Political – बिहार चुनावः SIR का मुद्दा डालेगा बड़ा असर? जानें TV9 की डिजिटल बैठक में राजनीतिक जानकारों ने क्या दी दलीलें- #INA

वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार और राजनीतिक विश्लेषक आलोक वत्स
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान चढ़ा हुआ है. सूबे में वोटर लिस्ट के लिए कराए गए विशेष गहन पुनरिक्षण (एसआईआर) पर भी जमकर राजनीति हुई है. इस बीच ‘टीवी9 की डिजिटल बैठक’ में वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक से इस संबंध में समझने की कोशिश की गई है कि क्या विधानसभा चुनाव में इसका कोई खास असर देखने को मिलेगा?
इस सवाल के जवाब में राजनीतिक विश्लेषक आलोक वत्स ने कहा कि मैं पिछले 10 दिन से बिहार में हूं और बिहार के कई इलाकों से गुजरा हूं. जिज्ञासा स्वरूप गांव-गरीब लोगों से भी बातचीत की, लेकिन मुझे बिहार में अभी तक किसी ने SIR को लेकर कुछ नहीं बताया. मैंने लोगों से पूछा है कि इससे तुमको कोई हानि हुई है, इसको लेकर किसी ने भी हामी नहीं भरी है.
उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति बेहद प्रबल है. यहां पर छोटे से छोटे तबके का आदमी और बड़े से बड़े तबके का आदमी एक वक्त की रोटी भले ही न खाए, लेकिन राजनीति नहीं छोड़ेगा. अगर किसी का नाम उसको पता लग गया कि वोटर लिस्ट से कट गया है तो वह दिन रात एक कर देगा. ऊपर नीचे तक, यहां तक कि बीएलओ को चैन से नहीं सोने देगा और जितने भी अधिकारी हैं सभी की नींद हराम कर देगा. सूबे में आरजेडी के पास कोई मुद्दा नहीं है.
आलोक वत्स ने राहुल गांधी की यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने देशभर में 4000 किलोमीटर की यात्रा की थी, जिसके बाद वे हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र हार गए और अब बिहार में भी 1300 किलोमीटर की यात्री की. इस यात्रा के अंत में प्रधानमंत्री मोदी के मां को गाली दिलवा दी गई. वे मेहनत करते हैं, लेकिन उनके साथ जो पॉलीटिकल एडवाइजर हैं वे उनसे कोई ऐसा गलत कदम उठवा देते हैं सब पर पानी फिर जाता है. इस मामले को लेकर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी ने आज तक खेद व्यक्त नहीं किया है. ये बात बिहार की जनता के दिल में चली गई है और इसका खामियाजा महागठबंधन को आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ सकता है.
नए नेता दस्तावेजी सबूतों से भाग रहे- वरिष्ठ पत्रकार
वहीं, SIR को लेकर वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार ने कहा कि आज बिहार के हर व्यक्ति के पास मोबाइल है. वह कर्ज लेकर फोन खरीदता है और खबरों के बारे में जानकारी रखता है. उन्होंने वोट कटने को लेकर महागठबंधन की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर कहा कि अगर आप राजनीतिक मंचों से दावा कर रहे हैं तो उसके सबूत क्यों नहीं दिखा रहे हैं. उदाहरण के तौर पर एक अनपढ़ महिला या किसान अपनी पेंशन के लिए सारा दिन खर्च कर देते हैं, क्या अगर उसका एसआईआर में नाम कट जाएगा तो वह चुप बैठने वाला है.
उन्होंने कहा कि SIR को लेकर कोई नेता लोकसभा और विधानसभा में क्यों नहीं बोल रहा है. आज के समय में जो हमारे लोकतंत्र के नए नेता हैं वे दस्तावेजी सबूतों से भाग रहे हैं. अब कुछ लोग कह रहे हैं कि सत्ता में आएंगे तो बता देंगे, ये धमकी है कि नहीं. ये एक तरह से लोकतंत्र पर हमला है.
बिहार चुनावः SIR का मुद्दा डालेगा बड़ा असर? जानें TV9 की डिजिटल बैठक में राजनीतिक जानकारों ने क्या दी दलीलें
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