Nation- सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज की बढ़ी मुश्किलें, अस्पताल घोटाला मामले में ACB ने दर्ज किया केस- #NA

सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज की बढ़ी मुश्किलें, अस्पताल घोटाला मामले में ACB ने दर्ज किया केस

सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज.

एंटी करप्शन ब्यूरो ने आम आदमी पार्टी सरकार में मंत्री रहे सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ केस दर्ज किया है. दोनों नेताओं पर हॉस्पिटल निर्माण कार्य में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है. 2 दिन पहले ही उपराज्यपाल ने एसीबी से जांच करने के लिए कहा था. बीजेपी नेता और विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की शिकायत पर जांच शुरू हुई थी. साल 201819 में दिल्ली सरकार ने 24 अस्पताल परियोजनाओं (11 नए अस्पताल और 13 पुराने अस्पतालों के विस्तार) के लिए 5,590 करोड़ रुपये मंजूर किए थे. ये सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाए और उनकी लागत भी बहुत ज़्यादा बढ़ गई, जिससे भारी वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के संकेत मिले.

जांच में सामने आया कि अस्पतालों, पॉलीक्लिनिक और ICU निर्माण में बड़ी अनियमितताएं, बिना मंजूरी के निर्माण और फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ है. कई अस्पतालों के निर्माण में सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च बढ़ा लेकिन कोई भी प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हुआ. ये केस धारा 17A (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के तहत मंजूरी मिलने के बाद दर्ज किया गया है.

किस आधार पर शुरू हुई जांच

  1. 22 अगस्त 2024 को तत्कालीन विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रोजेक्ट्स में बजट में हेरफेर, फंड का दुरुपयोग और ठेकेदारों के साथ मिलीभगत हुई है. आईसीयू अस्पताल प्रोजेक्ट के तहत 6 हजार 800 बेड्स वाले 7 अस्पतालों के लिए 1 हजार 125 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे. मगर, 800 करोड़ खर्च होने के बाद भी सिर्फ 50% काम ही हुआ है, जबकि प्रोजेक्ट 6 महीने में पूरा होना था.
  2. इतना ही नहीं ज्वालापुरी और मादीपुर के अस्पतालों में बिना अनुमति के अतिरिक्त निर्माण किया गया. मादीपुर अस्पताल नवंबर 2022 तक पूरा होना था लेकिन आज भी अधूरा और बंद पड़ा है. आईसीयू अस्पतालों का ठेका SAM India Buildwell Pvt Ltd को दिया गया था, जिनमें लागत 100% से अधिक बढ़ गई है, पर काम अब भी अधूरा है.
  3. LNJP अस्पताल के नए ब्लॉक का ठेका Swadeshi Civil Infrastructure Pvt Ltd को दिया गया था, जिसकी लागत 488 करोड़ से बढ़कर 1,135 करोड़ हो गई, लेकिन निर्माण अब भी अधूरा है. पॉलीक्लिनिक प्रोजेक्ट के तहत 94 में से केवल 52 क्लिनिक बने और लागत 168 करोड़ से बढ़कर 220 करोड़ हो गई. कई क्लिनिक अब भी काम नहीं कर रहे हैं.
  4. साल 201617 में घोषित Health Information Management System (HIMS) अब तक लागू नहीं किया गया. एनआईसी का मुफ़्त और सस्ता ई-हॉस्पिटल सॉफ़्टवेयर बिना कारण रिजेक्ट कर दिया गया.

जांच में क्या पाया गया?

नियमों का उल्लंघन, गलत टेंडर प्रक्रिया, जानबूझकर देरी, और सरकारी धन की बर्बादी.
बजट बढ़ाकर प्रोजेक्ट्स पास कराए गए. सस्ते विकल्पों को नजरअंदाज किया गया और बिना उपयोग की संपत्तियां खड़ी की गईं.

आरोपों पर ACB की क्या कार्रवाई हुई?

जांच के बाद ACB ने पूर्व मंत्रियों के खिलाफ 17A के तहत अनुमति मांगी, जो मिल गई. इसके बाद FIR नंबर 37/2025, 26 जून 2025 को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13(1) और IPC की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), और 120B (षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज किया गया. इस मामले में पूर्व मंत्री, सरकारी अधिकारी और ठेकेदारों की भूमिका की पूरी जांच की जा रही है.

सत्येंद्र जैन और सौरभ भारद्वाज की बढ़ी मुश्किलें, अस्पताल घोटाला मामले में ACB ने दर्ज किया केस

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