Nation- प्रयागराज में थ्रीडी मैपिंग तकनीक से बसेगी संगम नगरी, जानें क्या है ये तकनीक, कैसे बनेगा ‘नया शहर’- #NA

माघ मेला बसाने के लिए थ्रीडी मैपिंग और ड्रोन सर्वे का उपयोग किया जाएगा.
प्रयागराज में संगम की रेत पर हर साल की तरह इस बार भी माघ मेला बसने जा रहा है, लेकिन 2026 का मेला कई मायनों में खास होने वाला है. महाकुंभ के बाद होने वाला यह माघ मेला आधुनिक तकनीक और परंपरागत आस्था का अनोखा मेल बनेगा. इस बार मेला बसाने में पहली बार थ्रीडी मैपिंग और ड्रोन सर्वे का उपयोग किया जाएगा, जिससे मेले की योजना न केवल अधिक सटीक होगी बल्कि समय की भी बचत होगी. तीन जनवरी 2026 से मेला प्रारंभ होने जा रहा है और प्रशासन ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं. लक्ष्य साफ है, श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सहज अनुभव प्रदान करना.
पहले मेला क्षेत्र की बसावट के लिए कर्मचारी रेत पर पैदल घूमकर नाप-तौल और सीमांकन करते थे. इस प्रक्रिया में कई दिन लग जाते थे और मौसम या जलस्तर के कारण बदलाव की चिंता बनी रहती थी. अब इस पूरी प्रक्रिया को आधुनिक विज्ञान का सहारा मिल रहा है. मेला क्षेत्र पर ड्रोन उड़ाकर थ्री डाइमेंशनल मैपिंग की जाएगी. ड्रोन जमीन की ऊंचाई, ढलान, मिट्टी की स्थिति और जलभराव की जानकारी अत्यंत सटीक रूप से प्रदान करेंगे. इससे स्पष्ट रूप से पता चलेगा कि कहां टेंट क्षेत्र होगा, कहां साधु-संतों के अखाड़े बसेंगे, कहां से मुख्य मार्ग निकलेगा और आपातकालीन मार्ग कितने चौड़े होने चाहिए. इस तकनीक की मदद से तैयार नक्शा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक होगा.
मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में बांटने की योजना
थ्रीडी मैपिंग के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट के आधार पर मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा. यह विभाजन इस तरह किया जाएगा कि यातायात, सुरक्षा व्यवस्था, बिजली-पानी की उपलब्धता और साधु समाज की परंपरागत व्यवस्थाओं में कोई बाधा न आए. पहले भौतिक सर्वे और पैमाइश में काफी समय लगता था और संशोधन भी मुश्किल होता था, लेकिन इस बार कंप्यूटर जनित मैप के कारण सेक्टर प्लानिंग कुछ ही दिनों में पूरी की जा सकेगी. इस बार मेला क्षेत्र को और बड़ा फैलाने की योजना है. पिछले माघ मेले में जहां लगभग 770 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला बसाया गया था, वहीं अब उसे बढ़ाकर लगभग 1000 हेक्टेयर तक करने की तैयारी है. क्षेत्रफल बढ़ने से श्रद्धालुओं और कल्पवासियों को अधिक खुली जगह और सुविधाएं मिलेंगी.
रेत सूखने के साथ तेज होगी माघ मेले की तैयारी
मेला क्षेत्र संगम की रेत पर बसता है जहां पानी का स्तर और जमीन की नमी लगातार बदलती रहती है. इसलिए जमीन के सूखने का इंतजार भी तैयारी का अहम हिस्सा होता है. उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला ने बताया कि इस समय समतलीकरण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. काली मार्ग और पुराने जीटी रोड पर पांटून पुल के लिए लगाए जाने वाले पीपा (लोहे के ड्रम) पहुंच चुके हैं. माना जा रहा है कि एक सप्ताह में रेत और अधिक सूख जाएगी, जिसके बाद जमीन समतल करने और टेंट लगाने का काम तेजी से किया जाएगा. विभागों के टेंडर संबंधी कार्य भी पूरा कर लिया गया है. विद्युत विभाग, जल निगम और लोक निर्माण विभाग के कार्य एक साथ चलते रहेंगे ताकि मेला समय पर तैयार हो सके.
इस बार सात पांटून पुल बनेंगे, आवागमन होगा सरल
माघ मेला में नदी पार करके आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पांटून पुल लगाए जाते हैं. पिछले साल जहां छह पांटून पुल बनाए गए थे, इस बार उनकी संख्या बढ़ाकर सात कर दी गई है. विशेष रूप से फाफामऊ पुल के पास एक नया पांटून पुल बनाने का निर्णय लिया गया है. इससे न केवल आवागमन सहज होगा बल्कि भीड़ का दबाव भी विभाजित हो जाएगा. प्रशासन का मानना है कि इससे आपात स्थिति में भी निकासी और रेस्क्यू कार्य अधिक तेज़ी से संभव होगा.
परंपरा और आध्यात्मिकता की अनुभूति देने वाले प्रमुख स्नान पर्व
माघ मेला केवल तंबू और घाटों की बसावट भर नहीं है. यह आस्था, तप और साधना का महीना होता है. कल्पवासी साधु और भक्त 30 दिनों तक संगम तट पर तपस्या करते हैं. इसी दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व आते हैं जिनका धार्मिक महत्व अत्यंत बड़ा है. माघ मेला
2026 के प्रमुख स्नान इस प्रकार होंगे:
03 जनवरी 2026 — पौष पूर्णिमा (मेला आरंभ)
14 जनवरी 2026 — मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026 — मौनी अमावस्या (सबसे बड़ा स्नान दिवस)
23 जनवरी 2026 — वसंत पंचमी
01 फरवरी 2026 — माघी पूर्णिमा
15 फरवरी 2026 — महाशिवरात्रि (समापन पर्व)
प्रयागराज में थ्रीडी मैपिंग तकनीक से बसेगी संगम नगरी, जानें क्या है ये तकनीक, कैसे बनेगा ‘नया शहर’
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