Nation- कहां है पृथ्वी की पहली जमीन? जो समुद्र से सबसे पहले निकली थी बाहर; क्या आप जानते हैं वो जगह?- #NA

झारखंड के मेगालीथ (वृहत पाषाणों) को वैश्विक धरोहर के रूप में पुरी दुनिया को रूबरू करवाने की तैयारी है. सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 जनवरी से स्विट्जरलैंड के दावोस और यूके की यात्रा पर रहेंगे. यह यात्रा सिर्फ प्रदेश की औद्योगिक क्षमता से दुनिया को अवगत कराने एवं शिक्षा के उन्नयन के लिए नहीं, बल्कि यहां की कंदराओं और जंगलों में प्राचीन काल से अवस्थित पाषाणों को सम्मान देने के लिए भी है.

दुनिया इस बात से भी अवगत हो सके कि यह झारखंड राज्य का सिंहभूम वह क्षेत्र है, जहां पृथ्वी की पहली जमीन समुद्र से ऊपर उठी थी. ऐसा वैज्ञानिकों का कहना है. एक ओर यहां के पंक्तिबद्ध मेगालीथ सूर्य की गति और दिन-रात की समय अवधि से संबंधित हैं. वहीं, दूसरी ओर गुफाओं में प्राचीन काल से अवस्थित भित्ति चित्र और जीवाश्म युक्त वन प्रांतर एक अद्भुत एवं दुर्लभ भू-दृश्य की निरंतरता का भी निर्माण करते हैं.

Megaliths

मेगालीथ को मिलेगी पहचान और सम्मान

झारखंड के पत्थर किसी भूले हुए संसार के अवशेष नहीं हैं, बल्कि आज भी जीवंत हैं, जो हजारों सालों से चली आ रही विरासत, खगोल विज्ञान और उससे जुड़ी मानवीय चेतना को दर्शाती है. इन सब को समाहित कर दावोस और यूनाइटेड किंगडम की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल झारखंड में मौजूद पृथ्वी के सबसे पुराने पाषाणों और उसकी सांस्कृतिक निरंतरता का सत्य भी बताएगा, ताकि अब तक उपेक्षित इन मेगालीथ को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और सम्मान दिलाया जा सके.

Megaliths (2)

झारखंड के महापाषाण कालीन भू-दृश्य, जो दूरस्थ संग्रहों में नहीं बल्कि राज्य के सुदूर गांवों और जंगलों में संरक्षित हैं, इस बात का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं कि विरासत को समुदायों के भीतर समाहित रखते हुए कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है. यह भारत और यूनाइटेड किंगडम के सांस्कृतिक संरक्षण और सहयोग की कसौटी के साथ घनिष्ठ रूप से मेल भी खाता है, जो नैतिक संरक्षण, संग्रहालय साझेदारी, अनुसंधान के आदान-प्रदान और विरासत को यथास्थान संरक्षित रखने को बढ़ावा देता है.

Mahabubabad (25)

वैश्विक इतिहास में है महत्वपूर्ण स्थान

हजारीबाग जिला के पकरी बरवाडीह में अवस्थित मेगालीथ सूर्य की गति और इक्वीनोक्स से संबंधित हैं, जिससे झारखंड के प्रागैतिहासिक काल को वैश्विक इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है. इन पत्थरों की संरचनाएं यूनाइटेड किंगडम के स्टोनहेंज जैसे प्रतिष्ठित स्थलों से तुलना की जा सकती है, जो महाद्वीपों और सदियों से चली आ रही मानव प्रवृत्ति को दर्शाती हैं. जिसके तहत समय, मृत्यु और ब्रह्मांडीय व्यवस्था को पत्थर में अंकित किया गया है.

क्या होता है मेगालीथ?

इस्को के शैल चित्रों के साथ सोहराय और कोहबर पेंटिंग की निरंतरता तथा मंडरो के फासिल्स दुर्लभ भू-दृश्य का निर्माण करते हैं, जहां प्राचीन काल और जीवंत मानव संस्कृति एक ही भौगोलिक क्षेत्र में सह-अस्तित्व में वास करती है. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दावोस और यूनाइटेड किंगडम में झारखंड अपनी आर्थिक और विकास के विजन को प्रस्तुत करके एक ऐसा परिदृश्य प्रदान कर रहा है, जो वैश्विक चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है. बात दें कि प्राचीन काल में बिना सीमेंट या गारे के, केवल बड़े-बड़े पत्थरों (शिलाओं) से बनी विशाल संरचनाएं को मेगालीथ कहा जाता है.

कहां है पृथ्वी की पहली जमीन? जो समुद्र से सबसे पहले निकली थी बाहर; क्या आप जानते हैं वो जगह?

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