ओम शांति, शांति ओम… मुस्लिम देश के राष्ट्रपति ने UN में भाषण देते हुए बोला संस्कृत का मंत्र, चौंकी दुनिया
संयुक्त राष्ट्र महासभा में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्तो ने संस्कृत अभिवादन और हिंदू मंत्र का उपयोग कर वैश्विक सौहार्द्र का संदेश दिया। उन्होंने सभी धर्मों को मानव परिवार के रूप में साथ रहने की अपील की और अमेरिका पर परोक्ष निशाना साधते हुए बहुपक्षीय सहयोग की अहमियत पर जोर दिया।
HighLights
संबोधन का अंत “ॐ शांति शांति ॐ” मंत्र से किया।
सभी धर्मों को एक मानव परिवार बताया गया।
अमेरिका के रवैये पर परोक्ष निशाना साधा गया।
एजेंसी, नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्तो (Prabowo Subianto) का संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दिया गया भाषण सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
मंगलवार को दिए गए इस भाषण में सुबियान्तो ने संस्कृत अभिवादन से शुरुआत की। अपने संबोधन का समापन भी हिंदू मंत्र “ॐ शांति शांति शांति ॐ” से किया।
अपने संबोधन की शुरुआत में सुबियान्तो ने कहा कि ॐ स्वस्त्यस्तु” जिसका प्रयोग इंडोनेशिया के हिंदू बहुल बाली द्वीप में होता है। इसका अर्थ है कि आप आशीर्वादित और सुरक्षित रहें। भाषण के अंत में उन्होंने ॐ शांति शांति शांति ॐ का उच्चारण किया। इसके साथ यह संदेश दिया कि यहूदी, मुस्लिम, ईसाई, हिंदू, बौद्ध सभी धर्मों को एक मानव परिवार के रूप में साथ रहना चाहिए। उन्होंने अरबी अभिवादन वस्सलामु अलैकुम वरहमतुल्लाही वबरकातुह का भी प्रयोग किया।
खुद का बताया था इंडियन डीएनए
अपने हालिया भारत दौरे के दौरान सुबियान्तो ने कहा था कि उनके भीतर इंडियन डीएनए है। उनके इस बयान और संस्कृत प्रयोग ने भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाई देने का संदेश भी दिया।
सुबियान्तो ने अपने भाषण में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र पर किए गए हमलों का बिना नाम लिए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश पूरे मानव समुदाय को धमका नहीं सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि इंडोनेशिया की आजादी की लड़ाई और विकास यात्रा में संयुक्त राष्ट्र का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने यूएन एजेंसियों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि आज इंडोनेशिया साझा समृद्धि और समानता के मोड़ पर खड़ा है।
वैश्विक एकता की अपील
सुबियान्तो ने अपने संबोधन में कहा कि यह सपना भले ही कठिन लगे, लेकिन यही वह सुंदर सपना है जिसे पूरा करने के लिए पूरी दुनिया को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उनका भाषण वैश्विक धार्मिक सौहार्द्र और बहुपक्षीयता को मजबूती देने की दिशा में एक अहम संदेश माना जा रहा है।
ओम शांति, शांति ओम… मुस्लिम देश के राष्ट्रपति ने UN में भाषण देते हुए बोला संस्कृत का मंत्र, चौंकी दुनिया
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