Nation- 53 साल बाद सुलझा बिहार-झारखंड का सोन नद विवाद, अब दोनों राज्यों में बंटेगा पानी; जानें किसे कितना मिलेगा- #NA

बिहार और झारखंड के बीच लंबे अरसे से चला आ रहा सोन नद विवाद अब सुलझता हुआ दिख रहा है. दरअसल, इस विवाद का मूल यह था कि बिहार और झारखंड दोनों ही सोन नद के पानी के उपयोग पर अपने-अपने दावे पेश कर रहे थे. इस विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की. अब पहल के बाद दोनों ही राज्यों के बीच एक आम सहमति बनने की खबर है. जल्द ही दोनों ही राज्यों के बीच एक एमओयू पर साइन किया जाएगा.
53 साल पुराना विवाद सुलझा
दरअसल, कागजी तौर पर देखें तो यह विवाद 26 साल पुराना नहीं बल्कि 53 साल पुराना है. सोन नद के जल को लेकर के वाणसागर समझौता 1973 में हुआ था. तब बिहार का विभाजन नहीं हुआ था और एकीकृत बिहार था. उस वक्त उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच में सोन नद के जल को लेकर के विवाद था.
वहीं जब 26 साल पहले 2000 में बिहार का विभाजन हुआ और झारखंड बना, इसके बाद से झारखंड ने सोन नद के पानी में अपनी हिस्सेदारी की बात कही. हालांकि मिली जानकारी के अनुसार, 36 साल पहले ही इस परियोजना का डीपीआर सौंपा जा चुका था, लेकिन तकनीकी और राजनीतिक कारणों से मामला इतने लंबे वक्त तक लटका रहा.
नहीं बन पाया इंद्रपुरी जलाशय
बिहार के रोहतास जिले में इंद्रपुरी बराज से 80 किलोमीटर दूर मटियाव में इंद्रपुरी जलाशय का निर्माण किया जाना था, जिसे लेकर के 1990 में एक DPR केंद्रीय जल आयोग को सौंपा गया था, लेकिन उत्तर प्रदेश को इस डैम के जलाशय स्तर 173 मीटर पर आपत्ति थी. उत्तर प्रदेश का कहना था कि इस जलाशय स्तर से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित ओबरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट पर असर पड़ सकता है.
लिहाजा यूपी ने इस पर सहमति नहीं थी, जिसके बाद मामला उलझ गया. बिहार सरकार ने इस संबंध में केंद्र से कई बार अनुरोध भी किया, जिसके बाद पूर्ण जलाशय स्तर को घटा करके 169 मीटर किया गया, जिसमें अधिकतम जलस्तर की सीमा 171 मीटर की गई. इसके बाद उत्तर प्रदेश में अपनी सहमति जता दी.
किसके हिस्से में कितना आएगा पानी?
सन 2000 में जब झारखंड अस्तित्व में आया, तब से झारखंड बिहार के कोटे से अपने हिस्सेदारी मांग रहा था. यानी जो समझौता 53 साल पहले हुआ था, उसका क्रियान्वयन अब जाकर के हो रहा है. यानी पानी का बंटवारा इतने सालों के बाद होगा. 2025 में जब रांची में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की मीटिंग थी, तब अमित शाह उपस्थित थे. वहां पर बिहार ने इस मुद्दे को उठाया था. तब केंद्र सरकार की तरफ से सकारात्मक रूप दिखाया गया था. अब ताजा जानकारी के अनुसार, झारखंड ने बिहार के बंटवारे के फार्मूले पर अपनी सहमति जता दी है. इसके अनुसार सोन नद का 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी बंटेगा. इसमें से बिहार को पांच मिलियन एकड़ फीट पानी मिलेगा, जबकि 2.75 एमएएफ पानी झारखंड को मिलेगा.
बिहार में नदियों और बांध के ऊपर काम कर चुके विशेषज्ञ दिनेश मिश्रा कहते हैं कि सोन नद मध्य प्रदेश से निकलता है और उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार में प्रवेश करता है. झारखंड के बनने के बाद इसे झारखंड होते बिहार में बहना कह सकते हैं. वर्तमान में सोन नद राजधानी पटना के साथ रोहतास, भोजपुर, जहानाबाद और औरंगाबाद के इलाके में बहता है.
बिहार-झारखंड के इन जिलों में सोन नद से सिंचाई
वहीं झारखंड में गढ़वा और पलामू जिले में यह नद बहता है. बिहार के पटना समेत भोजपुर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, गया और अरवल जैसे जिलों में सिंचाई का सबसे प्रमुख स्त्रोत सोन नद है. इससे लाखों किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है. वह यह भी कहते हैं कि सोन नद जल विवाद का समाधान जल संसाधन प्रबंधन की दिशा में एक सकारात्मक पहल कहा जा सकता है. इससे कृषि, सिंचाई और विकास कार्यों को नई गति मिल सकती है.
बिहार कैबिनेट से मिली थी मंजूरी
14 जनवरी को राज्य कैबिनेट की मीटिंग में बिहार मंत्रिमंडल ने बिहार और झारखंड के बीच लंबे समय से सोन जल बटवारा विवाद के निपटारे को लेकर के हरी झंडी दी. तब कैबिनेट की मीटिंग के बाद कैबिनेट मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने जानकारी दी कि 53 वर्षों के बाद बिहार और झारखंड के बीच सोन नद जल बंटवारा विवाद के निपटारे को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है.
53 साल बाद सुलझा बिहार-झारखंड का सोन नद विवाद, अब दोनों राज्यों में बंटेगा पानी; जानें किसे कितना मिलेगा
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