Nation- ये मदन मोहन मालवीय की परिकल्पना का घोर अपमान है… BHU में EC के गठन पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा- #NA

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में करीब चार साल बाद कार्यकारी परिषद यानी ईसी का गठन कर दिया गया है. बीते 3 साल से बिना EC के ही विश्वविद्यालय संचालित हो रहा था. तत्कालीन कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन का 3 साल का कार्यकाल बिना ईसी के गुजर गया. इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि आखिरकार 4 साल बाद मोदी सरकार ने BHU एक्सक्यूटिव काउंसिल- EC का गठन कर दिया है. उन्होंने कहा कि ये मदन मोहन मालवीय की परिकल्पना का अपमान है.
नेता ने सोशल मीडिया पर एक लंबा चोड़ा पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘मोदी सरकार ने आखिरकार चार साल बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में एक्सक्यूटिव काउंसिल- EC का गठन कर दिया है. पिछली EC जुलाई 2021 में समाप्त हो गई थी’. उन्होंने कहा ‘पिछले कुलपति ने पूरे तीन साल का कार्यकाल बिना एक बार भी EC का सामना किए पूरा कर लिया. विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के प्रशासन को चलाने के लिए उन्होंने आपातकालीन शक्तियों का सहारा लिया. यह स्थिति महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की लोकतांत्रिक विश्वविद्यालय की परिकल्पना का घोर अपमान है.
मोदी सरकार ने आखिरकार चार साल बाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में एक्सक्यूटिव काउंसिल- EC का गठन कर दिया है। पिछली EC जुलाई 2021 में समाप्त हो गई थी।
पिछले कुलपति ने पूरे तीन साल का कार्यकाल बिना एक बार भी EC का सामना किए पूरा कर लिया। विश्वविद्यालय के रोजमर्रा के प्रशासन को
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 24, 2025
‘विश्वविद्यालय एडहॉक और अराजक हालात में चल रहा’
कांग्रेस नेता ने कहा ‘EC का गठन BHU में शासन की बहाली के नाम पर महज शुरुआती कदम भर है. आज भी कुलाधिपति (Chancellor) का पद रिक्त है, कुलपति (Vice Chancellor) का पद एक प्रोफेसर कार्यवाहक रूप में संभाल रहे हैं, और रजिस्ट्रार का पद भी खाली है. BHU अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को भी अगले आदेश मिलने तक के आधार पर नियुक्त किया गया है. पूरा विश्वविद्यालय एडहॉक और अराजक हालात में चल रहा है.
उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र की अपनी संसदीय सीट वाराणसी की एक केंद्रीय संस्था की दुर्दशा है , उस संस्था की जिसे इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस घोषित किया गया था. उन्होंने कहा कि ऐसे में देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की अनदेखी और उनमें व्याप्त अराजकता की केवल कल्पना ही की जा सकती है.
एक्जीक्यूटिव काउंसिल के गठन में शामिल सदस्य
बीते बुधवार (23 जुलाई) को मंत्रालय के सचिव प्रवीण सक्सेना की तरफ से ईसी के गठन की अधिसूचना जारी की गई थी. एक्जीक्यूटिव काउंसिल के गठन में शामिल कई सदस्यों ने नामों ने चौंका दिया. पहली बार इस गठन में कई राजनीतिक शख्सियत की एंट्री हुई है. एक्जीक्यूटिव काउंसिल में पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडे, महापौर अशोक तिवारी, भाजपा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल को पदेन सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है.
इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह, BHU के सोशियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर ओम प्रकाश भारतीय और श्वेता प्रसाद, BHU के जंतु विज्ञान विभाग की सेवानिवृत प्रोफेसर बेचन लाल और रेडियोथेरेपी और रेडिएशन मेडिसिन विभाग के सेवानिवृत प्रोफेसर उदय प्रताप शाही को परिषद में सदस्य नियुक्त किया गया है. जब विश्वविद्यालय के इतिहास में ये पहला मौका है जब स्थाई कुलपति की नियुक्ति के पहले ही शिक्षा मंत्रालय ने ईसी का गठन कर प्रक्रिया पूरी कर दी है.
ये मदन मोहन मालवीय की परिकल्पना का घोर अपमान है… BHU में EC के गठन पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
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