Political – जिस आरोप से EC ने तेजस्वी को घेरा उसे ही महागठबंधन ने बनाया हथियार, क्या बीजेपी को पड़ेगा भारी?- #INA

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव
बिहार विधानसभा चुनाव में विकास, रोजगार, धर्म, जाति जैसे मुद्दे किनारे हो गए हैं. इस बार सभी राजनीतिक दलों का फोकस वोट चोरी पर है. महागठबंधन जहां हर रोज वोट चोरी के नए-नए मामले सामने ला रहा है तो वहीं NDA पलटवार करने में जुटा है. इस पूरे विवाद में एक ही शख्स के कई EPIC नंबर का मामला भी उजागर हो रहा है. इसकी शुरुआत आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से हुई थी. चुनाव आयोग ने उनपर बड़ा आरोप लगाया था और उसी आरोप को महागठबंधन ने हथियार बना लिया है.
दरअसल, बिहार में SIR के मुद्दे के बीच तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था वोटर लिस्ट से उनका नाम काट दिया गया है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बीजेपी और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया था. तेजस्वी ने कहा था कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है. ये बीजेपी–RSS की बड़ी साजिश है. तेजस्वी के इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग हरकत में आया. आयोग ने बताया कि तेजस्वी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया है. उनका मतदान केंद्र बदला गया है. पहले उनका नाम मतदान केंद्र संख्या 171 पर था. अब उनका नाम मतदान केंद्र संख्या 204 पर है.
तेजस्वी पर क्या आरोप?
चुनाव आयोग ने तेजस्वी यादव पर दो वोटर आईडी कार्ड रखने का भी आरोप लगाया. आयोग के मुताबिक, तेजस्वी बिहार की दीघा विधानसभा सीट के वोटर हैं, लेकिन राज्य विधानसभा में विधायक के तौर पर वह राघोपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं. एनडीए के नेताओं ने चुनाव आयोग से तेजस्वी के दो वोटर कार्ड का संज्ञान लेने और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की अपील की.
तेजस्वी पर चुनाव आयोग के इस आरोप के बाद ही बिहार की सियासत में दो वोटर कार्ड का मुद्दा गरमा गया. तेजस्वी यादव भी NDA के उन नेताओं की जांच करने में जुट गए, जिनके पास दो-दो वोटर आईडी है. उनके निशाने पर सबसे पहले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा आए. तेजस्वी ने दावा किया कि विजय सिन्हा के पास दो वोटर कार्ड हैं.
EC के आरोप को बनाया हथियार
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि दो EPIC नंबर के साथ-साथ विजय सिन्हा की उम्र भी अलग -अलग है. एक में 60 साल तो दूसरे में 57 साल. वह उम्र घोटाला भी किए हैं. तेजस्वी ने कहा कि कौन फर्जीवाड़ा कर रहा है ये बिहार के लोगों को पता होना चाहिए. तेजस्वी के मुताबिक, विजय सिन्हा लखीसराय और बांकीपुर के वोटर हैं. उन्होंने दोनों जगह SIR फॉर्म भी भरा है. दोनों जगह ड्राफ्ट में उनका नाम भी आ गया है.
इसके बाद तेजस्वी ने मुजफ्फरपुर की मेयर निर्मला देवी को लेकर खुलासा किया. तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी नेता निर्मला देवी को दो-दो एपिक हैं. एक ही विधानसभा क्षेत्र से और उनके दोनों देवर के भी दो-दो एपिक है. निर्मला देवी के दोनों एपिक नंबर में उम्र भी अलग अलग है. इसके बाद तो तेजस्वी हर रोज बीजेपी के ऐसे नेताओं का नाम सामने ला रहे हैं जिनके दो-दो वोटर कार्ड हैं.
वीणा देवी लिस्ट में नया नाम
तेजस्वी ने जो सबसे नए नाम का खुलासा किया है वो हैं NDA सांसद वीणा देवी. उन्होंने आरोप लगाया कि इनके पास एक दो अलग अलग एपिक नंबर हैं. इनके दो अलग-अलग जिलों के दो अलग-अलग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में दो अलग-अलग वोट है. तेजस्वी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित नई ड्राफ्ट सूची में दो अलग अलग एपिक कार्ड के साथ, दो अलग-अलग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, दो अलग-अलग विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, दो अलग-अलग उम्र के साथ इनके दो अलग-अलग वोट कैसे बन गए. उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग द्वारा बीजेपी को जिताने के लिए की गई धांधली, फर्जीवाड़ा और मिलीभगत नहीं है.
कांग्रेस उठा रही पूरे देश का मुद्दा
ऐसा नहीं है कि महागठबंधन की ओर से तेजस्वी अकेले ये लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्हें कांग्रेस और राहुल गांधी का पूरा साथ मिल रहा है. तेजस्वी बिहार में दो एपिक नंबर के मुद्दे पर हमलावर हैं तो राहुल पूरे देश का डाटा निकालकर बीजेपी को घेर रहे हैं. उन्होंने फर्जी वोट को मुद्दा बनाया हुआ है. कर्नाटक की महादेवपुरा सीट को लेकर वो चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप लगा ही चुके हैं. तो वहीं अब केरल की सीट का मुद्दा उठाया है.
कांग्रेस और राहुल ने कहा कि केरल में एक महिला के घर से 9 फर्जी वोट मिले हैं. खास बात है कि ये केरल की वो इकलौती सीट (त्रिशूर) है, जहां से BJP को जीत मिली है. साफ है कि BJP और चुनाव आयोग बड़े पैमाने पर वोट चोरी में लगे हैं, जिसकी खबरें पूरे देश से आ रही हैं.
क्या जनता का मिलेगा साथ?
कांग्रेस और आरजेडी के हमले से साफ है कि वो चुनाव तक वोट चोरी के मुद्दे को जिंदा रखेगी और NDA पर हमलावर रहेगी. लेकिन गेंद तो जनता के पाले में ही होगी. वो इसपर महागठबंधन का कितना साथ देती है, ये चुनाव के नतीजों से साफ हो जाएगा. अगर वोट चोरी जैसे आरोपों के दम पर महागठबंधन बिहार फतह करने में कामयाब हो जाता है तो इससे पूरे देश में विपक्ष में नई जान आएगी और पूरे जोर-शोर से वो इस मु्द्दे को ज्यादा मजबूती से उठाने में जुट जाएगी.
जिस आरोप से EC ने तेजस्वी को घेरा उसे ही महागठबंधन ने बनाया हथियार, क्या बीजेपी को पड़ेगा भारी?
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