Nation- सैकड़ों फीट ऊपर से गिरते झरने, मनमोहक वादियां… न्यू ईयर के लिए बेस्ट हैं झारखंड के ये टूरिस्ट स्पॉट्स- #NA

सैकड़ों फीट ऊपर से गिरते झरने, मनमोहक वादियां... न्यू ईयर के लिए बेस्ट हैं झारखंड के ये टूरिस्ट स्पॉट्स

झारखंड का लोध वाटरफॉल (सांकेतिक तस्वीर)

नए साल को यादगार और खास बनाने के लिए अक्सर लोग बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाना पसंद करते हैं. ऐसा ही झारखंड राज्य के अलग-अलग जिले में कई टूरिस्ट प्लेस मौजूद हैं जो आपके लिए बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन हो सकते हैं. आसमान छूते गगनचुम्बी पहाड़, घने जंगल, आंखों को सुकून देने वाली हरियाली और सैकड़ों फिट की ऊंचाई से जमीन पर गिरते वॉटरफॉल मौजूद हैं. वहीं सबसे खास बात ये है कि यहां मौजूद कई वॉटरफॉल्स ऐसे हैं जो विदेशों में स्थित वॉटरफाल्स से भी ज्यादा आकर्षक और मनोरम हैं. आई जानते हैं ऐसे ही झारखंड के बेहतरीन टूरिस्ट डेस्टिनेशन वाले स्थानों के बारे में…

जोन्हा वॉटरफॉल

रांची के सिल्ली क्षेत्र में स्थित जोन्हा फॉल राज्य के सबसे प्रसिद्ध वॉटरफॉल में से एक है. यहां राढु नदी का पानी लगभग 144 फीट की ऊंचाई से गिरता है, जो इस वॉटरफॉल को खास बना देता है. करीब 550 सीढ़ियां से नीचे उतरकर जोन्हा वाटरफॉल का नीचे से दीदार कर सकते हैं. जोन्हा फॉल के ऊपर से गिरने वाला पानी इतना साफ होती है, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो ऊपर से दूध गिर रहा हो. जोन्हा फॉल को “गौतम धारा ” के नाम से भी जाना जाता है. नव वर्ष के साथ-साथ अन्य मौके पर यहां पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिसा से बड़ी संख्या में सैलानी अपने परिजन और दोस्तों के साथ पहुंचते हैं.

हुंडरू वॉटरफॉल

रांची के ही रांची- मुरी मार्ग पर स्थित हुंडरू वॉटरफॉल, झारखंड के सर्वाधिक ऊंचाई से गिरने वाला जलप्रपात है. यहां लगभग 320 फीट की ऊंचाई से स्वर्णरेखा नदी का पानी नीचे गिरता है , जो सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है. हुंडरू फॉल पहुंचने के लिए लगभग 745 सीढ़ियां उतरना होता है, जो लोगों को काफी रोमांचित करता है. हुंडरू वॉटरफॉल पहुंचना बेहद आसान है. यहां पहुंचने के लिए कई पब्लिक बसें, टैक्सी चलती हैं. इसके साथ ही आप अपने निजी वाहनों से भी यहां बेहद आसानी से पहुंच सकते हैं.

दशम वाटरफॉल

दशम वाटरफॉल राजधानी रांची से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर रांची- टाटा रॉड पर तमाड़ क्षेत्र में स्थित है. दशम फॉल खूबसूरत और बेहद प्रसिद्ध जलप्रपात में से एक है, घने जंगलों और पहाड़ों के बीच है. दशम फॉल में 10 झरनों का पानी एक साथ लगभग 144 फीट की ऊंचाई से गिरता है. इसीलिए इस वाटरफॉल को दशम फॉल के नाम से जाना जाता है. यहां पहुंचना आसान है, यहां आप निजी वाहनों से आ सकते, इसके साथ ही बस और टैक्सी से भी पहुंच सकते हैं. यहां खाने-पीने की सारी सुविधाएं उपलब्ध है.

पतरातु घाटी

रांची से लगभग 35- 40 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद पतरातु घाटी की हसीन वादियों को और यहां की खूबशूरती देख आप भूल जाएंगे कि आप देश में है. विदेश की तरह इस घुमावदार घाटी में सड़क बनी है जो लगभग 1300 फीट की ऊंचाई पर है. हरे भरे जंगलों से घिरे होने और घुमावदारी सड़कों के कारण यह घाटी, सैलानियों को काफी अट्रैक्ट करता है और बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है. घाटी से नीचे उतरने के बाद आप पतरातु डैम में जाकर विदेशी पक्षियों के बीच नौका विहार कर नव वर्ष के पहले दिन को यादगार बना सकते हैं.

सीता वाटरफॉल

सीता फॉल भी राज्य का एक प्रमुख वॉटरफॉल है, जो सुरिक्षत होने के कारण लोगों के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. सीता फॉल में भी लगभग 250 फीट की ऊंचाई से पानी गिरता है, और इस फॉल से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान प्रभु श्री राम और माता सीता यहां पर रुके थे. इन्ही कारणों से यह सीता फॉल सैलानियों के बीच पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.

पंच घाघ वाटरफॉल

रांची से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर खूंटी जिला में स्थित पंचघाघ वाटरफॉल नव वर्ष के मौके पर सैलानियों की भीड़ से पटा रहता है. यह वाटरफाल झारखंड के सबसे सुरक्षित जलप्रपात में से एक है, यहां पर्यटकों के नहाने के लिए 5 पांच अलग-अलग दिशाओं से गिरती हुई झरनों के पानी से एक बड़ा तालाब बनाया गया है, जो देखने में प्राकृतिक स्विमिंग पूल की तरह है. जहां पहुंचने वाले लोग प्रकृति के बीच वाटर पार्क की तरह यहां नहाते हैं और पानी में खेलते हैं. पांच धाराओं में बहती हुई नदी का पानी एक साथ आंकर गिरता है ,इसी लिए इसे पंच घाघ कहते हैं. यहां पहुंचने के लिए निजी वाहनों के साथ-साथ बस और टैक्सी का सहारा ले सकते हैं.

देउड़ी मंदिर

झारखंड के सबसे प्रसिद्ध और पौराणिक मंदिर में से एक देउड़ी मंदिर रांची जिले अंतर्गत रांची- जमशेदपुर मुख्य मार्ग पर तमाड़ इलाके में स्थित है. यह एक बेहद प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है, जहां 16 भुजाओं वाली देवी मां स्थापित है. जिन्हें काली या दुर्गा का रूप माना जाता है. इसके साथ ही दिउड़ी मंदिर में होने वाली पूजा पद्दति भी खास है. यहां आदिवासी पाहन और ब्राह्मण दोनों पूजा करवाते है जो आदिवासी-हिंदू संस्कृति के अनोखे संगम के लिए जाना जाता है.

लोध वाटरफॉल

लोध जलप्रपात राज्य का सबसे ऊंचा जलप्रपात है जो लातेहार जिले के महुआडाड प्रखंड में स्थित है. इसे लोध जलप्रपात और बूढ़ा घाघ जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है. यहां लगभग 470 फीट (143 मीटर) की ऊंचाई से पानी गिरता है. इस जलप्रपात में गिरने वाली झरने की पानी की आवाज लगभग 10 किलोमीटर की दूरी से ही सुनाई पड़ती है. राजधानी रांची से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस वॉटरफॉल पर आप सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं .

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