Nation- राहुल-तेजस्वी सड़क पर उतरकर करेंगे चक्का जाम, क्या बिहार में ‘दो लड़कों’ की जोड़ी करेगी कमाल?- #NA

राहुल-तेजस्वी सड़क पर उतरकर करेंगे चक्का जाम, क्या बिहार में 'दो लड़कों' की जोड़ी करेगी कमाल?

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव

बिहार विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान भले ही अभी न हुआ हो, लेकिन चुनाव आयोग के मतदाता सूची पुनरीक्षण के फैसले को लेकर सियासत गरमा गई है. यूपी की तरह बिहार में भी ‘दो लड़कों’ की जोड़ी यानी तेजस्वी यादव और राहुल गांधी उतर रहे हैं. राहुल-तेजस्वी चुनाव आयोग के (एसआईआर) फैसले के खिलाफ बुधवार को पटना की सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे. साथ ही इंडिया गठबंधन के चुनावी अभियान को सियासी धार देते नजर आएंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार में दो लड़कों की जोड़ी सियासी तौर पर कमाल करेगी की नहीं?

बिहार की सत्ता का सियासी वनवास आरजेडी 20 सालों से झेल रही है और नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द पूरी सियासत सिमटी हुई है. तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की सियासी जोड़ी इस बार नीतीश कुमार को हर हाल में सत्ता से बेदखल करने की कोशिश में लगी है. ऐसे में रोजगार से लेकर कानून व्यवस्था के मुद्दे पर नीतीश कुमार को घेरने में विपक्ष जुटा और अब चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण के फैसले को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक पर मोर्चा खोल रखा है.

राहुल-तेजस्वी बिहार की सड़क पर उतरेंगे

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को बिहार बंद का ऐलान किया है, जिसमें इंडिया गठबंधन के सभी नेता शिरकत करेंगे. तेजस्वी यादव ने कहा कि बुधवार को राहुल गांधी और हम, दोनों मिलकर चक्का जाम करेंगे. बिहार में जिस तरह से गरीबों के अधिकार और वोट के अधिकार को छीनने की कोशिश की जा रही है. हम उनके हक के लिए चक्का जाम करेंगे और ट्रेड यूनियनों का भी पूरा साथ देंगे. इस तरह बिहार चुनाव से पहले तेजस्वी और राहुल गांधी की जोड़ी पटना की सड़कों पर उतरकर सियासी हुंकार भरेंगे.

निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ इंडिया गठबंधन में शामिल सभी दलों की ओर से 9 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया है. बिहार बंद में गठबंधन के घटक दलों के सभी दिग्गज नेताओं के शामिल होंगे. विपक्ष द्वारा आयोजित बंद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी बिहार में बंद में शामिल होने के लिए पहुंचेंगे. इस दौरान राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव भी सड़क पर उतरेंगे.

विपक्ष ने गरीब-पिछड़े-दलित का मुद्दा बना दिया

कांग्रेस-आरजेडी ने चुनाव आयोग के फैसले को लेकर पूरी तरह से आक्रामक है और चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठ रहे है. ये लोकतंत्र है, आरजेडी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है. कांग्रेस और आरजेडी साफ कह चुकी हैं कि हम बिहार में वोट का अधिकार किसी को छीनने नहीं देंगे. बिहार में निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, जिसे लेकर बिहार बंद आह्वान किया गया है. हालांकि, 9 जुलाई का भारत बंद पहले से घोषित था, लेकिन अब इसमें एक महत्वपूर्ण मुद्दा लोगों को बेदखल करने का भी जुड़ गया है.

आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है. गरीब, पिछड़े, दलित और मुसलमानों के वोटिंग के अधिकार से वंचित करने की साजिश हो रही है. निर्वाचन आयोग ने खुद कहा है कि बिहार के 20 फीसदी लोग बाहर रहते हैं, जिससे शक के घेरे में ला दिया. बिहार बंद में महागठबंधन के 6 दल राजद, कांग्रेस सीपीआई, सीपीएम, सीपीआईएमएल और VIP के अलावे पप्पू यादव, एआईएमआईएम का भी समर्थन प्राप्त है.

दरअसल, भारतीय चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का आदेश दिया है, जो 25 जून से 25 जुलाई 2025 तक चलना है. इस प्रक्रिया के तहत बिहार के करीब 8 करोड़ मतदाताओं को अपनी नागरिकता और पात्रता साबित करने के लिए पेपर यानी दस्तावेज जमा करने होंगे. जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिक का प्रमाण पत्र, आवास प्रमाण पत्र, या 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई सरकारी दस्तावेज.

बिहार की कानून व्यवस्था पटरी से उतरी

बिहार में बढ़ते आपराधिक मामलों को लेकर पूरे प्रदेश का माहौल गर्मा गया है. राज्य में बिगड़ते लॉ एंड ऑर्डर को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. हाल ही में पटना के मशहूर व्यापारी गोपाल खेमका हत्याकांड ने सबको हिलाकर रख दिया था. पटना में पिछले 4 महीने में 115 हत्या की घटनाएं हुई हैं यानी हर 25 घंटे में एक हत्या की घटना हुई है. इतना ही नहीं लगातार व्यापारियों की हत्या हो रही हैं, जिसके चलते नीतीश कुमार की सरकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं. बिहार में जंगलराज रिटर्न की संज्ञा दी जाने लगी है.

बिहार में बिगड़ते लॉ एंड ऑर्डर को जहां विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है. वहीं, अब सरकार के सहयोगी दल भी खुद की सरकार पर हमला कर रहे हैं. बिहार में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर चिराग पासवान ने भी सवाल उठाया है. वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव तो इसे नरसंहार कह रहे हैं. कांग्रेस से लेकर लेफ्ट तक मोर्चा खोले हुए हैं, जिसके चलते एनडीए नेताओं को नीतीश कुमार का बचाव करना मुश्किल हो रहा. ऐसे में तेजस्वी और राहुल गांधी बुधवार को एसआईआर के साथ-साथ बिहार के कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करते नजर आएंगे.

बिहार में ‘दो लड़कों’ की जोड़ी होगी हिट

नीतीश कुमार और पीएम मोदी की सियासी जोड़ी के सहारे एनडीए चुनावी मैदान में उतरी है. बिहार की सत्ता पर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन अपनी मजबूत पकड़ को बनाए रखने के लिए एक के बाद एक दांव चल रहा है. बिहार का विधानसभा चुनाव पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के काम और नाम पर लड़ने की स्ट्रैटेजी बनाई है. इसीलिए चुनाव से पहले साफ कर दिया है कि 2025 में एनडीए गठबंधन का सीएम चेहरा नीतीश कुमार होंगे. इस तरह से बिहार में सीएम नीतीश कुमार के चेहरे के साथ-साथ उनके सरकार के दौरान किए गए कामों को लेकर चुनाव लड़ने का प्लान बनाया है.

एनडीए का सबसे बड़ा लोकप्रिय चेहरा पीएम मोदी माने जाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव के बाद से ही बिहार पर खास फोकस कर रखा है. एक के बाद एक बिहार का दौरा कर पीएम मोदी विकास की सौगात देने के साथ-साथ सियासी एजेंडा सेट करने में जुटे हैं. मोदी-नीतीश की जोड़ी के सामने विपक्ष की तरफ से बिहार में राहुल-तेजस्वी की जोड़ी पूरे दमखम लगा रही है. राहुल और तेजस्वी बुधवार को पटना की सड़क पर उतरकर चुनावी हुंकार भरते नजर आएंगे और साथ ही नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने का नैरेटिव गढ़ेंगे.

तेजस्वी यादव ने बिहार की सियासत में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. 2020 में अकेले दम पर तेजस्वी ने नीतीश कुमार के नाक में दम कर रखा था. कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन न करने के चलते तेजस्वी यादव सत्ता में नहीं आ सके, लेकिन इस बार राहुल गांधी पहले से एक्टिव हैं. राहुल गांधी ने आधा दर्जन बार बिहार का दौरा करके सामाजिक न्याय के मुद्दे को धार देने का काम किया है. राहुल और तेजस्वी की जोड़ी दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटों पर फोकस कर रखा है, उनके इर्द-गिर्द ही सियासी एजेंडा सेट करने में जुटे हैं. ऐसे में देखना होगा कि बिहार के चुनाव में दो लड़कों की जोड़ी क्या हिट रहती है?

राहुल-तेजस्वी सड़क पर उतरकर करेंगे चक्का जाम, क्या बिहार में ‘दो लड़कों’ की जोड़ी करेगी कमाल?

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