Nation- ‘नागराज’ का मेला… किसी ने गर्दन में लपेटा, किसी ने मुंह में दबाया; डंसने के बाद भी नहीं होती मौत!- #NA

'नागराज' का मेला... किसी ने गर्दन में लपेटा, किसी ने मुंह में दबाया; डंसने के बाद भी नहीं होती मौत!

जहरीले सांपों के साथ खतरनाक स्टंट

जहरीले सांप को देखते ही लोगों में कंपकंपी के साथ रोंगटे खड़े होना बेहद आम बात है. आमतौर पर इंसान यही सोचते हैं कि उनका उनका सामना कभी भी जहरीले सांप से न हो. हालांकि, क्या आपको पता हैं कि देश का एक राज्य ऐसा भी है, जहां लोग जहरीले सांप को दूर भगाने की बजाय गले में लपेट कर घूमते हैं. इस दौरान सांप उन्हें बिल्कुल भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. लोग माता को प्रसन्न के लिए सांप के साथ खतरनाक स्टंट करते हैं.

यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि झारंखंड की राजधानी रांची के बुंडू अनुमंडल क्षेत्र की एक परंपरा है, जहां सांपों की देवी कहीं जाने वाली मां मनसा देवी को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु एक अनोखी परंपरा को बीते सैकड़ों सालों से निभा रहे हैं. तीन दिनों तक चलने वाले यह धार्मिक अनुष्ठान आम देवी-देवताओं की पूजा से बेहद अलग और विचित्र है. इस परंपरा के तहत गांव वाले जहरीले सांपों को गले में डालकर घूमते हैं, गांव में सांपों का मेला लगता है.

क्या हैं पौराणिक मान्यताएं?

ग्रामीणों के मुताबिक, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के दौरान खेती-बाड़ी के कार्य सम्पन्न होने के बाद गांव वाले जंगल में जाकर जहरीले सांपों को ढूंढते हैं. इसके बाद वह उन्हें पकडते हैं और फिर लगभग एक महीने तक अपने घरों में रखते हैं. लगातार सांपों की सेवा करते हैं और फिर मनसा पूजा के दौरान इन जहरीले सांपों को हाथों में लेकर अपने शरीर पर छोड़ देते हैं. जहरीले सांपों से खुद को ही कटवाते हैं.

नहीं होता जहर का असर

ऐसी मान्यता है कि सांपों की देवी मां मनसा की शक्तियों के फलस्वरूप जहरीले सांप ग्रामीणों के दोस्त बन जाते हैं. जिसके फलस्वरूप इन जहरीले सांपों के काटने के बाउजूद उनके जहर का थोड़ा भी असर इन श्रद्धालुओं पर नहीं होता है. मनसा पूजा समाप्त होने के बाद ग्रामीणों के द्वारा पकड़े गए जहरीले और विषैले सांपों को दोबार एक बार जंगलों में ले जाकर छोड़ दिया जाता है.

मनसा पूजा के दौरान जहरीले और विषैले सांपों से खुद को कटवाने के साथ ही गांव वाले लोहे के छड़ को भी अपने शरीर मे चुभाते हैं. जिसे देख आम व्यक्ति विचलित हो सकता है, लेकिन श्रद्धालुओं की मान्यता ऐसी है कि नुकीले छड़ के शरीर में आर-पार होने के बावजूद मां मनसा की कृपा से उन्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होता है. ग्रामीणों का कहना है कि मनसा देवी की पूजा करने से सांपदोष दूर होता है. इस पूजा के दौरान जो लोग विधि विधान से पूजा में सम्मिलित होते हैं उनके द्वारा ही सांपों के साथ कर्तव्य दिखाया जाता है. बाकी लोग वहां दर्शक के रूप में उपस्थित होते हैं.

‘नागराज’ का मेला… किसी ने गर्दन में लपेटा, किसी ने मुंह में दबाया; डंसने के बाद भी नहीं होती मौत!

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