Nation- अहंकार में डूबे थे तेजस्वी… महागठबंधन में नहीं था कोई सामंजस्य, इस्तीफे के बाद VIP नेता सुनील सिंह ने लगाए कई आरोप- #NA

अहंकार में डूबे थे तेजस्वी... महागठबंधन में नहीं था कोई सामंजस्य, इस्तीफे के बाद VIP नेता सुनील सिंह ने लगाए कई आरोप

डॉ. सुनील कुमार सिंह ने तेजस्वी और मुकेश पर साधा निशाना.

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश साहनी की पार्टी से बड़ी खबर है. विकासशील इंसान पार्टी के चिकित्सा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वीआईपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ सुनील कुमार सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने के बाद सुनील कुमार सिंह ने तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के ऊपर कई आरोप लगाए. उनका कहना था कि विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में कभी भी सामंजस्य नहीं दिखा. जिसका नतीजा यह रहा कि महागठबंधन को इतनी बुरी तरीके से हार मिली.

TV9 डिजिटल के साथ बात करते हुए सुनील कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले ऐसा महसूस हो रहा था कि बिहार को एक युवा नेतृत्व की जरूरत है. जो राज्य की दशा और दिशा को बदल सकता है. इसी सोच के कारण उन्होंने वीआईपी को ज्वाइन किया. ऐसा लग रहा था कि तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी की जोड़ी बिहार को नई दिशा दिखा सकते हैं. लेकिन जब टिकट बांटने का वक्त आया तब ऐसा प्रतीत हुआ कि हम जिन्हे युवा कह रहे हैं इनमें यह युवापन कम बल्कि इनके लड़कपन और बालपन ज्यादा है.

तेजस्वी लगातार कर रहे थे मुकेश को बेइज्जत

सुनील कुमार सिंह ने कहा कि यह गंभीर राजनीतिज्ञ के रूप में अब नहीं रहे हैं. उन्होंने पहले ही मान लिया था कि हमारी सरकार बन गई. तेजस्वी यादव एक राजकुमार की तरह व्यवहार करने लगे थे. उनका अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं से भी बिहेवियर सही नहीं था. उनका बिहेव टिकट बंटवारे के दौरान हमारे नेता के साथ भी अच्छा नहीं था. कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार अपने नेता के हाव-भाव से होता है. तेजस्वी यादव लगातार मुकेश सहनी को बेइज्जत कर रहे थे जबकि वह उनका गुणगान किए जा रहे थे.

मुकेश सहनी ने पता नहीं क्यों पीया अपमान का घूंट

सुनील कुमार सिंह ने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव का व्यवहार विकासशील इंसान पार्टी के प्रति भी सही नहीं था. 60 सीटों को देने से बात शुरू हुई, फिर बात 40 सीट पर आई. उसके बाद से 24 सीटों की बात हुई और जैसे ही एनडीए की सीटों का बंटवारा हुआ, हमारे पास कुछ सीटें फेंक दी गई कि अगर इसे लेना है तो लो नहीं तो जाओ. अपमान का घूंट पी करके भी मुकेश सहनी पता नहीं क्या सोचकर लगे हुए थे. इसका जवाब मुझे आज तक नहीं मिल पाया. जो सीटें दी गई थी, उनमें गौरा बौराम, जहां से हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव लड़ रहे थे, वहां पर राजद ने अपने उम्मीदवार उतार दिए.

तब हमारी औकात क्या रह गई थी?

राजद ने हमारे प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ भी अपने उम्मीदवार उतार दिए. तब हमारी औकात क्या रह गई थी? इन सारी बातों को निषाद समाज देख रहा था. निषाद समाज ने देखा कि इन दो जगह पर हमें बेइज्जत किया जा रहा है. चुनाव प्रचार में हमने कई नेताओं के कार्यक्रम को भी लगाने की बात कही. लेकिन कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई. महागठबंधन में आपसी सामंजस्य और आपसी सम्मान दोनों नहीं था. डॉक्टर सुनील ने कहा कि चुनाव के दौरान भी कहीं कोई तारतम्यता नहीं दिखाई दी। कार्यकर्ताओं की एकजुटता भी नहीं दिखाई दे। एक गैर गंभीर तथा कथित युवा नेतृत्व के साथ रहने से बिहार को नुकसान है।

निषाद समाज ने एनडीए को दिया वोट

सुनील कुमार सिंह ने कहा कि जदयू को छोड़कर वीआईपी को ज्वाइन करने का कारण था कि 900 प्रति माह पर काम करने वाला व्यक्ति आज इस मुकाम पर है. उसने अपने समाज के लिए ऐश, आराम की जिंदगी को छोड़ा और उनके सशक्तिकरण के लिए काम किया. निषाद समाज में उनकी पैठ भी है लेकिन निषाद समाज ने देखा कि महागठबंधन ने हमारी पार्टी का किस तरीके से बेइज्जत किया. सारे निषाद समाज ने एनडीए को अपना वोट कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके साथ किसी भी प्रकार का संवाद नहीं हुआ. यह गैर गंभीर नेता का परिचायक है. वह युवा नहीं बल्कि लड़कपन और बालहठ है. जब आपसी संवाद होगा तब आप कोई बात कहेंगे.

डिप्टी सीएम का झुनझुना मुकेश सहनी को थमाया

उनका कहना था कि बिहार विधानसभा चुनाव में हार का करण संवाद हीनता, एक दूसरे को धोखा देना, नीचे दिखाने था. तेजस्वी यादव को ऐसा लग रहा था कि वह सीएम बन गए हैं. डिप्टी सीएम का झुनझुना मुकेश सहनी को भी दिया गया था. तेजस्वी यादव उनके साथ अलग तरीके से पैस आ रहे थे. जबकि मुकेश सहनी तेजस्वी यादव और उनके पिता लालू प्रसाद का गुणगान किया जा रहे थे.

जितना गुणगान मुकेश साहनी ने लालू यादव का किया उतना तेजस्वी यादव ने खुद अपने पिता का नहीं किया होगा. ऐसी चीज अगर दोनों तरफ से हो तो अच्छा लगता है. लेकिन आप किसी का गुणगान करें और आपके साथ किसी का भी है सही नहीं होता. इसे जनता और कार्यकर्ता सब देख रहे हैं जिसका नतीजा यह हुआ कि मतदान में पता चल गया.

अहंकार में डूबे थे तेजस्वी… महागठबंधन में नहीं था कोई सामंजस्य, इस्तीफे के बाद VIP नेता सुनील सिंह ने लगाए कई आरोप

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