Nation- एक झलक पाने को तरस गए मेसी के फैंस… कोलकाता में बवाल की ये है बड़ी वजह- #NA

कोलकाता के साल्टलेक स्टेडियम में प्रसिद्ध फुटबॉलर लियोनल मेसी के कार्यक्रम के दौरान जमकर बवाल मचा. मेसी के कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने जमकर स्टेडियम में तोड़फोड़ की. कुर्सियां फेंकी और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े. बाद में स्टेडियम में बवाल के बाद पुलिस ने मुख्य आयोजत सताद्रू दत्ता को गिरफ्तार कर लिया है.

वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने माफी मांगते हुए पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठन करने का आदेश दिया. खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कार्यक्रम स्थल पर जाने वाली थीं, लेकिन वह बीच रास्ते में लौट गईं.

बॉलीवुड स्टार शाहरुख खान, जिन्हें मेसी के साथ मैदान पर आना था, होटल से लौट गए. इस तरह से मेसी के कार्यक्रम को लेकर कोलकाता में दिनभर हंगामा मचा रहा. आइए जानते हैं कि इस बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम के दौरान यह अव्यवस्था क्यों फैली?

मेसी की नहीं मिली एक झलक

कोलकाता के हाल के इतिहास में ऐसी घटना नहीं घटी है. कोलकाता में डिस्ट्रिक्ट टिकटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बेचे जाने वाले टिकटों की शुरुआती कीमत 4,366 रुपये थी, लेकिन दर्शकों ने ज्यादा पैसे देकर टिकट खरीदे. दर्शकों ने मेसी को देखने के लिए हजारों रुपये में टिकट खरीदे. किसी ने 12,000 रुपये दिए तो किसी ने 16,000 रुपये.

दर्शक मेसी को देखने के लिए देर रात से स्टेडियम पहुंचने लगे थे. सुबह तक पूरा स्टेडियम खचाखच भर गया था, लेकिन उन्हें नामी फुटबॉलर की एक झलक भी नहीं मिली. गुस्से में भीड़ में से कुछ ने कहा, “हमारे साथ बहुत बड़ा करप्शन हुआ है. हमें अपना पैसा वापस चाहिए.

ये भी पढ़ें- 12000 की टिकट, मेसी की झलक तक नहीं कोलकाता में फूटा फैंस का गुस्सा, आयोजक गिरफ्तार

माहौल इतना गरमा गया कि कई दर्शकों ने शारदा स्कैम का जिक्र करते हुए मेसी के टूर के मुख्य ऑर्गनाइजर सताद्रु दत्ता की तुलना शारदाकर्ता सुदीप्त सेन से करना शुरू कर दिया. कुछ ने कहा, “हमें मेसी तो देखने को नहीं मिले, बल्कि कुछ क्रिमिनल्स देखने को मिले!”

देर रात से लगी थी भीड़

मेसी शुक्रवार रात कोलकाता पहुंचे. उनके साथ उनके करीबी दोस्त और वर्ल्ड फुटबॉल के दो और स्टार लुइस सुआरेज और रोड्रिगो डी पॉल भी थे. सुबह 2:30 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पर मेसी का प्लेन लैंड होने के बाद, फैंस की भीड़ देखने लायक था. यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था कि यह फैंस की ऐसी दीवानगी ऐसे विस्फोट में बदल जाएगा.

मेसी को न देखकर दर्शकों ने गुस्से में स्टेडियम की कुर्सियां ​​तोड़ दीं. उन्होंने मैदान पर टूटी कुर्सियां ​​और बोतलें फेंकीं. हजारों दर्शक पुलिस बैरिकेड्स और फेंसिंग तोड़कर मैदान में घुस गए. मैदान में आग लगाने की भी कोशिश हुई! फुटबॉल के प्रिंस को विरोध प्रदर्शनों की परेशानी से शहर छोड़ना पड़ा.

हजारों रुपये में खरीदे थे टिकट

मेसी के साल्टलेक स्टेडियम दौरे के आस-पास एक इवेंट ऑर्गनाइज किया गया था, जहां सबसे सस्ता टिकट 4,000 रुपए से ज्यादा का था. फैंस ने टिकट का दाम देने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई, क्योंकि वे वर्ल्ड विनिंग फुटबॉलर को आमने-सामने देखना चाहते थे. किसी ने 10,000 रुपए में टिकट खरीदा, किसी ने 15,000 रुपए में, तो किसी ने 30,000 रुपए में उन्होंने कई सालों की बचत खर्च कर दी! लेकिन उन्हें गैलरी से मेसी की एक झलक भी देखने को नहीं मिली.

जब तक मेसी मैदान पर थे, उन्हें घेरकर रखा गया. उन्हें कुछ पॉलिटिकल लीडर, मिनिस्टर, जर्नलिस्ट और सिक्योरिटी गार्ड ने घेर लिया था. स्पोर्ट्स मिनिस्टर अरुप बिस्वास, मोहन बागान के बॉस श्रींजॉय बसु थे. उन्होंने मेसी को देखा. उन्होंने उनका ऑटोग्राफ लिया. उन्होंने उनके साथ फोटो भी खिंचवाईं.

नेता और आयोजकों से घिरे रहे मेसी

सुभाश्री गंगोपाध्याय को ‘टॉलीवुड रिप्रेजेंटेटिव’ के तौर पर मेसी से मिलने का मौका मिला. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर मेसी और डी’पॉल के साथ तस्वीरें पोस्ट कीं. साल्टलेक के बाहर दर्शकों ने आवाज उठाई, “जिन्हें फुटबॉल का ‘F’ भी नहीं पता, वे मेसी के साथ रहे. हमें पैसे देने के बाद भी कुछ नहीं मिला.”

मेसी कुल 16 से 18 मिनट ही साल्टलेक में रुक पाए. कुछ देर मैदान में घूमने के बाद उन्हें जाना पड़ा. कई लोगों का दावा है कि दर्शकों का गुस्सा और नाराजगी भांपकर मेसी को जल्दी से मैदान से हटा दिया गया. तय शेड्यूल में कहा गया था कि मेसी कुछ और समय स्टेडियम में रुकेंगे. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शाहरुख खान और सौरव गांगुली को उनके साथ एक ही स्टेज पर होना था. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दोपहर 12 बजे तक युवा भारती पहुंचना था. हालात को देखते हुए ममता बनर्जी आधे रास्ते से ही वापस लौट गईं.

दर्शकों ने शुरू किया हंगामा

जैसे ही मेसी मैदान से गए, दर्शकों ने स्टेडियम में हंगामा करना शुरू कर दिया. मेसी को कोलकाता और भारत लाने में सताद्रु दत्ता का बड़ा रोल था. दर्शकों ने उन पर अपना गुस्सा निकाला. उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता था, “सताद्रु को पैसे वापस करने होंगे. उन्हें लाइव आकर माफी मांगनी होगी.” स्पोर्ट्स मिनिस्टर अरुप भी गुस्से का निशाना बने. वह मैदान पर लगभग 15 मिनट तक मेसी के साथ ही रहे. उन्हें एक पल के लिए भी मेसी से अलग होते नहीं देखा गया.

ये भी पढ़ें- कोलकाता में मेसी पर बवाल के बाद पुलिस का एक्शन, मुख्य ऑर्गनाइजर गिरफ्तार, DGP ने क्या-क्या बताया?

मेसी गैलरी से दिखाई नहीं दे रहे थे. उस समय, दर्शकों ने गुस्से में गैलरी से कुर्सियां ​​उखाड़कर मैदान पर फेंकना शुरू कर दिया. कुछ चिल्लाए, क्या अरुप अपने घर कोई पर्सनल गेस्ट लाए हैं? एक समय तो हजारों दर्शक मैदान में घुस आए. भीड़ ने पुलिस का भी पीछा किया. उनके हाथ जो कुछ भी लगा, उन्होंने फेंक दिया. आखिर में, हालात को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को मैदान पर उतारना पड़ा. पुलिस ने लाठीचार्ज किया. सब कुछ ठीक होने में डेढ़ घंटे से ज्यादा लग गया. उसके बाद भी, स्टेडियम के बाहर साल्टलेक की सड़कों पर कभी-कभी हंगामा होता रहा.

मुख्य आयोजक को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दर्शकों के एक हिस्से ने कहा कि अगर मेसी को कम से कम सिक्योरिटी के साथ मैदान में ले जाया जाता, अगर सभी को कम से कम उन्हें खुद देखने दिया जाता, अगर मेसी ने गैलरी की तरफ हाथ हिलाकर कोई मैसेज दिया होता, तो टिकट का दाम वसूल हो जाता, लेकिन इसके बजाय, शनिवार सुबह से उन्हें पुराने फुटबॉल खिलाड़ियों के कल्चरल प्रोग्राम और गेम देखने पड़े.

कई लोग मेसी के बगल में बॉलीवुड किंग शाहरुख खान को देखने के लिए मैदान पर गए थे. वे भी निराश हुए. क्योंकि, शाहरुख होटल में मेसी से मिले थे. वे मैदान पर नहीं दिखे. सौरव गांगुली भी नहीं दिखे. वे थोड़ी देर मैदान पर थे, और फिर चले गए. बाद में पुलिस ने मुख्य आयोजक सताद्रु दत्ता को गिरफ्तार कर लिया है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने माफी मांगते हुए जांच कमेटी गठन करने का ऐलान किया है.

एक झलक पाने को तरस गए मेसी के फैंस… कोलकाता में बवाल की ये है बड़ी वजह

[ad_2]


देश दुनियां की खबरें पाने के लिए ग्रुप से जुड़ें,

[ad_1]

#INA #INA_NEWS #INANEWSAGENCY
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,

Back to top button