Nation- माफी की जगह भेज दिया नोटिस… यह घमंड की पराकाष्ठा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद पर भड़की कांग्रेस- #NA

माफी की जगह भेज दिया नोटिस... यह घमंड की पराकाष्ठा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद पर भड़की कांग्रेस

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर भड़की कांग्रेस

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. कांग्रेस ने राज्य में सत्तारुढ़ बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि माफी मांगने की जगह प्रदेश सरकार ने नोटिस भेज दिया, जिसमें कहा गया कि हम आपको शंकराचार्य नहीं मानते. यह घमंड की पराकाष्ठा है.

बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस ने आज मंगलवार को सरकार पर जमकर वार किया. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उनकी और उनके सरकार की निंदा की थी. नतीजा ये हुआ कि शंकराचार्य को अब शाही स्नान करने से रोका गया, जिसे लेकर वे पिछले 48 घंटे से बिना अन्न-जल के धरने पर बैठे हैं.

ये हम कहां आ गएः कांग्रेस

कांग्रेस (AICC) मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा, “माफी मांगने की जगह उत्तर प्रदेश सरकार ने उनको एक नोटिस भेज दिया है. नोटिस में यह कहा गया है कि हम आपको शंकराचार्य नहीं मानते. इसे ही घमंड की पराकाष्ठा कहते हैं.” उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी के जो लोग पहले मुसलमानों से कागज दिखाने को कहते थे, अब वही हिंदुओं के संत शिरोमणि को कागज दिखाने कह रहे हैं. अब क्या प्रशासन और उसके लोग तय करेंगे कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य हैं या नहीं? ये हम कहां आ गए हैं?”

पवन खेड़ा ने कहा कि गुरु-शिष्य की एक अखंड परंपरा होती है, उसके तहत ही शंकराचार्य चुने जाते हैं, लेकिन सरकार आधी रात को नोटिस देकर पूछ रही है कि आप शंकराचार्य हैं या नहीं. जब तब प्रधानमंत्री मोदी, अविमुक्तेश्वरानंद के सामने नतमस्तक हुए- तब तक शंकराचार्य थे. जब तक अविमुक्तेश्वरानंद, गौ मांस पर सरकार से सवाल नहीं पूछते थे- तब तक वे शंकराचार्य थे. जब तक वे आधे-अधूरे मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का विरोध नहीं कर रहे थे- तब तक वे शंकराचार्य थे. जब तक वे महाकुंभ की अव्यवस्था पर सवाल नहीं पूछ रहे थे- तब तक वे शंकराचार्य थे.

अपनी फर्जी डिग्री छिपा रहेः कांग्रेस

शंकराचार्य होने के सबूत मांगे जाने की आलोचना करते हुए खेड़ा ने कहा, “लेकिन अब यह शंकराचार्य नहीं रहे, क्योंकि वो राजा के सामने नतमस्तक नहीं हुए, इसलिए अजय सिंह बिष्ट (सीएम योगी आदित्यनाथ) आज इनसे कागज मांग रहे हैं जो 10 साल से अपनी फर्जी डिग्री छिपा रहे हैं, आज वह दूसरे को नोटिस भेज रहे हैं.”

उन्होंने बताया कि 1954 में सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि मठ के संचालन में हस्तक्षेप का किसी को अधिकार नहीं है. ऐसे में अजय सिंह बिष्ट ने जो नोटिस भेजा है, वह कानून का उल्लंघन है. पूरा देश पीएम मोदी और अजय सिंह बिष्ट को देख रहा है, देश इन्हें कभी माफ नहीं करेगा.

मेला प्रशासन ने नोटिस भेज मांगा जवाब

इससे पहले मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी करके पूछा कि वह स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं. प्रयागराज मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष की ओर से कल सोमवार जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन सिविल अपील का भी उल्लेख किया गया है जिसमें कोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता.

नोटिस में यह कहा गया कि स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है, फिर भी प्रयागराज माघ मेला में अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित और प्रदर्शित किया गया है.

माफी की जगह भेज दिया नोटिस… यह घमंड की पराकाष्ठा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवाद पर भड़की कांग्रेस

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