Nation- Kishtwar Cloudburst: श्रद्धालु लंगर भी नहीं खा पाए… अपने साथ बहा ले गया मलबा, अब भूखे पेट काटनी पड़ेगी रात!- #NA

Kishtwar Cloudburst: पहाड़ों पर कुदरत का कहर जारी है… पृथ्वी का स्वर्ग कहा जाने वाला जम्मू कश्मीर भी प्रकृति के कहर से बच नहीं सका. किश्तवाड़ जिले में पाडर इलाके के चशोटी गांव में बादल फटने की घटना से भीषण तबाही हुई. घटना के भयावह मंजर को देख, हर कोई सिहर उठा. इस घटना में अब तक 46 लोगों की मौत हुई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं. यह घटना उस वक्त हुई जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु मचैल माता मंदिर यात्रा के लिए जा रहे थे. हादसा जिस जगह हुआ वह यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है. इसे श्रद्धालु बेस कैंप की तरह इस्तेमाल करते हैं. यहां पंडाल लगाकर लोगों को खाना परोसा जा रहा था लेकिन श्रद्धालुओं को क्या मालूम था कि कुदरत उनके साथ क्या खेल करने वाली है.

श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के बाहर लगाए गए पंडाल भी पहाड़ों से आए सैलाब में बह गए. इतना ही नहीं पूरी सड़क भी समतल हो गई. स्थानीय अधिकारियों और विधायक के मुताबिक, घटना के वक्त वहां हजारों लोग मौजूद थे. जिससे इस घटना में जनहानि ज्यादा हुई है. तेज बारिश की वजह से कई लोग फंसे हुए थे. वहीं ये हादसा उत्तरकाशी के धराली में हुए हादसे की याद को ताजा कर दिया. इस हादसे के बाद लोगों की आंखों के सामने धराली का भयावह मंजर एक फिर से आ गया. किश्तवाड़ आपदा में 220 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है. वहीं आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है.

मलबे में बह गया खाना

किश्तवाड़ जिले के चशोती गांव में बादल फटने (Cloudburst) और पहाड़ों से मलबा आने के बाद श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए भोजन के पंडाल बह गए. पंडाल बहने के साथ ही खाने का सारा सामान भी बह गया. वहीं चशोती गांव और आसपास के इलाकों में फंसे श्रद्धालुओं के सामने खाने का संकट आ गया है. ऐसी स्थिति में उन्हें भूखे पेट ही रात गुजारनी पड़ सकती है. हालांकि स्थानीय प्रशासन की तरफ से घटना में प्रभावित लोगों की हर संभल मदद की जा रही है.

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राहत और बचाव कार्य जारी

घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य तेजी गति से जारी है. जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अधिकारियों को राहत कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया है, जिससे जनहानि को रोका जा सके. वहीं लापता लोगों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. अधिकारियों ने कहा कि प्रभावित लोगों की हर संभल मदद की जा रही है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के अलावा सेना के जवान और पुलिस टीम घटनास्थल पर मौजूद हैं. सभी टीमें साझा अभियान चलाकर बादल फटने की घटना से प्रभावित लोगों की मदद में जुटी हैं.

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गांव का आधे से ज्यादा हिस्सा मलबे में तब्दील

चशोती गांव के पास, जहां आपदा आई, वहां राहत और बचाव कार्य जारी है. अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ों से मलबा आने के बाद बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. बादल फटने की घटना से प्रभावित गांव की आबादी बड़ी है. गांव का आधा हिस्सा पानी और मलबे में तब्दील हो गया है. गांव तक पहुंचने वाले सभी रास्ते या तो टूट गए हैं या फिर मलबे के साथ बह गए हैं.

Kishtwar Cloudburst: श्रद्धालु लंगर भी नहीं खा पाए… अपने साथ बहा ले गया मलबा, अब भूखे पेट काटनी पड़ेगी रात!

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