Nation- नीतीश जी! विपक्ष का डर कैसा लगा? EC पर निशाना, बिहार में गरमाई सियासत- #NA

तेजस्वी यादव. (फाइल फोटो)
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार से पूछा है कि उनको विपक्ष का डर कैसा लगा है? तेजस्वी यादव ने यह सवाल तब किया जब सोमवार को सीएम नीतीश कुमार ने सरकारी नौकरी में डोमिसाइल नीति का ऐलान किया. तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं कि सरकार को विपक्ष की घोषणाओं की कॉपी और नकल कर कैसा लग रहा है.
तेजस्वी का कहना था कि अपार प्रसन्नता का विषय है कि वैचारिक रूप से दिवालिया एनडीए सरकार बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने की हमारी मांग को एकदम सिरे से खारिज करती थी. सदन में किसी भी सूरत में डोमिसाइल नीति लागू नहीं करने का दंभ भरती थी, अब वही लोग हमारी अन्य योजनाओं की तरह इस घोषणा की भी नकल कर रहे हैं.
नकलची एनडीए सरकार की अपनी कोई नीति नहीं
उन्होंने कहा कि स्पष्ट है कि 20 वर्षों की इस नकलची एनडीए सरकार की अपनी कोई नीति, दृष्टि और विजन नहीं है. जिस सरकार को 20 सालों में यह नहीं सूझा कि क्या करना है क्या नहीं करना उसे हमारे इशारों, मांगों और घोषणाओं पर नाचते देख बिहारवासियों को अच्छा लगा रहा है.
सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बिजली की फ्री यूनिट, सरकारी नौकरी, रसोइयों, रात्रि प्रहरियों तथा शारीरिक शिक्षा और स्वास्थ्य अनुदेशकों, आशा एवं ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि, युवा आयोग का गठन अथवा एक करोड़ रोजगार का विषय हो. 20 सालों की इस थकी-हारी कालग्रस्त सरकार ने हमारी हर घोषणा, योजना, दृष्टि एवं मांग की नकल कर चुनावी वर्ष में आनन-फानन में ये घोषणा की है. विपक्ष से इनका ये डर अच्छा है.
विपक्ष की घोषणाओं की कॉपी कर रही सरकार
मुख्यमंत्री बताएं कि सरकार को विपक्ष की घोषणाओं की कॉपी और नकल कर कैसा लग रहा है? बता दें कि पिछले कुछ दिनों में सीएम नीतीश कुमार ने एक के बाद एक कई ताबड़तोड़ घोषणाएं की हैं. जिसके बाद से विपक्ष लगातार यह कह रहा है कि यह सब हमारे दबाव का ही परिणाम है.
तेजस्वी यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज
आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव के पक्ष में दो मतदाता पहचान पत्र जारी करने की जांच की मांग करते हुए पटना के एक थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. एक दिन पहले ही निर्वाचन आयोग ने तेजस्वी यादव से उस मतदाता पहचान पत्र को जांच के लिए सौंपने के लिए कहा था जिसके बारे में उन्होंने (यादव ने) दावा किया था कि यह पहचान पत्र उनके पास है, जबकि इसे आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया था.
EPIC नंबर नहीं बदला गया
निर्वाचन आयोग ने कहा कि विपक्षी नेता का मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर नहीं बदला गया था, जैसा कि उन्होंने आरोप लगाया है. पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक स्थानीय व्यक्ति ने इस संबंध में दीघा थाने में शिकायत दर्ज करायी है. अधिकारी ने कहा कि हमने शिकायत को जिला निर्वाचन कार्यालय को भेज दिया है, जो ऐसे मामलों पर निर्णय लेने के लिए सक्षम अधिकारी है.
यदि चुनाव अधिकारियों से ऐसा कोई निर्देश प्राप्त होता है तो प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता यादव ने हाल में आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदे में उनका ईपीआईसी नंबर ‘बदल’ दिया है.
NDA सरकार के निर्देश पर काम कर रहा निर्वाचन आयोग
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर सोमवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि आयोग केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के निर्देश पर काम कर रहा है और बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिए गरीबों और वंचित वर्गों को मताधिकार से वंचित रखने की कोशिश कर रहा है.
काफी लोगों के नाम जानबूझकर हटाए
कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यालय में संचार प्रभारी और पार्टी सचिव प्रणव झा ने में आरोप लगाया कि यह सच है कि निर्वाचन आयोग ने केंद्र की बीजेपी-नीत एनडीए सरकार के निर्देश पर बिहार में लाखों वास्तविक मतदाताओं, खासकर हाशिए पर पड़े समुदायों के लोगों के नाम जानबूझकर हटा दिए. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने बिहार में मतदाता सूची का मसौदा तैयार करने के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में मानने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के सुझावों की स्पष्ट रूप से अनदेखी की.
निर्वाचन आयोग पर साजिश का आरोप
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता पंजीकरण के लिए आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में मानने के सुप्रीम कोर्ट के सुझावों को नकार दिया. वह मतदाता पंजीकरण के लिए आधार कार्ड को प्रमाण के रूप में स्वीकार न करने का कोई ठोस जवाब या औचित्य भी नहीं दे पाया. उन्होंने कहा कि यह बिहार में सत्तारूढ़ दलों, विशेषकर बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेट) को लाभ पहुंचाने के लिए निर्वाचन आयोग की साजिश है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी.
उन्होंने कहा कि बिहार की जनता राज्य की बीजेपी-जेडीयू गठबंधन सरकार को बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं से उनके संवैधानिक अधिकार छीनने के उनके प्रयास के लिए माफ नहीं करेगी. राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव में एडीए को सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा. कांग्रेस नेता ने कहा कि बिहार की एनडीए सरकार और निर्वाचन आयोग राज्य के लोगों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने के लिए जिम्मेदार हैं.
केंद्र सरकार को किसा पर भरोसा नहीं
झा ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के बावजूद, निर्वाचन आयोग अड़ा हुआ है. ऐसा प्रतीत होता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को न तो न्यायपालिका पर भरोसा है और न ही भारत के प्रधान न्यायाधीश पर. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) और निर्वाचन आयुक्तों का चयन करने वाले तीन-सदस्यीय पैनल से सीजेआई (प्रधान न्यायाधीश) को हटा दिया.
नीतीश जी! विपक्ष का डर कैसा लगा? EC पर निशाना, बिहार में गरमाई सियासत
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