Nation- ‘प्राइवेट लिमिटेड’ कल्चर और पंख कतरने की साजिश… अबू आजमी के खिलाफ रईस शेख का अखिलेश को लेटर- #NA

अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
महाराष्ट्र में चुनावी समर के बीच समाजवादी पार्टी में अंदरूनी कलह सामने आई है. सपा विधायक रईस शेख ने राज्य में पार्टी के मुखिया अबू आजमी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आजमी के खिलाफ उन्होंने पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को लेटर लिखा है. इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि अबू आजमी जानबूझकर उन्हें परेशान कर रहे हैं. इसका सीधा असर भिवंडी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पर पड़ रहा है.
रईस शेख ने अपने लेटर में बताया है कि अबू आजमी ने भिवंडी और मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनावों में टिकट बांटने में मनमानी की है. पब्लिक स्पीच में यह कहना शुरू कर दिया है कि उन्हें कोई नहीं रोक सकता. इतना ही नहीं उन्होंने, पंख काटने की साजिश, नेतृत्व के नाम का दुरुपयोग, निरंकुशता और टिकट वितरण में ‘प्राइवेट लिमिटेड’ कल्चर जैसे आरोप लगाए हैं. उन्होंने लेटर में यह भी मांग की गई है कि अबू आजमी से जवाब मांगा जाए. आइए जानते हैं कि रईस शेख ने अपने पत्र में क्या-क्या कहा है.
शेख लिखते हैं, बहुत व्यथित मन और सांगठनिक निष्ठा के अटूट भाव के साथ मैं यह पत्र आपके लिख रहा हूं. मैंने इससे पहले वाले अपने पत्र में बताया था कि साल 2007 से एक अनुशासित सिपाही के रूप में मैंने पार्टी की सेवा की है. 2012 और 2017 में मुंबई महानगरपालिका के नगरसेवक और स्थायी समिति सदस्य के रूप में अपनी भूमिका के निर्वहन से लेकर 2019 और 2024 में भिवंडी (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र से भारी जनसमर्थन के साथ विधायक चुने जाने तक मेरा हर कदम समाजवादी विचारधारा को सशक्त करने हेतु समर्पित रहा है.
पार्टी के भीतर ‘त्रासदी पूर्ण वातावरण’
मेरे कार्यकाल में भिवंडी में 1200 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक विकास कार्यों ने न केवल जनता का विश्वास जीता. 2024 के चुनाव में रिकॉर्ड 1,19,456 मत पाकर पार्टी के ध्वज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. यह इजाफा 2014 के मुकाबले लगभग तीन गुना था. जो इस बात का प्रमाण है कि हमने उत्तर भारतीयों के साथ मराठी, दक्षिण भारतीय, गुजराती और मारवाड़ी समाज के बीच भी समाजवाद की गहरी पैठ बनाई. मगर, बहुत दुख का विषय है कि वर्तमान में भिवंडी महानगरपालिका चुनाव के माहौल में पार्टी के भीतर एक ‘त्रासदी पूर्ण वातावरण’ बना दिया गया है. मैं चाहता हूं कि आप इन मुद्दों पर गौर करें-
- अपनों के खिलाफ षड्यंत्र और चरित्र हनन: मेरे खिलाफ पार्टी के कुछ रसूखदार तत्वों द्वारा सुनियोजित तरीके से दुष्प्रचार किया जा रहा है. सार्वजनिक रूप से मुझ पर ‘भाई-भतीजावाद’ जैसे मिथ्या आरोप लगाकर न केवल मेरा अपमान किया गया, बल्कि मेरे राजनीतिक चरित्र को भी धूमिल करने की कोशिश की गई. आपके निर्देश का सम्मान करते हुए मैंने अपने भाई सलीम शेख की दावेदारी ससम्मान वापस ले ली. इसके बावजूद मेरे खिलाफ जहर बोने का सिलसिला थमा नहीं है.
- टिकट वितरण में ‘प्राइवेट लिमिटेड’ कल्चर: चुनाव में टिकट वितरण की प्रक्रिया किसी लोकतांत्रिक दल जैसी न होकर एक ‘प्राइवेट की कार्यशैली जैसी प्रतीत हो रही है. दशकों से दरी बिछाने वाले निष्ठावान और क्षमतावान कभी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर ऐसे ‘आयातित’ चेहरों को प्राथमिकता दी गई है, जिनका समाजवादी विचारधारा से कोई सरोकार नहीं रहा. इस अवसरवादिता ने भिवंडी की जनता के बीच पार्टी की साख को गंभीर क्षति पहुंचाई है.
- नेतृत्व के नाम का दुरुपयोग और निरंकुशता: महाराष्ट्र प्रदेश नेतृत्व द्वारा सार्वजनिक मंचों से यह उद्घोष करना कि माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने मुझे खुली छूट दी है. मैं जिसे चाहूं टिकट दूं या न दूं, मेरे ऊपर कोई नहीं है. यह न केवल अहंकारी आचरण है बल्कि शीर्ष नेतृत्व की छवि को भी संदिग्ध बनाने का प्रयास है. इस प्रकार की ‘तानाशाही’ से कार्यकर्ताओं में यह संदेश जा रहा है कि पार्टी में अब अनुशासन और योग्यता का कोई स्थान नहीं बचा है.
- सांगठनिक विघटन और चुनावी नुकसान: प्रदेश नेतृत्व के इस आत्मघाती रवैये के कारण भिवंडी के समाजवादीके दर्जनों प्रभावी कार्यकर्ता आज दूसरे दलों का दामन थामने को मजबूर हैं. 2010 और 2014 की चुनावी पराजयों के बाद कार्यकर्ताओं के साथ हमने समाजवादी संगठन को अपने लहू-पसीने से सींचकर खड़ा किया था, वह आज बिखरने की कगार पर है. अगर यही स्थिति रही तो भिवंडी में ‘सपा का मेयर’ बनाने का जो सपना पार्टीने देखा था, वह इस सांगठनिक ‘क्षरण’ की भेंट
चढ़ जाएगा. - इस बार मुंबई में अवसर: महाराष्ट्र में सात साल बाद नगर निगम चुनाव हो रहे हैं. शिवसेना और एनसीपी के बीच विभाजन के बाद, मुंबई में अल्पसंख्यक, दलित और उत्तर भारतीय मतदाता इस बार निर्णायक भूमिका निभाएंगे. मुंबई में एनसीपी ने अधिकतर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. इसे देखते हुए समाजवादी पार्टी के क्षेत्रीय नेतृत्व की मनमानी, नामांकन प्रक्रिया में भ्रम और पार्टी के भीतर अविश्वास और संघर्ष का माहौल खडा करना पार्टी को बड़ा झटका दे सकता है.
- पंख काटने की साजिश: भिवंडी और मुंबई में उम्मीदवारों को मैदान में उतारते समय पार्टीके प्रदेश नेतृत्वने विश्वास में नहीं लिया गया. मेरे साथ जुड़े पार्टी के कार्यकर्ताओंको जानबुझकर उम्मीदवारी से बाहर रखा गया है. इन कार्यकर्ताओं को पार्टी छोड़ना पड़े ऐसा जानबूझकर समय लाया है. इसी वजह से उनमें से कई कार्यकर्ताओं ने अन्य पार्टियों से उम्मीदवारी मांगने के लिए उन्हे बाध्य किया है. हालांकि यह मुझे बदनाम करने का प्रयास था, लेकिन पार्टी को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है.
‘प्राइवेट लिमिटेड’ कल्चर और पंख कतरने की साजिश… अबू आजमी के खिलाफ रईस शेख का अखिलेश को लेटर
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