Nation- जमुई रेल हादसे में लापरवाही या भूमाफिया का दबाव? आसनसोल DRM के तबादले की वजह क्या है?- #NA

रेलवे ने आसनसोल DRM विनीता श्रीवास्तव को पद से हटा दिया है.
बिहार के जमुई जिले में टेलवा बाजार रेलवे हॉल्ट के पास 27 दिसंबर की देर रात एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी.सीमेंट से भरी इस मालगाड़ी में हादसे के बाद रेलवे ने आसनसोल मंडल रेल प्रबंधक (Divisional Railway Manager) पर एक्शन लेते हुए पद से हटा दिया. इसके साथ ही रेलवे बोर्ड ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश भी दिए हैं. हालांकि, रेलवे से जुड़े कुछ अधिकारी इसे भू-माफियाओं के दबाव में लिया गया एक्शन बता रहे हैं.
रेल मंत्रालय के जारी आदेश में पूर्व रेलवे के आसनसोल डिवीजन की DRM विनीता श्रीवास्तव को पद से हटा दिया गया है. बोर्ड के रविंद्र पांडेय द्वारा दिए गए आदेश में कहा गया है कि विनीता श्रीवास्तव पश्चिमी मध्य रेलवे कैडर में वापस भेजा जा रहा है. उनकी जगह सुधीर कुमार शर्मा को DRM का कार्यभार सौंपा गया है. 2 दिसंबर को जारी आदेश में कहा गया कि तत्काल दोनों अधिकारी इस आदेश पर अमल करें.
जमीन से जुड़ा क्या है मामला?
सूत्रों के मुताबिक आसनसोल की मंडल रेल प्रबंधक (DRM) विनीता श्रीवास्तव की तरफ से अक्टूबर में रेलवे को एक पत्र मिला था, जिसमें उन्होंने आसनसोल मंडल की एक महत्वपूर्ण और रेलवे की कीमती जमीन को RLDA (Rail Land Development Authority) को सौंपने के संबंध में पूर्व रेलवे मुख्यालय (कोलकाता) को पत्र लिखकर जांच कराने का अनुरोध किया था. 16 अक्टूबर 2025 को लिखे पत्र के बाद इस पूरे मामले की विजिलेंस जांच की मांग तेज हो गई थी.
सूत्रों के मुताबिक DRM विनीता श्रीवास्तव ने अपने पत्र में आशंका जताई थी कि आसनसोल मंडल की रेलवे जमीन पर कुछ लोगों की नजर है और इस प्रक्रिया में स्थानीय रियल एस्टेट लॉबी तथा कुछ रेलवे अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है. बताया जा रहा है कि DRM ने पत्र में स्पष्ट किया था कि इस मामले से संबंधित पूरा पत्राचार रिकॉर्ड पेश किया गया है, ताकि जांच एजेंसी को पूरे मामले की कड़ियों को समझने में कठिनाई न हो.
पत्र में विजिलेंस से खास तौर पर जिन बिंदुओं की जांच की मांग की गई है :-
- बिना सक्षम प्राधिकरण के भूमि पट्टे का सौंपा जाना
- भूमि का मूल्यांकन पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना
- रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
- भूमि के विवरण और सीमांकन में मंडलीय प्राधिकरण से परामर्श न लेना
- विरासत (हेरिटेज) संरचनाओं के संरक्षण की अनदेखी
- जांच पूरी होने तक RLDA से जमीन वापस लेने का सुझाव
सूत्रों के मुताबिक DRM विनीता श्रीवास्तव ने इसे केवल जांच तक सीमित नहीं रखा था, बल्कि तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का सुझाव भी दिया था. पत्र में कहा गया था कि जब तक विस्तृत विजिलेंस जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक CE(G) कार्यालय को उक्त भूमि RLDA से ‘डी-एंट्रस्ट’ (वापस लेने) की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए. साथ ही CPM/RLDA को पूर्व रेलवे मुख्यालय से आवश्यक निर्देश देने की बात भी कही गई थी.
विरासत समिति को भी भेजने की सिफारिश
पत्र में यह भी कहा गया है कि मामला केवल जमीन सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हेरिटेज से जुड़े मुद्दे भी जुड़े हैं. DRM ने सुझाव दिया था कि इस केस को पूर्व रेलवे की विरासत समिति के समक्ष भी रखा जाए. पत्र में विशेष रूप से विवेकानंद संस्थान (जो पहले ड्यूरंड इंस्टीट्यूट, आसनसोल के नाम से जाना जाता था) जैसी महत्वपूर्ण विरासत संरचना का उल्लेख किया गया है, जिसे भविष्य के लिए संरक्षित रखना आवश्यक बताया गया है.
रेलवे में रखा अपना पक्ष लेकिन क्या कहते हैं नियम?
उधर, जमुई के टेलवा बाजार में हुए मालगाड़ी हादसे के बाद ट्रैक की मरम्मत और ट्रेन सेवा को दोबारा शुरू करने में कुछ समय लगा. इसी देरी को आधार बनाकर DRM/आसनसोल का तबादला कर दिया गया. DRM/आसनसोल पर आरोप है कि 30 दिसंबर 2025 को रात करीब 8 बजे दिए गए एक हस्तलिखित प्रस्ताव को DRM ने मंजूरी नहीं दी थी. इस प्रस्ताव में दुर्घटना के बाद बहाली कार्य के लिए 2.22 करोड़ रुपये की नकद इम्प्रेस्ट राशि निकालने की अनुमति मांगी गई थी. इसी वजह से देरी हुई. डीआरएम 10 लाख से ज्यादा की नकद राशि निकालने की परमीशन नहीं दे सकता.
रेलवे से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस मामले में रेलवे के नियम कुछ और ही हैं नियमों के अनुसार किसी भी बड़े रेल हादसे के समय ट्रैक और यातायात बहाली पर खर्च करने का पूरा अधिकार वरिष्ठ अधिकारियों को होता है. ऐसे मामलों में न DRM की अनुमति जरूरी होती है और न ही फाइनेंस विभाग की सहमति ली जाती है. इसका मतलब साफ है कि दुर्घटना के समय खर्च के लिए DRM से मंजूरी लेना नियमों के तहत जरूरी नहीं था.
75 घंटे तक मौके पर मौजूद रहीं DRM/आसनसोल
हादसे की जानकारी मिलते ही DRM/आसनसोल 28 दिसंबर 2025 की रात 12 बजकर 14 मिनट पर दुर्घटनास्थल पर पहुंच गई थीं. वे 31 दिसंबर की सुबह लगभग 4 बजे तक लगातार वहीं मौजूद रहीं. करीब 75 घंटे तक उन्होंने खुद मौके पर रहकर बहाली कार्य की निगरानी की और अधिकारियों व कर्मचारियों को जरूरी निर्देश दिए.
ट्रैक बहाली की बात करें तो डाउन मेन लाइन का ट्रैक और बिजली व्यवस्था 30 दिसंबर 2025 को रात 12 बजकर 10 मिनट पर पूरी तरह ठीक घोषित कर दी गई थी. इसके बावजूद करीब 19 घंटे तक सिंगल लाइन पर ट्रेन चलाने की अनुमति नहीं दी गई् यह फैसला वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिया गया था, इसमें DRM की कोई सीधी भूमिका नहीं थी.
कार्रवाई से पहले नहीं सुना गया DRM का पक्ष
नकद इम्प्रेस्ट का प्रस्ताव भी उस समय दिया गया, जब ट्रैक बहाली का अधिकांश काम पूरा हो चुका था. बहाली में जो वास्तविक देरी हुई, उसकी मुख्य वजह रोड क्रेन और उनके भारी काउंटरवेट का समय पर उपलब्ध न होना था. इनकी व्यवस्था पूर्वी रेलवे के निर्माण विभाग को करनी थी. सूत्रों के मुताबिक DRM का तबादला बिना उनका पक्ष सुने और पूरे मामले को ठीक से समझे बिना किया गया है. किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले उसे अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ.
अगस्त 2025 में विनीता श्रीवास्तव ने संभाला था कार्यभार
अगस्त 2025 में DRM पद के लिए पहले जयंत कुमार के नाम का पत्र जारी हुआ था, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था. इसके बाद विनीता श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी दी गई थी. अब महज पांच महीने के भीतर उनके तबादले को रेल दुर्घटना की जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है. रेलवे सूत्रों के अनुसार, हादसे की जांच और सुरक्षा मानकों में ढिलाई को लेकर रेलवे बोर्ड बेहद गंभीर है, और यह प्रशासनिक फेरबदल उसी दिशा में उठाया गया पहला बड़ा कदम है.
27 दिसंबर की रात जमुई में हुआ था रेल हादसा
बिहार के जमुई जिले में 27 दिसंबर की देर रात बड़ा रेल हादसा हुआ था. जसीडीह-झाझा मुख्य रेलखंड पर टेलवा बाजार हॉल्ट के पास बधुआ (बरुआ) नदी के पुल (पुल संख्या 676) पर सीमेंट से लदी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. इसमें 8 से 19 डिब्बे पटरी से उतरे, जिनमें से 3 से 10 डिब्बे पुल से नीचे नदी में गिर गए. कई डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ गए और ट्रैक बिखर गए. इसके बाद ट्रैक सुधार के बाद 30-31 दिसंबर तक यातायात बहाल होने लगा. बताया जाता है कि इस हादसे से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी.
जमुई रेल हादसे में लापरवाही या भूमाफिया का दबाव? आसनसोल DRM के तबादले की वजह क्या है?
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