Nation- बंगाल में SIR का खौफ… किसी ने खाया जहर तो किसी ने लगाई फांसी, अब तक 7 की गई जान- #NA

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन यानी एसआईआर का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि लोग खुदकुशी करने लगे हैं. SIR के डर से आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ गई है. अब तक सात लोग अपनी जान की बाजी लगा चुके हैं. किसी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली तो वहीं किसी ने जहर खाकर अपनी जान दे दी. ताजा मामला दक्षिण 24 परगना का है.

यहां के भांगोर के सोफिकुल गाजी ने एसआईआर-एनआरसी के डर से आत्महत्या कर ली. घटना के बाद टीएमसी विधायक सौकत मोल्लाह गाजी के परिवार से मिलने घटनास्थल पर पहुंचे. दरअसल, जब से बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से लोग खौफजदा हैं. लोगों को इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं उसे वापस न लौटना पड़े.

पश्चिम बंगाल में 23 साल बाद SIR

पश्चिम बंगाल में 23 साल बाद एसआईआर कराया जा रहा है. इससे पहले राज्य में आखिरी बार 2002 में हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी. दावे और आपत्तियों के लिए पूरे एक महीना का समय दिया जाएगा. 9 दिसंबर से 8 जनवरी तक लोग दावे और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. 31 जनवरी तक सुनवाई और सत्यापन का काम किया जाएगा.

वहीं, फाइनल वोटर लिस्ट विधानसभा चुनाव से महज दो महीने पहले सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी. विधानसभा चुनाव के अगले साल अप्रैल-मई में होने की संभावना है. दरअसल, SIR का काम केवल बंगाल में ही नहीं हो रहा है. यह बंगाल के साथ-साथ पूरे 12 राज्यों में हो रहा है. चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर तो पहले भी हुआ था तब तो लोग नहीं डरे थे. अब इससे क्यों डर रहे हैं.

चुनाव आयोग का कहना है कि हर 20-25 साल में वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा करना जरूरी है. जिन लोगों की मौत हो चुकी है, उनके नाम को हटाना है. इसके अलावा जो लोग बाहर रह रहे हैं, उनके नाम को भी हटाना है और नए वोटर को इसमें जोड़ना है.

SIR से क्यों डर रहे हैं लोग?

कहा जा रहा है कि 2.5 करोड़ बंगालियों का नाम कटेगा. डिटेंशन कैंप बनाया जाएगा. प्रवासियों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. इस डर से लोग घबरा गए हैं. नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, कूचबिहार, हावड़ा जैसे इलाकों में बांग्लादेशी प्रवासी ज्यादा हैं. पानीहाटी में एक ने आत्महत्या कर ली. उसकी सुसाइड नोट में लिखा था कि एनआरसी मेरी मौत का जिम्मेदार है.

अब तक 7 की गई जान

  1. दक्षिण 24 परगना में सोफिकुल गाजी ने की खुदकुशी
  2. पानीहाटी में प्रदीप कर की आत्महत्या
  3. दिनहाटा में 63 साल के बुजुर्ग ने जहर खाकर दी जान
  4. बीरभूम में खितिश मजूमदार ने लगाई फांसी
  5. हावड़ा में जाहिद माल ने लगाई फांसी
  6. पूर्वी बर्द्धमान में बिमल संत्रा ने की आत्महत्या
  7. पश्चिम मेदिनीपुर में 95 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई, इसको भी SIR से ही जोड़ा गया है.

बंगाल में इन लोगों की मौत पर टीएमसी ने नाराजगी जाहिर की है. टीएमसी ने कहा है कि एसआईआर के डर से लोग अपनी जान दे रहे हैं. SIR को लेकर कल यानी मंगलवार को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने विरोध प्रदर्शन किया था. टीएमसी नेताओं और समर्थकों का कहना है कि एसआईआर स्वीकार नहीं है. चुनाव आयोग की तरफ से जो 2002-03 वोटर लिस्ट की बात कही गई है वो ठीक नहीं है.

बंगाल में SIR का खौफ… किसी ने खाया जहर तो किसी ने लगाई फांसी, अब तक 7 की गई जान

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Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
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पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन यानी एसआईआर का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि लोग खुदकुशी करने लगे हैं. SIR के डर से आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ गई है. अब तक सात लोग अपनी जान की बाजी लगा चुके हैं. किसी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली तो वहीं किसी ने जहर खाकर अपनी जान दे दी. ताजा मामला दक्षिण 24 परगना का है.

यहां के भांगोर के सोफिकुल गाजी ने एसआईआर-एनआरसी के डर से आत्महत्या कर ली. घटना के बाद टीएमसी विधायक सौकत मोल्लाह गाजी के परिवार से मिलने घटनास्थल पर पहुंचे. दरअसल, जब से बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से लोग खौफजदा हैं. लोगों को इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं उसे वापस न लौटना पड़े.

पश्चिम बंगाल में 23 साल बाद SIR

पश्चिम बंगाल में 23 साल बाद एसआईआर कराया जा रहा है. इससे पहले राज्य में आखिरी बार 2002 में हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट लिस्ट 9 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी. दावे और आपत्तियों के लिए पूरे एक महीना का समय दिया जाएगा. 9 दिसंबर से 8 जनवरी तक लोग दावे और आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. 31 जनवरी तक सुनवाई और सत्यापन का काम किया जाएगा.

वहीं, फाइनल वोटर लिस्ट विधानसभा चुनाव से महज दो महीने पहले सात फरवरी को प्रकाशित की जाएगी. विधानसभा चुनाव के अगले साल अप्रैल-मई में होने की संभावना है. दरअसल, SIR का काम केवल बंगाल में ही नहीं हो रहा है. यह बंगाल के साथ-साथ पूरे 12 राज्यों में हो रहा है. चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर तो पहले भी हुआ था तब तो लोग नहीं डरे थे. अब इससे क्यों डर रहे हैं.

चुनाव आयोग का कहना है कि हर 20-25 साल में वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा करना जरूरी है. जिन लोगों की मौत हो चुकी है, उनके नाम को हटाना है. इसके अलावा जो लोग बाहर रह रहे हैं, उनके नाम को भी हटाना है और नए वोटर को इसमें जोड़ना है.

SIR से क्यों डर रहे हैं लोग?

कहा जा रहा है कि 2.5 करोड़ बंगालियों का नाम कटेगा. डिटेंशन कैंप बनाया जाएगा. प्रवासियों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा. इस डर से लोग घबरा गए हैं. नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, कूचबिहार, हावड़ा जैसे इलाकों में बांग्लादेशी प्रवासी ज्यादा हैं. पानीहाटी में एक ने आत्महत्या कर ली. उसकी सुसाइड नोट में लिखा था कि एनआरसी मेरी मौत का जिम्मेदार है.

अब तक 7 की गई जान

  1. दक्षिण 24 परगना में सोफिकुल गाजी ने की खुदकुशी
  2. पानीहाटी में प्रदीप कर की आत्महत्या
  3. दिनहाटा में 63 साल के बुजुर्ग ने जहर खाकर दी जान
  4. बीरभूम में खितिश मजूमदार ने लगाई फांसी
  5. हावड़ा में जाहिद माल ने लगाई फांसी
  6. पूर्वी बर्द्धमान में बिमल संत्रा ने की आत्महत्या
  7. पश्चिम मेदिनीपुर में 95 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई, इसको भी SIR से ही जोड़ा गया है.

बंगाल में इन लोगों की मौत पर टीएमसी ने नाराजगी जाहिर की है. टीएमसी ने कहा है कि एसआईआर के डर से लोग अपनी जान दे रहे हैं. SIR को लेकर कल यानी मंगलवार को ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने विरोध प्रदर्शन किया था. टीएमसी नेताओं और समर्थकों का कहना है कि एसआईआर स्वीकार नहीं है. चुनाव आयोग की तरफ से जो 2002-03 वोटर लिस्ट की बात कही गई है वो ठीक नहीं है.

बंगाल में SIR का खौफ… किसी ने खाया जहर तो किसी ने लगाई फांसी, अब तक 7 की गई जान

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