Nation- जर्मन शेफर्ड से भी तेज, शिवाजी महाराज का चेहता… अब सीमा पर तैनात होगा PM मोदी की सिक्योरिटी में शामिल ये डॉग- #NA

जर्मन शेफर्ड से भी तेज, शिवाजी महाराज का चेहता... अब सीमा पर तैनात होगा PM मोदी की सिक्योरिटी में शामिल ये डॉग

काफी फुर्तीले होते हैं ये डॉग

लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड और बेल्जियन मेलिनोइस विदेशी नस्ल के वो कुत्ते हैं, जो अपनी फुर्ती, साहस और वफादारी के लिए जाने जाते हैं. ये लंबे समय से भारतीय सेना के अटूट साथी बने हुए हैं. सीमा पर तैनात जवानों को इनकी सूंघने की ताकत और वफादारी ने हमेशा जीत का भरोसा दिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं, इन विश्व प्रसिद्ध योद्धाओं के साथ-साथ अब देसी कुत्ते भी सेना का साथ दे रहे हैं.

भारत का मुधोल हाउंड’ ऐसा डॉगहै, जो अपनी तेज रफ्तार, सतर्कता और वफादारी के लिए जाना जाता है. इसे कुछ जगहों पर कारवानी (Caravan Hound) भी कहा जाता है. ये कुत्ते दिखने में पतले, लंबे और फुर्तीले होते हैं. इनका शरीर ग्रेहाउंड जैसा होता है, लेकिन स्वभाव में कहीं ज्यादा समझदार और वफादार होते हैं. भारत सरकार ने मुधोल हाउंड को स्वदेशी कुत्तों की गौरव सूची में शामिल किया है और डाक विभाग ने इसके सम्मान में डाक टिकट भी जारी किया है.

सीमाओं की रक्षा के लिए भी मैदान में उतर रहे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में इन्हें तैनात हुए काफी समय हो गया है. अब ये देश की सीमाओं की रक्षा के लिए भी मैदान में उतर रहे हैं. इनके शरीर की संरचना इन्हें बाकियों से अलग बनाती है. कई लोग इन्हें कारवां हाउंड भी कहते हैं. कुछ इन्हें वूली हाउंड, वुड डॉग, वुड हाउंड, साइट हाउंड कहते हैं. ये फुर्तीले, तेज नजर वाले और लंबे चेहरे वाले ताकतवर कुत्ते 50 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा की रफ्तार से दौड़ सकते हैं.

इस नस्ल के कुत्तों के जोड़े तीन किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी से किसी भी वस्तु की गंध सूंघ सकते हैं. इनकी जन्मजात शिकार करने की क्षमता इन्हें दूसरे कुत्तों से अलग करती है. एक बार इनके मजबूत जबड़ों में फंस जाने के बाद बचना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि एक जर्मन शेफर्ड को जो काम करने में करीब 90 सेकंड लगते हैं. उसे करने में इन्हें सिर्फ 40 सेकंड लगते हैं.

इन कुत्तों का इतिहास क्या कहता है?

इन मुधोल हाउंड कुत्तों का इतिहास बहुत पुराना है. कहा जाता है कि कभी ये दक्कन के राजाओं के शिकार के साथी हुआ करते थे. महाराष्ट्र और कर्नाटक के इलाकों में आज भी कई लोककथाएं सुनने को मिलती हैं. कहा जाता है कि इन्हीं कुत्तों ने शिवाजी के ज्येष्ठ बेटे संभाजी की जान बचाई थी. इसलिए शिवाजी का इनसे स्नेह भी बहुत बढ़ गया था. उन्होंने ही अपनी सेना में इस नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल किया था.

यह भी कहा जाता है कि कर्नाटक के अंतिम मुधोल राजा मालोजी राव ने घोरपार में स्थानीय हाउंड और मध्य एशियाई ग्रेहाउंड का क्रॉस-ब्रीडिंग कराकर इस नस्ल को विकसित और लोकप्रिय बनाया था. इस नस्ल के पिल्लों का एक जोड़ा तत्कालीन ब्रिटिश राजा जॉर्ज पंचम को उपहार में दिया गया था, जिसकी वजह से यह नस्ल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुई.

पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम की प्रशंसा

लगभग पांच साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य से पालतू जानवरों के बारे में बात करते सुने गए थे. मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने मुधोल हाउंड और हिमाचली हाउंड की प्रशंसा की थी. राजपलायम, कन्नी, चिप्पीपराई और कोम्बाई नस्ल के कुत्तों का भी ज़िक्र किया था. कुछ साल पहले प्रधानमंत्री की सुरक्षा में विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में दो मुधोल हाउंड भी शामिल किए गए थे. अब बीएसएफ ने 150 मुधोल हाउंड को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है. इस बार ये मुधोल हाउंड सीमा पर ड्रग्स और विस्फोटकों का पता लगाने के अलावा, गुमशुदा व्यक्तियों या संदिग्धों को खोजने के लिए भी कड़ी मेहनत करेंगे.

जर्मन शेफर्ड से भी तेज, शिवाजी महाराज का चेहता… अब सीमा पर तैनात होगा PM मोदी की सिक्योरिटी में शामिल ये डॉग

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