Political – Bihar Elections: पति-पत्नी और चुनाव…बिहार इलेक्शन में उतरा यादव कपल, एक ही घर से दो सीटों की लड़ाई- #INA

Bihar Elections: पति-पत्नी और चुनाव...बिहार इलेक्शन में उतरा यादव कपल, एक ही घर से दो सीटों की लड़ाई

पूर्णिमा यादव और कौशल यादव

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार रिश्तों का बोलबाला है. कहीं पति पत्नी के लिए वोट मांग रहे हैं, तो कहीं साली समधन के लिए प्रचार कर रही हैं. राजनीतिक, जातिगत समीकरण और पारिवारिक बंधन सभी पार्टियों में दिख रहा है. टिकट वितरण में भी इसे प्राथमिकता दी जा रही है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण राष्ट्रीय जनता दल है, जिसने दो सीटों पर पति और पत्नी को टिकट दिया है.

लालू प्रसाद यादव की पार्टी ने नवादा से जहां कौशल यादव को उतारा है तो वहीं गोविंदपुर से उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव को टिकट दिया है. कौशल यादव और पूर्णिमा यादव जेडीयू में हुआ करते थे. दोनों इस साल जुलाई में आरजेडी में शामिल हुए.

आरजेडी ने काटा मौजूदा विधायक का टिकट

आरजेडी ने गोविंदपुर से मौजूदा विधायक मोहम्मद कामरान का टिकट काटा है. उनकी जगह पूर्णिमा को उम्मीदवार बनाया गया है. कामरान ने 2020 के चुनाव में जेडीयू की पूर्णिमा यादव को हराया था. पूर्णिमा चार बार विधायक रह चुकी हैं. एक बार गोविंदपुर जबकि तीन बार नवादा से जीती हैं. कौशल यादव भी कुल चार बार विधायक निर्वाचित हुए हैं. तीन बार गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र से जबकि एक बार नवादा विधानसभा क्षेत्र से. इनमें दो बार निर्दलीय जबकि दो बार जेडीयू से निर्वाचित हुए हैं.

बता दें कि कौशल परिवार का गोविंदपुर विधानससभा क्षेत्र में दबदबा रहा है.पहली बार कौशल यादव के पिता युगल किशोर प्रसाद यादव निर्वाचित हुए थे. उनके निधन के बाद कौशल की मां गायत्री देवी पांच बार गोविंदपुर का नेतृत्व कीं, जबकि चार बार कौशल दंपति निर्वाचित हुए हैं.

जानिए गोविंदपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

गोविंदपुर विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1967 में हुआ. कांग्रेस के अमृत प्रसाद ने जीत हासिल की. दो साल बाद 1969 में फिर चुनाव हुआ. इस बार गोविंदपुर की सियासत में लोकतांत्रिक कांग्रेस से युगल किशोर सिंह यादव की इंट्री हुई, जिन्होंने कांग्रेस के ही अमृत प्रसाद को मात्र 744 वोटों से मात दी.

1972 में कांग्रेस के अमृत प्रसाद फिर जीते. 1977 में जनता पार्टी के भत्तू महतो जीते. इसके बाद युगल किशोर सिंह यादव की पत्नी गायत्री देवी ने राजनीति में एंट्री की. 1980, 1985 और 1990 के चुनाव में गायत्री देवी, कांग्रेस के टिकट पर लड़ीं और जीतीं.

1995 में जनता दल के केबी प्रसाद जीतने में कामयाब हुए. 2000 के चुनाव में फिर गायत्री देवी ने वापसी की और आरजेडी के टिकट पर जीतीं. 2005 में कौशल यादव निर्दलीय और उनकी मां गायत्री देवी आमने-सामने थीं. कौशल यादव ने मां को हराया. 2010 में कौशल यादव ने जेडीयू का दामन थामा और एक बार फिर वहां से विधायक बने. 2015 में कौशल यादव ने अपनी पत्नी पूर्णिमा यादव को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाया और विधायक बनीं. लेकिन 2020 के चुनाव में उनकी हार हुई और आरजेडी के मोहम्मद कामरान विजयी हुए.

Bihar Elections: पति-पत्नी और चुनाव…बिहार इलेक्शन में उतरा यादव कपल, एक ही घर से दो सीटों की लड़ाई

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