Nation- लॉटरी पलटेगी मुंबई की सत्ता? ST आरक्षण से बढ़ा सियासी पारा, ठाकरे गुट ने लगाया ये आरोप- #NA

जितेंद्र वलवी और प्रियदर्शिनी ठाकरे.
मुंबई महानगरपालिका के महापौर पद का आरक्षण अनुसूचित जनजाति (ST) प्रवर्ग के लिए निकलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. इसे लेकर मुंबई की राजनीति गरमा गई है. ST प्रवर्ग के सिर्फ दो ही पार्षद हैं और दोनों ही शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट से जुड़े हैं. ठाकरे गुट ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल इन दोनों पार्षदों पर दबाव बनाकर उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं.
महापौर पद के आरक्षण की लॉटरी गुरुवार 22 जनवरी को होगी. अगर ये पद ST के लिए आरक्षित होता है तो संबंधित प्रवर्ग के पार्षदों का महत्व अचानक बढ़ जाएगा. आइए जानते इन दोनों पार्षदों के बारे में.
ST प्रवर्ग से ठाकरे गुट के दो प्रमुख चेहरे हैं, प्रियदर्शिनी ठाकरे और जितेंद्र वलवी. प्रियदर्शिनी वार्ड 121 से और जितेंद्र वार्ड-53 से चुनाव जीते हैं. दोनों के पास वैध जाति प्रमाणपत्र हैं. ऐसे में अगर महापौर पद ST के लिए आरक्षित हुआ तो ये दोनों महापौर पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.
दबाव के आरोप और ठाकरे गुट की रणनीति
ठाकरे गुट के सूत्रों के अनुसार, सत्ताधारी दलों की ओर से इन दोनों पार्षदों पर अलग-अलग माध्यमों से दबाव बनाया जा रहा है. कथित पार्षद तोड़ की आशंका को देखते हुए ठाकरे गुट ने दोनों की सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि बाहरी लोगों से संपर्क सीमित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं.
आरक्षण की पॉलिसी
इस बार महापौर पद के आरक्षण के लिए नई पद्धति अपनाए जाने की संभावना है. अगर पुरानी पद्धति लागू होती तो ST प्रवर्ग के लिए आरक्षण की संभावना अधिक मानी जा रही थी. हालांकि, इस साल नगरसेवक आरक्षण की तरह ही महापौर आरक्षण भी शून्य से तय किया जाएगा, जिसे नई व्यवस्था की शुरुआत माना जा रहा है. जहां आरक्षण किसी भी प्रवर्ग के हिस्से आ सकता है.
अगर आरक्षण ओबीसी महिला, ओबीसी पुरुष या एससी याने शेड्यूल कास्ट के लिए आता है तो महायुति यानी बीजेपी शिंवसेना को कोई दिक्कत नहीं होगी.आरक्षण ओपन यानी सवर्ण क्लास के लिए भी आ जाता है तब भी महायुति की स्थिति मजबूत बनी है लेकिन कहीं आरक्षण एसटी के लिए आता है तब महायुति की मुशिकल बढ़ेगी.
…तो उद्धव गुट को होगा फायदा
इसकी वजह ये है कि उनके पास भले 118 सीटों का बहुमत है लेकिन ना बीजेपी ना ही शिंवसेना शिंदे के पास एसटी वर्ग का कोई नगरसेवक है जो मेयर का पर्चा भर सके. ऐसे में मेयर की लॉटरी का फायदा सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे की पार्टी को हो सकता है. यही कारण है कि उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में जब अपने चुने हुए 65 नगर सेवकों से मुलाकात की तब कहा था- भगवान की इच्छा हुई तो हमारा मेयर बनेगा.
लॉटरी पलटेगी मुंबई की सत्ता? ST आरक्षण से बढ़ा सियासी पारा, ठाकरे गुट ने लगाया ये आरोप
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