Nation- खराब प्रदर्शन, 75 पार और एंटी इनकंबेंसी… बिहार में BJP ने अपने 9 मौजूदा विधायकों को क्यों नहीं दिया टिकट?- #NA

बिहार में बीजेपी के 9 विधायकों का टिकट काट दिया गया है
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को बीजेपी ने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है. लिस्ट में कुल 71 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान हुआ. लिस्ट में सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि बीजेपी ने अपने 9 सीटिंग विधायकों का टिकट काट दिया है. इनमें सबसे बड़ा नाम नंद किशोर यादव हैं. इन सभी नेताओं की जगह कुछ नए चेहरे और कुछ अन्य नेताओं को मैदान में उतारा है. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बीजेपी ने अपने 9 विधायकों के साथ ऐसा क्यों किया, इसके पीछे क्या वजह है?
मौजूदा 9 विधायकों के टिकट कटने के लोकर कुछ जानकारी सामने आई है. पहले उन विधायकों के बारे में जान लेते हैं जिनका टिकट काटा गया है. इनमें पटना साहिब सीट से नंद किशोर यादव, कुम्हरार से अरुण सिन्हा, आरा से अमरेंद्र प्रताप सिंह, औराई विधायक रामसूरत राय, रीगा एमएलए मोतीलाल साह, राजनगर विधायक रामप्रीत पासवान, मुंगेर से प्रणव यादव, गौरा बौडम से स्वर्णा सिंह और कटोरिया सीट से विधायक निक्की हेंब्रम को पार्टी ने टिकट देने से इनकार कर दिया है.
- मोतीलाल प्रसाद- रीगा सीट
- रामप्रीत पासवान- राजनगर
- प्रणव यादव- मुंगेर
- सर्वणा सिंह- गौरा बौराम
- रामसूरत राय- ओराई
- निकी हेम्ब्रम-कटोरिया
- अरुण सिन्हा-कुम्हरार
- नंद किशोर यादव- पटना साहिब
- अमरेंद्र प्रताप-आरा
टिकट कटने के पीछे कई वजहें
अब हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर इन विधायकों का टिकट क्यों काटा गया और इसके पीछे क्या वजह थी. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ 2-3 विधायकों का टिकट इसलिए काट दिया गया क्योंकि उनकी उम्र 75 साल या फिर उससे ज्यादा हो गई थी. 3-4 विधायक ऐसे भी जिनकी स्थानीय स्तर पर विरोध चल रहा था. ऐसे में पार्टी ने स्थानीय स्तर पर विरोध को दबाने और जनता का विश्वास पाने के लिए टिकट काटा गया है. एक विधायक को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा चल रही है कि नित्यानंद राय की वजह से उनका टिकट कटा है.
- नंदकिशोर यादव: नंदकिशोर यादव बिहार विधानसभा के अध्यक्ष हैं, लेकिन अब पार्टी ने उनका ही टिकट काट दिया है. नंद किशोर यादव 7 बार से विधायक रहे हैं. उनका टिकट काटे जाने के पीछे अभी तक जो वजह सामने आई है वो ये है कि उनकी उम्र 75 साल से ज्यादा हो चुकी है. ऐसे में अब पार्टी ने उन्हें आराम कराने का फैसला किया है. टिकट कटने पर उन्होंने कहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी के निर्णय के साथ हूं। भारतीय जनता पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है. मुझे पार्टी से कोई शिकायत नहीं है. नई पीढ़ी का स्वागत है अभिनंदन है. पार्टी ने अब इनकी जगह रत्नेश कुशवाहा को मैदान में उतारा है.
- मोतीलाल साह: जिन विधायकों के टिकट कटे हैं उनमें मोतीलाल साह भी शामिल हैं. मोतीलाल के नाम की चर्चा ज्यादा हो रही है क्योंकि वो नीतीश सरकार में कला संस्कृति और युवा विभाग के मंत्री हैं, लेकिन अब बीजेपी ने उनका ही टिकट काटते हुए बैद्यनाथ प्रसाद को रीगा से मैदान में उतारा है. मोतीलाल साह का टिकट काटे जाने के पीछे अभी तक कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि इन्हें नीतीश कुमार ने जातीय समीकरण को साधने के लिए इन्हें सरकार में शामिल किया था.
- रामसूरत राय: ओराई सीट से विधायक रामसूरत राय को भी बीजेपी ने दरकिनार करते हुए टिकट नहीं दिया है. माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर विरोध की वजह से पार्टी ने इन्हें टिकट नहीं दिया है, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि नित्यानंद राय के कहने पर पार्टी ने रामसूरत राय को टिकट नहीं दिया है. दो दिन पहले नित्यानंद राय ने रमा निषाद को पार्टी में शामिल कराया था, जिसे अब पार्टी ने टिकट थमा दिया है.
- अरुण सिन्हा: कुम्हरार सीट से मौजूदा विधायक अरुण सिन्हा का भी टिकट काट दिया गया है. इसके पीछे वजह सामने आई है कि उनकी उम्र 75 साल या उससे ऊपर है. ऐसे में वो पार्टी के एजेंडे पर फिट नहीं बैठते हैं. सिन्हा को लेकर यह भी पता चला है कि उनके क्षेत्र में उनके खिलाफ कोई एंटी इनकंबेंसी भी नहीं देखने को मिली है.
- अमरेंद्र प्रताप सिंह: आरा सीट से विधायक अमरेंद्र का स्थानीय स्तर पर विरोध था. इसके साथ-साथ एक दो जगह पर उन्होंने खुद भी यह साफ किया था कि वो इस बार का चुनाव नहीं लड़ेंगे. आरा में अमरेंद्र के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी भी थी. इसलिए पार्टी ने उन पर विश्वास नहीं जताया.
- प्रणव यादव: प्रणव यादव जो कि मुंगेर विधानसभा सीट से मौजूदा बीजेपी विधायक हैं, लेकिन इस बार टिकट नहीं मिला है. टिकट काटे जाने के पीछे वजह ये बताई जा रहा है कि पार्टी ने नए चेहरे को मौका देने के लिए प्रणव यादव को टिकट की रेस से बाहर कर दिया है.
- निकी हेम्ब्रम: कटोरिया सीट से मौजूदा विधायक निक्की हेंब्रम को लेकर चर्चा है कि उनका परफॉर्मेंस सही नहीं था. मतलब पार्टी उनके कामों से खुश नहीं थी इसलिए टिकट काटा दिया गया. इसके अलावा संगठन में कमजोर पकड़ और पारिवारिक विवाद भी कारण बताए जा रहे हैं.
- रामप्रीत पासवान: राजनगर सीट से मौजूदा विधायक रामप्रीत पासवान के साथ भी कुछ वैसा ही हुआ है जैसा निक्की के साथ हुआ है. रामप्रीत को लेकर भी कहा जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें कमजोर परफॉर्मेंस वाला नेता माना है. इसके साथ-साथ उम्र को भी एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है.
- स्वर्णा सिंह: गौरा बौराम सीट से विधायक स्वर्णा सिंह को लेकर अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है कि आखिर पार्टी ने उन्हें टिकट से क्यों दूर रखा है. काफी हद तक माना जा रहा है कि ये भी लो परफॉर्मर रहीं है इसलिए पार्टी ने इन पर विश्वास नहीं जताया है.
टिकट नहीं मिलने के बाद अब ये नेता विधानसभा चुनाव में किस तरह से पेश आते हैं यह भी देखने लायक होगा. पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने का ये विरोध करते हैं या फिर चुपचाप रहेंगे. 9 नेताओं में से करीब 2-3 विधायकों को लेकर कहा जा रहा है कि ये चुनाव में बीजेपी को डेंट देने की भी कोशिश कर सकते हैं.
(इनपुट- सुजीत कुमार)
खराब प्रदर्शन, 75 पार और एंटी इनकंबेंसी… बिहार में BJP ने अपने 9 मौजूदा विधायकों को क्यों नहीं दिया टिकट?
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