गोवा क्लब हादसे में लूथरा ब्रदर्स को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार
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गोवा के बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर की देर रात लगी भीषण आग में 25 लोगों की मौत हुई थी. इस भयावह हादसे में क्लब के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा पर गंभीर आरोप लगे. घटना के बाद दोनों भारत छोड़कर थाईलैंड के फुकेट चले गए, जिसके चलते इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया और उन्हें वहां हिरासत में लिया गया.
गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की और इसे कई कठोर टिप्पणियों के साथ खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया अपराध की प्रकृति बेहद गंभीर और भयावह है, और आरोपियों के आचरण से उनके इरादों पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है.
लिंचिंग का डर बताने वाली दलीलें कोर्ट ने ठुकराईं
लूथरा ब्रदर्स ने कोर्ट में दलील दी थी कि उन्हें सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां मिल रही है. गोवा लौटने पर भीड़ द्वारा लिंच किए जाने की आशंका है. वरिष्ठ वकील तनवीर अहमद मीर ने कहा कि राज्य बदले की भावना से काम कर रहा है. उनके मुवक्किलों की संपत्तियां तोड़ी जा रही हैं. हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि जांच अधिकारी या अदालत द्वारा कानून के तहत की गई कार्रवाई को जान का खतरा नहीं बताया जा सकता. कोर्ट ने जोर दिया कि अगर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है तो उन्हें वही प्रक्रिया अपनानी चाहिए.
गोवा की सक्षम अदालत में याचिका क्यों नहीं?
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि जब मामला गोवा में दर्ज हुआ है तो आरोपियों ने गोवा के अधिकार क्षेत्र वाली अदालत में यह याचिका क्यों नहीं दाखिल की. अदालत ने कहा कि याचिका के साथ लगाए गए दस्तावेज भी उनके कथनों को समर्थित नहीं करते. साथ ही यह भी कमेंट्स की गई कि हादसे के तुरंत बाद देश छोड़कर जाना उनके उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगाता है.
अवैध रूप से चल रहा था क्लब
कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजों का जिक्र करते हुए कहा कि क्लब के लाइसेंस, ट्रेड परमिट और लीज डीड पहले ही खत्म हो गए थे. इससे स्पष्ट है कि नाइटक्लब अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था. FIR में भी जिक्र है कि क्लब बिना आवश्यक अनुमतियों के चल रहा था और हादसे के बाद कई कर्मचारियों तथा सह-मालिकों की गिरफ्तारी हुई है. साथ ही लूथरा ब्रदर्स के स्वामित्व वाली एक बीच शैक को अवैध निर्माण के कारण ध्वस्त कर दिया गया.
कोर्ट ने आधार भी नहीं माना
लूथरा ब्रदर्स ने अपनी याचिका में कहा कि सौरभ को मिर्गी और गौरव को न्यूरोलॉजिकल समस्या है, इसलिए उन्हें चार सप्ताह की गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाए. गोवा पुलिस ने इसे फर्जी और बनावटी बताते हुए कहा कि उन्होंने किसी डॉक्टर से सलाह नहीं ली. बचाव पक्ष ने कहा कि हर मरीज रोज डॉक्टर के पास नहीं जाता, लेकिन यह तर्क भी कोर्ट को संतोषजनक नहीं लगा.
आगे की कानूनी प्रक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब लूथरा ब्रदर्स को या तो गोवा की अदालत में याचिका दाखिल करनी होगी या फिर जांच प्रक्रिया का सामना करना होगा. हादसे को लेकर जनाक्रोश अभी भी जारी है और पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं. अदालत का रुख स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में तथ्यों को छिपाने और कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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