Nation- Rahul Gandhi Bihar Yatra: राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ आज जिस गया में, वहां के क्या हैं सियासी समीकरण- #NA

Rahul Gandhi Bihar Yatra: राहुल गांधी की 'वोटर अधिकार यात्रा' आज जिस गया में, वहां के क्या हैं सियासी समीकरण

राहुल गांधी इन दिनों बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाल रहे हैं (X)

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एक और यात्रा निकाली जा रही है. कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कल रविवार से सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की. आज सोमवार को दूसरे दिन यह यात्रा गया में रहेगी. राहुल ने यात्रा के दौरान गया में सूर्य देव मंदिर का दर्शन भी किया. शाम को वह यहां एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे. रात्रि विश्राम भी वह गया में रसलपुर क्रिकेट ग्राउंड पर ही करेंगे.

राहुल गांधी की इस यात्रा में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के कई अन्य नेता भी शामिल हो रहे हैं. यात्रा के जरिए राहुल गांधी की कोशिश अपने खोए हुए जनाधार को फिर से हासिल करने की होगी. कांग्रेस करीब 3 दशकों से अपने दम पर सत्ता में नहीं आ सकी है. आज की तारीख में कांग्रेस जैसी पुरानी राष्ट्रीय पार्टी बिहार में दूसरे दर्जे की पार्टी मानी जाती है. वह बिहार में महागठबंधन का हिस्सा है, और इसकी अगुवाई राष्ट्रीय जनता दल कर रहा है. कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले चुनाव में 243 सीटों वाले बिहार में विधानसभा में उसे 70 सीटों में अपने उम्मीदवार उतारने का मौका मिला जिसमें 19 सीट पर जीत मिली थी. राष्ट्रीय जनता दल ने 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 75 सीटों पर जीत हासिल हुई.

16 दिन, 20 जिले, 13 हजार किलो यात्रा

बिहार में जारी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध और वोटर अधिकार यात्रा के जरिए कांग्रेस वोटर्स के बीच फिर से पुरानी पहचान हासिल कर सकती है. उसे लग रहा है कि बिहार में प्रदर्शन सुधारने का उसके पास यह बेहतरीन मौका है. चुनाव से पहले कांग्रेस वोटर अधिकार यात्रानिकाल रही है. 16 दिन चलने वाली यात्रा के जरिए 20 जिलों तक पहुंच बनानी की कोशिश की जाएगी और इस दौरान कुल 1,300 किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी.

सासाराम के अलावा यह यात्रा औरंगाबाद, गयाजी, नवादा, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, छपरा और आरा जैसे शहरों से होकर गुजरेगी. सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा एक सितंबर को पटना में खत्म होगी. इस दौरान पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में ‘वोटर अधिकार रैली’ का आयोजन किया जाएगा. इस जनसभा में इंडिया गठबंधन के राष्ट्रीय स्तर के कई नेता भी शामिल होंगे.

रूट को लेकर खास तरह की तैयारी

राहुल गांधी ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के रूट को लेकर खासी तैयारी की है. इस यात्रा का शंखनाद उन्होंने सासाराम से किया जिसे दलितों का गढ़ माना जाता है. यह क्षेत्र बाबू जगजीवन राम और उनकी बेटी मीरा कुमार की वजह से खास पहचान भी रखती है. दोनों यहां से कई बार सांसद चुने गए. बाबू जगजीवन राम देश के उपप्रधानमंत्री रहे और एक बार वह प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए थे. उनकी बेटी मीरा कुमार लोकसभा में स्पीकर के पद पर भी काबिज रही थीं.

बिहार में मुस्लिम और दलित कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स के रूप में माने जाते रहे. इस यात्रा के जरिए राहुल और तेजस्वी यादव की कोशिश है कि मुस्लिम और यादव के साथ-साथ दलित वोटों को अपने पाले में लाया जाए. चुनावी साल में राहुल गांधी 6-7 बार बिहार का दौरा कर चुके हैं. बिहार दौरे के दौरान उनका फोकस दलित वोटर्स को साधने पर रहा है.

दशरथ मांझी और राहुल गांधी

जून में जब राहुल गांधी बिहार गए थे तब उन्होंने गया का दौरा किया था. राहुल गया एयरपोर्ट से सीधे ‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के गांव गहलौर गए. गहलौर में वे दशरथ मांझी मेमोरियल गए और फिर उनके बेटे भगीरथ मांझी और उनके परिवार के सदस्यों से मुलाकात की. साथ ही उनके साथ नारियल पानी भी पिया. यही नहीं उन्होंने मांझी परिवार के लिए 4 कमरों वाला एक घर भी बनवाया. इसके लिए उन्होंने तेजी से काम करवाया.

भगीरथ मांझी जो कभी जनता दल यूनाइटेड से जुड़े हुए थे, अब कांग्रेस में आ गए हैं. वह अगला चुनाव लड़ना चाहते हैं. पार्टी भी उन्हें मुकाबले में उतारने की कोशिश में लगी है. भगीरथ ने इस साल जनवरी में दिल्ली की यात्रा की थी और वह राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुए थे.

गया जिले में मामला फिफ्टी-फिफ्टी

‘वोटर अधिकार यात्रा’ को लेकर राहुल गांधी ने जिस गया जिले का चयन किया है, वो महागठबंधन के लिए बेहद खास है. यह दलित बहुल क्षेत्र है. इस जिले में विधानसभा की 10 सीटें आती हैं जिसमें 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए के खाते में 5 सीटें गई थीं तो 5 सीटें महागठबंधन के खाते में आई थीं. हालांकि महागठबंधन के खाते में सभी पांचों सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल को जीत मिली थी. पिछले साल बेलागंज सीट पर हुए उपचुनाव में जेडीयू ने यह सीट अपने नाम कर लिया था.

जबकि एनडीए में शामिल केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने अपने दूसरे चुनाव में 7 सीटों पर किस्मत आजमाई थी, और उसे 4 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. इन 4 में से 3 सीटें उसे गया क्षेत्र से हासिल हुई थीं. एनडीए की ओर से 5 में से 3 सीटों पर हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने जीत हासिल की जबकि शेष 2 सीटें बीजेपी के खाते में चली गई थीं. यहां पर मांझी बिरादरी के अलावा पासवान, धोबी और पासी बिरादरी के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं.

दलितों का साथ पाने की चाह

कांग्रेस अपने कोर वोट बैंक दलितों को फिर से साधने में लगी हुई है. वहीं सटे क्षेत्र औरंगाबाद में महागठबंधन का प्रदर्शन जोरदार रहा था और 2020 के चुनाव में सभी 6 सीटों पर कब्जा जमा लिया था. लेकिन नालंदा और नेवादा में महागठबंधन थोड़ा कमजोर रहा है. नालंदा में 7 में से 6 सीटों पर एनडीए को जीत मिली जबकि एक सीट महागठबंधन के खाते में गई. इसी तरह नेवादा की 5 सीटों में से 4 सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली थी, जबकि एक सीट एनडीए को मिली थी.

1990 के दशक में कांग्रेस का बिहार में वोट प्रतिशत 24.78 फीसदी हुआ करता था लेकिन इसमें लगातार गिरावट आती चली गई. साल 2015 में कांग्रेस का वोट प्रतिशत महज 6.7 था जबकि 2020 में मामूली सुधार के साथ 9.48 फीसदी ही रहा. राहुल ने दलितों को साधने के लिए कई रैलियां और समारोह का आयोजन किया. इसके अलावा उन्होंने दलित नेता राजेश राम को बिहार प्रदेश के अध्यक्ष की कमान सौंप दी. यही नहीं उन्होंने एक अन्य दलित नेता सुशील पासी को पार्टी का सह-प्रभारी बनाकर इस बिरादरी का शुभचिंतक बताने की कोशिश की. राहुल गांधी अब दलित-मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से यह यात्रा निकालकर उनके हितैषी होने का एक और प्रमाण देने की कोशिश कर रहे हैं. देखना होगा कि इन तमाम कोशिशों का बिहार के वोटर्स पर क्या असर पड़ता है?

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