Political – बिहार में राजनीतिक वारिसों पर कांग्रेस की सख्ती, दिग्गजों के बेटी-बेटियों को नहीं मिले टिकट- #INA

कांग्रेस के राजनीतिक दिग्गजों के बच्चों को नहीं मिला टिकट
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस राजनीतिक वारिसों का हमेशा ख्याल रखती है. बिहार में विधानसभा चुनाव में देश की सबसे पुरानी पार्टी ने राजनीतिक परिवारों से जुड़े बेटे-बेटियों को टिकट दिए जाने की जगह पुराने दिग्गज चेहरों पर भी भरोसा जताया. बिहार में पहले चरण की नामांकन प्रक्रिया आज शुक्रवार को खत्म हो रही है, लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर मची उलझन के बीच युवा पीढ़ी को टिकट देने में संकोच किया.
कांग्रेस में नेता पुत्रों-पुत्रियों को इस बार खास तरजीह नहीं मिली है. पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी और लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार इस बार चुनाव में अपने बेटे अंशुल अविजीत के लिए टिकट की मांग कर रही थीं, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे को टिकट नहीं दिया. अंशुल को कांग्रेस ने पिछले साल लोकसभा चुनाव के दौरान पटना साहिब लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था.
शकील अहमद की भी ख्वाहिश नहीं हुई पूरी
इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद की भी ख्वाहिश पूरी नहीं हुई. वह भी अपने बेटे के लिए बिहार से टिकट चाह रहे थे, लेकिन पार्टी ने इन्हें भी टिकट नहीं दिया. कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी मदन मोहन झा के बेटे को टिकट नहीं मिला है. कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की ओर से मदन मोहन झा और उनके बेटे की लोगों की बीच कम मौजूदगी को देखते हुए टिकट नहीं देने का फैसला लिया गया.
यही हाल पूर्व विधायक अवधेश कुमार सिंह का भी रहा. अवधेश के बेटे शशि शेखर सिंह 2020 के चुनाव में वजीरगंज सीट से मैदान में उतरे थे लेकिन वे चुनाव हार गए थे. हालांकि 2015 के चुनाव में कांग्रेस ने अवधेश को मैदान में उतारा था और वो चुनाव जीतने में सफल रहे थे. अवधेश वजीरगंज से अपने बेटे के लिए टिकट चाह रहे थे लेकिन पार्टी ने बेटे की जगह पिता का चयन किया. यहां से अब अवधेश सिंह ही चुनाव लड़ रहे हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के वीरेंद्र सिंह से होगा.
एक्ट्रेस नेहा शर्मा को भी नहीं मिला टिकट
इसी तरह चार बार के विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता अजीत शर्मा अपनी फिल्म अभिनेत्री बेटी नेहा शर्मा के लिए लंबे समय से टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने बेटी की जगह पिता अजीत पर ही भरोसा जताया और उन्हें उम्मीदवार बनाया.
कांग्रेस की इस लिस्ट में छठा नाम है सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह का. अखिलेश प्रसाद अपने बेटे के लिए कुर्था सीट से टिकट मांग रहे हैं, लेकिन इस सीट का बंटवारा नहीं हो सका है. सीट अभी महागठबंधन में उलझी हुई है.
इस बीच कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस तारिक अनवर ने खुलकर नाराजगी जताई है. तारिक अनवर का कहना है कि 30 हजार से ज्यादा वोटों से हारने वाले प्रत्याशी को फिर से उम्मीदवार बनाया गया है लेकिन महज 113 वोटों से हारने वाले का टिकट ही काट दिया गया. पूर्व विधायक गजानंद शाही पिछले चुनाव में महज 113 वोटों से हार गए थे और उनका टिकट इस बार कट गया है.
दूसरी ओर, पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव के बेटा और बेटी दोनों नाराज हैं. शरद के बेटे शांतनु को आरजेडी से टिकट मिलने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन टिकट नहीं मिल. उनकी बेटी सुभाषिनी कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव हैं, उन्होंने भी नाराज़गी जताई.
बिहार में राजनीतिक वारिसों पर कांग्रेस की सख्ती, दिग्गजों के बेटी-बेटियों को नहीं मिले टिकट
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