खबर शहर , Agra News: महंगा हुआ ओला, उबर व रैपिडो का सफर, किराया 40 फीसदी तक बढ़ा – INA

आगरा। ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियों का किराया पिछले एक साल में 25 से 40 फीसदी तक बढ़ गया है। परिचालन खर्च में वृद्धि, सख्त सरकारी नियमों और ड्राइवरों के कम मुनाफे के कारण यह कारोबार संकट में है। भारी छूट और कैशबैक के वादे अब मूल कंपनियों के लिए घाटे का सौदा हैं। किराए में बढ़ोतरी का मुख्य कारण सब्सिडी का खत्म होना है। गतिशील मूल्य निर्धारण और बढ़े हुए किराए से यात्रियों को न्यूनतम किराए से कई गुना अधिक चुकाना पड़ता है। केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, सभी शहरों में व्यस्त समय के दौरान कंपनियां आधार किराए का दो गुना तक वसूल सकती हैं। पहले यह सीमा डेढ़ गुना तक सीमित थी। ग्राहकों से अधिक किराया लेने के बावजूद ड्राइवरों की बचत कम है। इसका कारण कंपनियों का मोटा कमीशन है, जिसके विरोध में अक्सर हड़तालें होती हैं। बिना परमिट बाइक टैक्सी और सुरक्षा मानकों में कमी के कारण उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने इन कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया है।

मुंबई से आगरा तक बढ़ोत्तरी

मुंबई में ऐप-आधारित टैक्सियों का किराया पारंपरिक टैक्सियों के बराबर लाया गया है। नॉन-एसी कैब के लिए करीब 21 रुपये प्रति किलोमीटर और एसी कैब के लिए करीब 23 रुपये प्रति किलोमीटर का आधार दर तय हुआ है। पुणे में पहले डेढ़ किलोमीटर के लिए 37 रुपये और उसके बाद 25 रुपये प्रति किलोमीटर का दर है। दिल्ली-एनसीआर में कैब का शुरुआती दो किलोमीटर का आधार किराया 40 से 50 रुपये है, जिसके बाद 14 से 18 रुपये प्रति किलोमीटर लगता है। बेंगलुरु में गाड़ियों की कीमत के आधार पर किराया तय है। 10 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों के लिए पहले चार किलोमीटर का न्यूनतम किराया 100 रुपये है। कोलकाता में कैब का आधार किराया 45 से 50 रुपये से शुरू होता है, जो व्यस्त समय में 25 से 35 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच जाता है। आगरा में ओला मिनी और उबर गो का न्यूनतम किराया 50 से 70 रुपये है। इनका प्रति किलोमीटर किराया 10 से 13 रुपये अनुमानित है। ओला प्राइम और उबर प्राइम का न्यूनतम किराया 80 से 100 रुपये है। इनका प्रति किलोमीटर किराया 12 से 15 रुपये तक हो सकता है। रैपिडो बाइक टैक्सी का न्यूनतम किराया 30 से 50 रुपये है। इसका प्रति किलोमीटर किराया 5 से 8 रुपये के बीच रहता है।

अतिरिक्त शुल्क और अन्य नियम

प्रति किलोमीटर किराए के अलावा ग्राहकों को कुछ अतिरिक्त शुल्क भी देने पड़ते हैं। यदि ग्राहक या ड्राइवर बिना ठोस कारण के राइड रद्द करते हैं, तो किराए का 10 फीसदी (अधिकतम 100 रुपये तक) रद्दीकरण जुर्माना लगता है। यदि ड्राइवर आपको लेने के लिए तीन किलोमीटर से अधिक दूरी तय करता है, तो कुछ मामलों में खाली दूरी शुल्क भी बिल में जुड़ जाता है। सभी किराए में पांच फीसदी जीएसटी और टोल कर शामिल नहीं होते हैं। ये बिल के अंत में अलग से जुड़ते हैं। ड्राइवर के इंतजार करने पर शुरुआती तीन से पांच मिनट के बाद एक रुपये प्रति मिनट का इंतजार/प्रतीक्षा शुल्क भी लगता है। रात 12 बजे से सुबह छह बजे के बीच यात्रा करने पर 10 फीसदी अतिरिक्त रात्रि शुल्क देना अनिवार्य है।

कारोबार पर बढ़ता दबाव

राइड-हेलिंग बाजार में भारी प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को ग्राहकों को लुभाने के लिए अपनी जेब से भारी रकम खर्च करनी पड़ रही है। ओला जैसी कंपनियों के राइड-हेलिंग कारोबार को भारी घाटा हो रहा है। इसके कारण मूल कंपनी के मूल्यांकन और साख में गिरावट आई है। परिचालन खर्च बढ़ने और सरकारी सख्ती के चलते यह कारोबार मॉडल गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है।


Credit By Amar Ujala

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