Nation- गुजरात में होगा ‘महादेवी’ का इलाज, कोल्हापुर से भेजी जाएगी जामनगर; आखिर क्या है बीमारी?- #NA

गुजरात में होगा 'महादेवी' का इलाज, कोल्हापुर से भेजी जाएगी जामनगर; आखिर क्या है बीमारी?

हथिनी महादेवी.

अभी हाल ही में 105 साल की हथिनी ‘वत्सला’ ने दम तोड़ दिया था. ‘वत्सला’ मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में रहती थी. उसे एशिया की सबसे बुजुर्ग हथिनी कहा जाता था. वत्सला की मौत 8 जुलाई को हुई थी. वह 2003 में रिटायर होने से पहले वन अभियानों में काम करती थी. ‘वत्सला’ की मौत से टाइगर रिजर्व में काम करने वाले कर्मचारी काफी दुखी थे. ‘वत्सला’ के जाने के बाद एक और बीमार हथिनी को लेकर चिंता बढ़ गई है. इस हथिनी का नाम ‘महादेवी’ है. महादेवी कोल्हापुर में रह रही थी. अब उसे इलाज के लिए गुजरात के जामनगर भेजा जाएगा.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कोल्हापुर में रह रही बीमार हथिनी महादेवी को गुजरात के जामनगर में स्थित राधे कृष्ण एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी है. यह ट्रस्ट वंतारा पहल द्वारा समर्थित है और हाथियों की विशेष देखभाल के लिए जाना जाता है. कोर्ट के समक्ष पेश रिपोर्ट में बताया गया कि महादेवी गंभीर चोटों से पीड़ित है और उसे एक बेहतर माहौल की जरूरत है, जहां वह ठीक हो सके. अभी तक महादेवी जैन मठ में रह रही थी.

जामनगर स्थित सेंटर में हाथियों की देखभाल

रिपोर्ट देखने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि जामनगर स्थित यह सेंटर हाथियों की देखभाल के लिए बना है और महादेवी की सेहत के लिए यही सबसे उपयुक्त स्थान है. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा, हमने हाथी के जीवन और उसके गुणवत्तापूर्ण जीवन के अधिकार को मनुष्यों द्वारा उसके उपयोग के अधिकार से ऊपर रखा है. कोर्ट का यह फैसला जानवरों की भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों को समझने की दिशा में एक संवेदनशील कदम माना जा रहा है.

कोर्ट ने निर्देश दिया कि हथिनी महादेवी को दो हफ्ते के भीतर जामनगर ट्रस्ट को सौंप दिया जाए. महाराष्ट्र के बाल कल्याण वार्डन को परिवहन परमिट जारी करने और गुजरात के वार्डन को इस तरह के ट्रांसफर के लिए एनओसी जारी करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी इसमें सहयोग करने का निर्देश दिया.

70 साल तक जीवित रह सकते हैं हाथी

बता दें कि हाथी 70 साल तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन कुछ कैद में रहने वाले हाथी 80 साल या उससे भी अधिक समय तक जीवित रहते हैं. हाथियों की मौत के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें बीमारी, चोट या प्राकृतिक मृत्यु शामिल हैं. हाथियों की उम्र और उनके जीवनकाल को प्रभावित करने वाले कारकों में भोजन और पानी की उपलब्धता, शिकारियों की उपस्थिति और मानवीय गतिविधियां शामिल हैं.

गुजरात में होगा ‘महादेवी’ का इलाज, कोल्हापुर से भेजी जाएगी जामनगर; आखिर क्या है बीमारी?

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