Nation- ‘पुत्र जीवक’ पौधा, निसंतानों के लिए रामबाण; आयुर्वेद में इसके बारे में क्या-क्या कहा गया है?- #NA

'पुत्र जीवक' पौधा, निसंतानों के लिए रामबाण; आयुर्वेद में इसके बारे में क्या-क्या कहा गया है?

रीवा वन विभाग की उद्यानिकी में लगा है यह ‘पुत्र जीवक’ पौधा.

भारत की धरती पर हजारों ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जो न सिर्फ बीमारियों को मिटाती हैं, बल्कि जीवन को नए अर्थ देती हैं. इन सब में एक पौधा ऐसा भी है, जिसे आयुर्वेद के सबसे पवित्र और चमत्कारी पौधों में गिना जाता है, जिसका नाम है ‘पुत्र जीवक’. यह पौधा मध्य प्रदेश के रीवा जिले के वन विभाग की उद्यानिकी में मौजूद है, जिसे निसंतानों के लिए रामबाण कहा जाता है. इस पौधे का आयुर्वेद में काफी महत्व है, जो और भी कई बीमारियों के लिए कारगर साबित होता है.

शादी के बाद प्रत्येक दंपति का एक ही सपना होता है कि उनके घर संतान का जन्म हो, लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि संतान सुख पाने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में तब भी कुछ लोगों को निराशा हाथ लगती है. आज हम आपको एक ऐसे आयुर्वेदिक औषधीय पौधे के बारे में बताएंगे, जिसको आयुर्वेद में पुत्र जीवक पौधा के नाम से जाना जाता है. संतान प्राप्ति में यह पौधा बेहद असरदार है.

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निसंतान के लिए उम्मीद की नई किरण है यह पौधा

कभी-कभी प्रकृति छोटे-छोटे रूपों में बड़ी शक्तियां छिपा देती है. पुत्र जीवक भी ऐसा ही एक उपहार है, जो जीवन देता है, उम्मीद देता है और हमें प्रकृति के महत्व की याद दिलाता है. यह पौधा जो सदियों से चिकित्सा विज्ञान को हैरान करता आया है. कई परिवारों की उम्मीदें इस पौधे से जुड़ी रहती हैं. कहते हैं- जहां जीवन की राह कठिन हो जाए, ‘पुत्र जीवक’ वहां उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आता है. पुत्र जीवक एक पौधा नहीं बल्कि प्रकृति की अनमोल दास्तान है.

इस पौधे का बीज, पत्ता और फल रामबाण

इसके बीज, पत्ते और फल का उपयोग प्रजनन क्षमता बढ़ाने, हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और गर्भधारण संबंधी समस्याओं को दूर करने लिए किया जाता है. आयुर्वेद में इस पौधे का काफी महत्व है. आयुर्वेद के प्रमुख आचार्यों ने चरक संहिता में इसका विस्तार से वर्णन किया है. चरक संहिता में पुत्र जीवक का उल्लेख ऐसे पौधे के रूप में है, जो दोषों को संतुलित करता है और जीवन शक्ति बढ़ाता है.

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प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा में यह पौधा इतना महत्वपूर्ण था कि राजवैद्य इसे खास उपचारों में प्रयोग करते थे. हालांकि इस पौधे का उपयोग और भी बीमारियों में किया जाता है. स्त्री स्वास्थ्य को मजबूत करना, शरीर में पोषण, मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही सर्दी और खांसी में भी इसका उपयोग किया जाता है.

‘पुत्र जीवक’ पौधा, निसंतानों के लिए रामबाण; आयुर्वेद में इसके बारे में क्या-क्या कहा गया है?

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