Nation- पपीते के इस पेड़ पर लगे हैं 300 फल, भारत के सबसे ऊंचे पेड़ से सिर्फ एक फिट कम है हाईट- #NA

चूल्हे की ठंडी राख से इतना बड़ा हो गया पेड़
नक्सलवाद खत्म होते ही अब उन नक्सल प्रभावित गांवों में से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. जी हां, यह तस्वीर है पपीते के एक ऐसे पेड़ की, जिसकी उम्र करीब 5 वर्ष है और ऊंचाई 40 फुट से भी अधिक. भारत में सबसे ऊंचा पपीते के पेड़ तमिलनाडु के मदुरै जिले में है, जिसकी ऊंचाई 41 फीट यानी करीब 12.5 मीटर बताई जाती है. बालाघाट में मौजूद इस पेड़ के तने की मोटाई इतनी है कि सागौन का पेड़ भी शर्मा जाए.
यह पेड़ कभी नक्सल प्रभावित रहे गांव कसंगी के पूर्व सरपंच बस्तर सिंह पंद्रे के घर पर मौजूद है. ऐसे में इस पेड़ को जो भी देखता है, वह हैरान रह जाता है. यह पेड़ साल में दो बार फल देता है, जिसे बेचकर परिवार को थोड़ी-बहुत आय भी हो जाती है. आइए जानते हैं कि यह पेड़ आखिर क्यों इतना खास है.
लगे हैं 300 से अधिक पपीते
बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल गांव में पूर्व सरपंच बस्तर सिंह पंद्रे की बहू ने साल 2020 में इस पपीते के पेड़ को लगाया था. धीरे-धीरे यह इतना बढ़ गया कि अब यह किसी विशाल वृक्ष से कम नहीं लगता. महज पांच साल की उम्र में यह पेड़ साल में दो बार फल दे रहा है.
इस पेड़ में 12 से ज्यादा शाखाएं हैं, जिन पर 300 से अधिक पपीते लगे हुए हैं. परिवार का कहना है कि ये पपीते बेहद मीठे, रसदार और स्वादिष्ट होते हैं. घर के लोगों के अनुसार, पेड़ को बड़ा करने के लिए केवल घर के चूल्हे की राख का ही उपयोग किया गया. इसी घरेलू उपाय से पेड़ लगातार बढ़ता गया और उसमें भरपूर फल लगते गए.
पेड़ देखकर लोग हुए हैरान
कृषि विशेषज्ञ एवं समाजसेवी महेंद्र मेश्राम का मानना है कि यह पपीते का पेड़ प्राकृतिक खेती और देसी तरीकों की ताकत को दर्शाता है. उनका कहना है कि बिना किसी रासायनिक खाद के, सिर्फ घरेलू खाद से इतना बड़ा और फलदार पेड़ तैयार होना किसानों और बागवानी करने वालों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है. पत्रकार रफी अंसारी बताते हैं कि उन्होंने आज तक इतना बड़ा पपीते का पेड़ कभी नहीं देखा. इस पेड़ में मोटी-मोटी टहनियां निकली हुई हैं, जो आमतौर पर पपीते के पेड़ों में देखने को नहीं मिलतीं.
इतनी ज्यादा ग्रोथ कैसे?
बस्तर सिंह पंद्रे बताते हैं कि उन्होंने यह पपीते का पौधा करीब पांच साल पहले अपने घर के पीछे आंगन में लगाया था. उन्होंने इसमें किसी भी प्रकार की रासायनिक खाद का उपयोग नहीं किया. घरेलू उपाय के तौर पर वे चूल्हे की ठंडी राख पेड़ के चारों ओर डालते रहे. यही राख धीरे-धीरे खाद का काम करती रही और पेड़ को भरपूर पोषण मिलता गया.
इस पपीते के पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसमें सामान्य पपीते के पेड़ों की तरह सिर्फ एक सीधा तना नहीं है, बल्कि इसमें जगह-जगह मोटी और मजबूत शाखाएं निकली हुई हैं. देखने में यह पेड़ किसी दूसरी फलदार प्रजाति जैसा प्रतीत होता है. फिलहाल इस पेड़ पर 250 से 300 तक पपीते लगे हुए हैं.
वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी दे रहा टक्कर
भारत में सबसे ऊंचे पपीते के पेड़ का रिकॉर्ड तमिलनाडु के मदुरै जिले में दर्ज है, जहां एक किसान द्वारा उगाए गए पपीते के पेड़ की ऊंचाई 41 फीट यानी करीब 12.5 मीटर बताई जाती है. वहीं, विश्व रिकॉर्ड की बात करें तो ब्राजील का नाम सामने आता है, जहां पपीते के पेड़ की ऊंचाई 47.83 फीट दर्ज की गई है. ऐसे में यदि इस पेड़ की ऊंचाई उम्र के साथ और बढ़ती है, तो भले ही यह विश्व रिकॉर्ड तोड़े या नहीं, लेकिन राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तो जरूर चुनौती दे सकता है.
पपीते के इस पेड़ पर लगे हैं 300 फल, भारत के सबसे ऊंचे पेड़ से सिर्फ एक फिट कम है हाईट
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