहन; जानें इसके पीछे की वजह- #NA

आज दशहरा का त्योहार पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. ये त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. रावण के पुतले का दहन कर लोगों ने एक-दूसरे को दशहरा की बधाई दी. हालांकि आज भी कई ऐसी जगह हैं, जहां रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता, बल्कि रावण की पूजा होती है. वहीं कानपुर शहर से महज 30 किमी कि दूरी पर स्थित अमोर गांव में रावण का मंदिर है. इस मंदिर में रावण की 30 फीट लंबी मूर्ति है.

मंदिर का 200 साल पुराना इतिहास

लोग दशहरे के दिन रावण की इस मूर्ति की पूजा बड़े ही धूमधाम से करते हैं. इस मंदिर का इतिहास 200 साल से भी पुराना है. अमोर गांव के लोग रावण को विद्वान मानते हैं और दिवाली के ठीक 10 दिन बाद गांव में रावण के पुतले का दहन करते हैं.

हमारे देश को यूं ही धार्मिक देश नहीं कहा जाता, जहां गंगा-यमुनी तहजीब के साथ-साथ हर धर्म के लोग रहते हैं और अपने-अपने त्योहर बढ़े ही धूमधाम से मानते हैं. कानपुर शहर एक ऐसा शहर है, यहां का इतिहास अगर देखा जाए तो हर तरफ एक नई और पुरानी कहानियो को जोड़ता है. मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक ने हर एक पन्ने पर कानपुर शहर का नाम इतिहास में जोड़ कर रखा है. यही वजह है कि हर एक त्योहार का अलग ही रंग देखने को मिलता है.

रावण की मूर्ति की पूजा

भले ही आज पूरा शहर ने दशहरे के पर्व को बढ़े धूमधाम से मनाया, रावण के पुतले का दहन किया, लेकिन कानपुर शहर से महज 30 किमी दूर भीतरगांव ब्लॉक के गांव अमोर में आज के दिन रावण के पुतले का दहन नहीं किया गया. गांव के लोग रावण के मंदिर में जाकर रावण की मूर्ति की पूजा की.

दिवाली के बाद रावण के पुतले का दहन

ग्रामीण अखिलेश बताते हैं कि रावण विद्वान था, लेकिन वह क्रूर था, जिस वजह से राम को जन्म लेना पड़ा और रावण का वध किया. यहां दशहरे के दिन रावण को नहीं मारते हैं, बल्कि यहां पर दिवाली के 10 दिन बाद रावण के पुतले का दहन करते हैं और रामलीला का मंचन दिवाली की तिथि के बाद से शुरू होता है.

श्रीरामलीला पंचायती समिति का आयोजन

श्रीरामलीला पंचायती समिति के प्रबंधक गजेंद्र तिवारी ने बताया कि विजयादशमी के दिन देशभर में रावण दहन किया जाता है, लेकिन हमारे अमोर गांव में विजयादशमी के दिन रावण को नहीं मारा जाता. यहां रावण का वध दिवाली के बाद दशमी तिथि को किया जाता है. समिति के प्रबंधक गजेंद्र तिवारी बताते हैं कि यह परंपरा गांव में 226 वर्ष पुरानी है. यहां के लोग रावण को विद्वान मानते हैं. पुरखों की धरोहर रामलीला को आज भी ग्रामीण सहेजे हुए हैं.

Kanpur Dussehra: कानपुर के इस गांव में रावण की पूजा, दिवाली के 10 दिन बाद होता दहन; जानें इसके पीछे की वजह

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