नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। देश में जारी जेन-जी के हिंसक आंदोलन ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है। राजधानी काठमांडू से लेकर तराई के इलाकों तक विरोध प्रदर्शनों और झड़पों का दौर जारी है।
नेपाल इस समय भीषण राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। देश में जारी जेन-जी के हिंसक आंदोलन ने कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है। राजधानी काठमांडू से लेकर तराई के इलाकों तक विरोध प्रदर्शनों और झड़पों का दौर जारी है। सुरक्षा बलों को हालात काबू करने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज और गोली चलाने तक की नौबत आई, जिसमें 19 नेपाली नागरिकों की मौत हो गई। उसके बाद भी प्रदर्शन नहीं रुके।
इस हिंसक प्रदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री झलनाथ खनल की पत्नी की जलकर मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों ने उनके घर में आग लगा दी थी। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी व विदेश मंत्री आरजू राना देउबा को प्रदर्शनकारियों से सेना ने बचाया। इन हालातों के बीच प्रधानमंत्री केपी ओली ने इस्तीफा देकर सुरक्षित स्थान पर भागना ही ठीक समझा।
केपी ओली के इस्तीफे के बाद भी हिंसक प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। दरअसल, नेपाल की जनता का इस सिस्टम से भरोसा उठ गया है। वह एक ठोस बदलाव चाहते हैं। वह संसद भंग कर नई व्यवस्था को लागू करने की मांग कर रहे हैं।
इस प्रदर्शन से आर्थिक मोर्चे पर भी नेपाल संकट की मार झेलगा। हिंसा और बंद के कारण परिवहन और व्यापार प्रभावित हो रहे हैं। आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने से महंगाई बढ़ेगी। पर्यटन नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो इस हिंसा से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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