खबर शहर , यूपी: अधिवक्ता की एफआईआर नहीं हुई तो भड़का गुस्सा, 11 सितंबर तक कार्य बहिष्कार; डीएम ने जांच के दिए आदेश – INA

आगरा में मारपीट के एक प्रकरण में वरिष्ठ अधिवक्ता राजपाल राणा की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज न करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिला चकबंदी एवं राजस्व बार एसोसिएशन कलेक्ट्रेट के पदाधिकारियों की मांग और डीएम के निर्देश के बावजूद क्राॅस प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। इससे नाराज बार ने 11 सितंबर तक कार्य बहिष्कार का एलान कर दिया है।

बार के पदाधिकारियों का कहना है कि पुलिस ने प्रकरण में एकपक्षीय कार्रवाई की है और प्राथमिकी तक दर्ज नहीं कर रही। यह तब है जब जिलाधिकारी भी निर्देश दे चुके हैं। जिला चकबंदी एवं राजस्व बार एसोसिएशन कलेक्ट्रेट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरिमोहन गौतम ने बताया कि जानलेवा हमले की स्पष्ट घटना के बावजूद पुलिस ने न तो कोई रिपोर्ट दर्ज की और न ही आला अधिकारी मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। पीड़ित अधिवक्ता के साथ ही अभद्र व्यवहार किया गया।पुलिस ने प्राथमिकी नहीं लिखी तो अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी मनीष बंसल से फिर मुलाकात की। जिलाधिकारी ने राजस्व अधिकारियों की एक टीम बनाकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

प्राथमिकी दर्ज नहीं की, लगाई रिपोर्ट

 धोखाधड़ी के एक मामले में सदर पुलिस ने पुलिस कमिश्नर के आदेश के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की। शिकायतकर्ता पर सिर्फ लेनदेन के विवाद पर केंद्रित तहरीर देने और लेखपाल का नाम हटाने की बात कहते हुए रिपोर्ट लगा दी। पीड़िता गुड़िया यादव का कहना है कि पति पन्नालाल सेना में सूबेदार मेजर हैं। वह पैरवी के लिए बार-बार नहीं आ सकते। धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की जिस पर उन्होंने प्राथमिकी के आदेश दे दिए लेकिन पुलिस ने दो महीने बाद भी प्राथमिकी नहीं दर्ज की है। वहीं, डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास का कहना है कि गुड़िया के खिलाफ लेखपाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस पर आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। इस बात को उन्होंने शिकायत करने में छिपाया था। महिल से रकम देने से संबंधित साक्ष्य देने के लिए कहा था। मगर उन्होंने साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए।

 


Credit By Amar Ujala

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