Political – Bihar Assembly Polls: NDA या महागठबंधन? प्रशांत किशोर की पहली लिस्ट किसे करेगी चोट?- #INA

Bihar Assembly Polls: NDA या महागठबंधन? प्रशांत किशोर की पहली लिस्ट किसे करेगी चोट?

प्रशांत किशोर, नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव

बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के कई दिन गुजर जाने के बाद भी महागठबंधन और एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है. बातचीत का सिलसिला लगातार जारी है. इस बीच राजनीतिक रणनीतिकार से राजनीति में आए प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 51 उम्मीदवारों की अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है. पहली लिस्ट के जरिए प्रशांत किशोर ने हर वर्ग को साधने की कोशिश की है. यह जानने की कोशिश करते हैं कि जन सुराज की पहली लिस्ट से महागठबंधन या एनडीए किसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है.

जन सुराज पार्टी ने कल गुरुवार को अपनी पहली लिस्ट में 51 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. इस लिस्ट में भोजपुरी गायक रितेश रंजन पांडे, पूर्व आईपीएस अधिकारी आर के मिश्रा और समाजवादी नेता स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की पोती जागृति ठाकुर जैसे कई नाम शामिल हैं. पार्टी ने अपनी लिस्ट में कई डॉक्टरों को भी मौका दिया है, इसमें डॉक्टर अमित कुमार दास (मुजफ्फरपुर), डॉक्टर शशि शेखर सिन्हा (गोपालगंज), डॉक्टर अजीत कुमार (इमामगंज), डॉक्टर विजय कुमार गुप्ता (आरा) और डॉक्टर लाल बाबू प्रसाद (ढाका) के नाम शामिल हैं.

पहली लिस्ट में अति पिछड़ों को तवज्जो

पार्टी की पहली लिस्ट में 51 उम्मीदवारों में से सबसे अधिक अति पिछड़े वर्ग से जुड़े लोगों को टिकट दिया गया है. इस वर्ग के खाते में 17 सीटें गई हैं जबकि 11 सीटें पिछड़े वर्ग से जुड़े लोगों और 9 सीटें अल्पसंख्यक समुदाय को दी गई हैं जबकि शेष सामान्य वर्ग से हैं.

बिहार में पहले चरण के लिए जिन 121 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जन सुराज पार्टी ने उसके लिए 51 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं. इनमें कई सीटें ऐसी भी रहीं जहां पर मुकाबला बेहद कांटे का रहा था. 51 सीटों में से 18 सीटों पर मुकाबला जोरदार रहा जहां पर हार-जीत का अंतर 10 हजार से भी कम वोटों का रहा था. इनमें से 13 सीटें ऐसी रहीं जहां अंत तक कड़ा मुकाबला चलता रहा और विजयी प्रत्याशी को 5 हजार से भी कम वोटों से जीत हासिल हुई. 29 सीटों पर हार-जीत का अंतर 16 हजार से कम वोटों का रहा था.

3 सीटों पर हार-जीत का अंतर हजार से कम

दिलचस्प बात यह है कि इन 19 सीटों में से 3 सीटों पर तो बेहद कांटे का मुकाबला हुआ था. हार-जीत का अंतर एक हजार से भी कम वोटों का रहा. बेगुसराय जिले की मतिहानी सीट पर महज 333 मतों के अंतर से हार-जीत हुई थी. तब यहां पर चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को जीत मिली थी. तब वह किसी गठबंधन में नहीं थी. लेकिन इस बार वह एनडीए के साथ चुनाव लड़ रही है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित गोपालगंज जिले की भोरे सीट पर जेडीयू को महज 462 वोटों के अंतर से जीत मिली थी. खगड़िया जिले की परबत्ता सीट पर 951 मतों के अंतर से जेडीयू के खाते में जीत गई थी.

10 सीटें ऐसी जहां 10 हजार से कम पर जीत

इन 3 बेहद कड़े मुकाबलों के अलावा 10 ऐसी सीटें (प्राणपुर, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी, दरभंगा ग्रामीण, बेगुसराय, खगड़िया, बेल्हार, आरा, करगहर और बोधगया) भी ऐसी रहीं जहां हार-जीत का आंकड़ा 5 हजार से भी कम वोटों का रहा. 10 हजार से कम वोटों के अंतर से मिली जीत के मामले में जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी की एनडीए को 11 सीटों पर कड़े मुकाबले में जीत नसीब हुई थी. साथ ही जिन सीटों पर हार का अंतर हजार से भी कम वोटों का रहा, उसमें 2 सीट (भोरे और परबत्ता) पर जेडीयू और एक (मतिहानी) पर लोक जनशक्ति पार्टी को जीत मिली थी. लोक जनशक्ति पार्टी तब एनडीए में नहीं थी.

19 कड़े मुकाबले में NDA की संघर्षपूर्ण जीत

ऐसे में देखा जाए तो 51 सीटों में से 19 सीटों पर हुए कड़े मुकाबले में एनडीए 11 सीटों पर तो एक सीट पर लोक जनशक्ति पार्टी को जीत मिली. इस तरह 2025 के चुनाव में एनडीए के खाते में 12 सीटें ऐसी हैं जहां उसके लिए प्रशांत किशोर की पार्टी खेला कर सकती है. चिराग की लोक जनशक्ति पार्टी अब एनडीए के साथ है. राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाले महागठबंधन को महज 7 सीटों पर 10 हजार से कम वोटों से जीत नसीब हुई थी. इस तरह से 6 सीटों पर जेडीयू को तो 5 सीटों पर बीजेपी को मुश्किल से जीत मिली थी.

बिहार चुनाव में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय लग रहा है. राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल की बी पार्टी है. वह चुनाव में तेजस्वी यादव को फायदा दिलाने की जुगत में है.

प्रशांत किशोर की पार्टी बड़े ही जोश के साथ मैदान में उतर रही है. 51 में से करीब 19 सीटों पर बेहद मुकाबला कड़ा रहा था और प्रशांत की पार्टी अगर वोट में सेंधमारी करने में कामयाब रहती है तो सीधे-सीधे एनडीए को नुकसान उठाना पड़ सकता है. अब देखना होगा कि एनडीए इस संभावित घाटे को रोकने की क्या कोशिश करता है.

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