Nation- उसने मुझे बम बनाते देखा तो 3 महीने तक… मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में मोहम्मद अली का दर्द- #NA

उसने मुझे बम बनाते देखा तो 3 महीने तक... मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में मोहम्मद अली का दर्द

मुंबई ट्रेन ब्लास्ट. (फाइल फोटो)

2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट मामले बीते सोमवार (21 जुलाई) को बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए सभी 12 दोषियों को निर्दोष करार देकर उन्हें बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोप साबित करने में पूरी तरह से विफल रहा है. इस केस में निचली अदालत ने कुल 12 आरोपियों को पहले दोषी ठहराया था, जिनमें से 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. 12 आरोपियों में से एक आरोपी की मौत हो चुकी है, ऐसे में 11 आरोपी बचे थे, जिन्हें बरी कर दिया गया.

ये फैसला इन लोगों के लिए बड़ी राहत है जिन्हें अपनी जिंदगी के कई साल जेल में गुजारने पड़े. इन्हीं में से एक हैं मोहम्मद अली आलम शेख. अली को विशेष MCOCA अदालत ने इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उन पर मुख्य रूप से षड्यंत्र का हिस्सा होने का आरोप था. रिपोर्टों के अनुसार उन पर यह आरोप भी था कि बमों को असेंबल करने में उसके घर का इस्तेमाल किया गया था. और वो स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का एक कार्यकर्ता भी था.

मोहम्मद अली ने बयां किया दर्द

टीवी 9 भारतवर्ष की टीम मोहम्मद अली के घर पहुंची. इस दौरान उसने न सिर्फ अपनी पूरी कहानी बताई बल्कि अपने दर्द को भी बयां किया. मोहम्मद ने बताया कि इस केस से पहले वो सामाजिक कार्यों में जुड़ा हुआ था, जिसमें रहते हुए उसने वीडीओ पार्लर, गैंबलिंग जैसे कई अवैध धंधे बंद करवाए थे. उसने बताया कि स्थानीय पुलिस अधिकारी का हफ्ता बंद हो गया था. जिसकी वजह से उसे लगातार परेशान किया जाता था और उसे किसी बड़े केस में फंसाने की धमकी भी दी जाती थी.

‘दिन दिन भर पुलिस स्टेशन में बैठाकर रखा’

अली ने आगे बताया कि ट्रेन ब्लास्ट के बाद शहीद विजय सालस्कर ने टॉर्चर किया.उन्हें दिन दिन भर पुलिस स्टेशन में बैठाकर रखा जाता था. उसने आरोप लगाया कि जिस चश्मदीद ने ये कहा कि उसने मुझे बम बनाते देखा तो तीन महीने तक उसने जांच एजेंसियों को क्यों नहीं बताया. वह चश्मदीद कोर्ट के सामने बदल गया. अली ने आरोप लगाया कि ATS के अधिकारियों ने जबरन एक थ्योरी गढ़ी की ब्लास्ट में जो कुकर इस्तेमाल हुआ था वह उसके घर में मिले कुकर के साथ खरीदा गया था.

‘जबरदस्ती आरोप कुबूल करवाए गए’

उसने बताया कि ATS की जांच मनगढ़ंत थी और इस मामले में आज भी जो लोग जिम्मेदार हैं वो खुली हवा में सांस ले रहे हैं. लेकिन उन्हें जेल में भेज दिया गया, जहां उन्हें यातनाएं दी गईं, उन पर थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया और जबरदस्ती आरोप कुबूल करवाए गए. उन्होंने कहा कि इसके आधार पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया. अली ने ये भी कहा कि उस समय के ATS चीफ केपी रघुवंशी पर कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी वजह से उनकी जिंदगी बर्बाद हुई.

‘बेगुनाही की लड़ाई आगे भी लड़ेंगे’

वहीं महाराष्ट्र सरकार के हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले पर अली ने कहा कि वो सरकार और कोर्ट दोनों का हम सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा कि जैसे हम लोगों ने 19 साल अपनी बेगुनाही की लड़ाई लड़ी है वैसे ही आगे भी लड़ेंगे.

वहीं इस ब्लास्ट के लिए कौन जिम्मेदार है?. इसके जवाब में अली ने कहा कि उनके हिसाब से इसमें इंडियन मुजाहिदीन का हाथ है , इस मामले में उस समय के डीसीपी देवेन भारती , राकेश मारिया जैसे अधिकारियों ने कहा है कि 2008 तक हुए बम धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ है जिसके बयान और साक्ष्य हमने कोर्ट के सामने रखे जिसे कोर्ट ने माना और तब हमें रिहा किया गया.

अब्दुल वाहिद दीन मोहम्मद शेख पर आरोप

वहीं टीवी9 भारतवर्ष ने अब्दुल वाहिद दीन मोहम्मद शेख से भी बात की. जिन पर आरोप था कि उन्होंने कथित तौर पर आतंकवादियों को पनाह दी थी और 7/11 की साजिश की बैठकों में हिस्सा लिया था. इसके साथ ही उन पर यह भी आरोप था कि उन्होंने ए मुंब्रा के एक घर में एहसानुल्लाह (Ehsanullah) और अबू हसन (Abu Hasan) को रखा था, जहां कथित तौर पर साजिश की बैठकें हुई थीं और बमों को असेंबल करने में मदद की गई थी.

9साल जेल में बिताने के बाद जेल से हुए रिहा

वाहिद शेख उन 13 आरोपियों में से एक था जिन्हें महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने गिरफ्तार किया था. हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें 9 साल जेल में बिताने के बाद 2015 में ही सभी आरोपों से बरी कर दिया था. अब्दुल का कहना है कि वो हाई कोर्ट के इस फैसले से बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन सबके साथ न्याय किया है.

उनकी मांग है कि ATS अधिकारियों के ऊपर जो लोग इस जांच में शामिल थे उन पर FIR कर कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कोर्ट में कोई चश्मदीद नहीं टिका और सभी ने दबाव में आकर बयान दिए थे, इसलिए कोर्ट ने उसे मान्य नहीं किया और सभी को बरी कर दिया गया है. उन्होंने ये भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट जा रही है उनका अधिकार है जिन पहलुओं को हाई कोर्ट ने देखा है उन्हीं पहलू पर सुप्रीम कोर्ट फैसला करेगा.

उसने मुझे बम बनाते देखा तो 3 महीने तक… मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में मोहम्मद अली का दर्द

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