Political – बाहरी शब्दों से समाधान नहीं…संविधान से सेक्युलरिज्म वर्ड हटाने की मांग पर बोले आरिफ मोहम्मद खान- #INA

बाहरी शब्दों से समाधान नहीं...संविधान से सेक्युलरिज्म वर्ड हटाने की मांग पर बोले आरिफ मोहम्मद खान

आरिफ मोहम्मद खान

टीवी9 भारतवर्ष के खास कार्यक्रम ‘सत्ता सम्मेलन बिहार’ में शिरकत हुए बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने संविधान से सेक्युलरिज्म वर्ड हटाने की मांग पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि बाहरी शब्दों से समाधान नहीं होगा. 1962 में खुद पंडित नेहरू ने कहा था कि हमने सेक्युलरिज्म
शब्द लिया है. हमने सेक्युलर विचाराधारा को इंपोर्ट नहीं किया है.

संविधान के अंदर से सेक्युलर शब्द को हटा देना चाहिए. समाजवाद शब्द हटा देना चाहिए? इस सवाल का जवाब देते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जिन लोगों को भी लगता है कि हमारी सभ्यता 5 हजार साल पुरानी है, अगर आप उन्हें बाहर का कोई शब्द देकर, कोई विचाराधारा बताकर, उसे बताएंगे कि इससे तुम्हारी समस्या का समाधान हो जाएगा तो वो लोग इसे बड़ी मुश्किल से स्वीकार करेंगे, क्योंकि उन्हें पता है कि हमारी संस्कृति इतनी पुरानी है.

ये हमारी बदकिस्मती है….

राज्यपाल ने कहा कि सेक्युलरिज्म से हम क्या समझते हैं. ये उसे आइडेंटिफाई करता है जिसमें चर्च और स्टेट है या धर्म. धर्म का पापुलर शब्द रिलीजन नहीं है. रिलीजन का मतलब कुछ और है. धर्म का मतलब कुछ और है. लेकिन हमारी बदकिस्मती ये है कि हमने धर्म के टांसलेशन के तौर पर रिलीजन को स्वीकार कर लिया है. वहां पर धर्म को राज्य से अलग करने के लिए एक आंदोलन चला था. उसके नतीजे में जो विचारधारा पैदा हुई उसको सेक्युलरिज्म का नाम दिया गया. हमारे यहां ये संकट कभी रहा ही नहीं.

आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि हमारे यहां तो ब्रह्मचारी आश्रम, गृहस्थ आश्रम हैं. हमारे यहां तो धर्म है. वेस्ट में धर्म या भारत के बाहर धार्मिक परंपराओ में अगर आप एक परंपरा से संबंधित हैं तब ही मोक्ष संभव है. तब ही आपको माना जाएगा कि आप सही रास्ते पर हैं.

नेहरू के कथन का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा दूसरी रही है. यहां पर इसे पंथ कहा गया है और इसको लेकर हर कोई आजाद है. सेक्युलरिज्म की थ्योरी उस सोसाइटी में डेपलप हुई जिस सोसाइटी में धर्म के नाम पर विवेक स्वीकृत था. अगर आप इस धार्मिक परंपरा के हैं और उसका राजा है तो उससे अलग जो धर्म है उनको बराबर का दर्जा नहीं दिया जाएगा. 1962 में खुद पंडित नेहरू ने कहा था कि हमने सेकुलरिज्म शब्द लिया है. हमने सेक्युलर विचाराधारा को इंपोर्ट नहीं किया है.

बाहरी शब्दों से समाधान नहीं…संविधान से सेक्युलरिज्म वर्ड हटाने की मांग पर बोले आरिफ मोहम्मद खान

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